खनन में लगे ट्रैक्टरों के तांडव से ग्रामीण सड़कें बदहाल, राहगीर परेशान, विभाग मौन
Published by : Divyanshu Prashant Updated At : 31 May 2026 1:23 PM
क्षतिग्रस्त सड़क
Illegal Mining: किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड में मिट्टी और बालू के अवैध व अनियंत्रित खनन ने ग्रामीण सड़कों का हुलिया बिगाड़ कर रख दिया है. क्षमता से अधिक ओवरलोडिंग कर दिन-रात दौड़ रहे ट्रैक्टरों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों की चमचमाती पक्की सड़कें अब गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं, जिससे राहगीर और स्थानीय ग्रामीण बेहद परेशान हैं.
पौआखाली से रणविजय की रिपोर्ट
Illegal Mining: किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड के पौआखाली और आसपास के ग्रामीण इलाकों से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है. आगामी बरसात का मौसम नजदीक आने से पहले, ईंट भट्ठों के चालू सीजन का अनुचित फायदा उठाने के चक्कर में खनन माफिया पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं. क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मिट्टी और बालू का अवैध व अनियंत्रित खनन धड़ल्ले से जारी है. इस कार्य में लगे ओवरलोड ट्रैक्टरों के दिन-रात बेलगाम परिचालन के कारण ग्रामीण संपर्क की पक्की सड़कें समय से पहले ही पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं.
तातपौवा पंचायत में क्वालडांगी सड़क का हुआ सत्यानाश
क्षेत्रीय सड़कों की जमीनी और भयावह स्थिति का विवरण निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से साफ देखा जा सकता है:
- धंस रही हैं पक्की सड़कें: स्थानीय स्थिति की भयावहता को समझने के लिए ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत तातपौवा पंचायत के क्वालडांगी की ओर जाने वाली मुख्य पक्की सड़क को देखा जा सकता है. इस महत्वपूर्ण मार्ग की दुर्दशा की तस्वीरें यह बयां करने के लिए काफी हैं कि किस बेरहमी से सरकारी संपत्ति का नुकसान किया जा रहा है.
- गड्ढों में तब्दील हुआ मार्ग: ओवरलोड ट्रैक्टरों के दबाव के कारण सड़क पर बिछी अलकतरा (कोलतार) की परतें जगह-जगह से उखड़ चुकी हैं. जमीन धंसने और बड़े-बड़े गड्ढे बन जाने के कारण अब इस मार्ग पर पैदल चलना भी दूभर हो गया है.
प्रशासनिक खामोशी और विभाग की बेरुखी पर उठ रहे सवाल
खनन माफियाओं के बुलंद हौसले: सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि सार्वजनिक और सरकारी सड़कों की इस सरेआम बर्बादी पर संबंधित जिला विभाग और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है. ट्रैक्टर चालकों की इस मनमानी और ओवरलोडिंग पर किसी भी स्तर से कोई अंकुश नहीं लगाया जा रहा है. अधिकारियों की इसी बेरुखी और रहस्यमयी खामोशी के कारण अवैध खनन में लगे लोगों के हौसले बुलंद हैं, जबकि इसकी भारी कीमत आम जनता को उठानी पड़ रही है.
राहगीर और ग्रामीण भुगत रहे खमियाजा, गांवों का संपर्क टूटने की आशंका
जनता की मांग और खतरे:
सड़कों के पूरी तरह टूट जाने के कारण स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों के लिए प्रतिदिन का सफर किसी दुःस्वप्न जैसा हो गया है. सड़कों पर बने जानलेवा गड्ढों के कारण आए दिन दुपहिया (मोटरसाइकिल व साइकिल) वाहन चालक अनियंत्रित होकर गिर रहे हैं और चोटिल हो रहे हैं, जिससे इलाके में दुर्घटनाओं का ग्राफ काफी बढ़ गया है.
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अगर मानसून की पहली बारिश होने से पहले इन सड़कों की अनिवार्य रूप से मरम्मत नहीं कराई गई और अवैध ट्रैक्टरों के परिचालन पर तुरंत रोक नहीं लगी, तो आने वाले दिनों में यह पूरा मार्ग दलदल के टापू में बदल जाएगा. ऐसी स्थिति में दर्जनों गांवों का संपर्क मुख्य बाजार और अनुमंडल मुख्यालय से पूरी तरह टूट जाएगा. परेशान ग्रामीणों ने किशनगंज जिला प्रशासन और खनन विभाग के वरीय अधिकारियों से अविलंब इस गंभीर मामले में हस्तक्षेप करने, ओवरलोड ट्रैक्टरों पर पेनाल्टी लगाने और क्षतिग्रस्त सड़कों का पुनर्निर्माण जल्द से जल्द शुरू कराने की पुरजोर मांग की है.
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By Divyanshu Prashant
दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
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