विदेशी नागरिक को अवैध रूप से भारत में रहने को ले अदालत ने पाया दोषी

Published by : AWADHESH KUMAR Updated At : 30 May 2026 5:57 PM

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भारत-नेपाल सीमा के रास्ते अवैध रूप से देश में प्रवेश कर रह रहे एक विदेशी नागरिक को किशनगंज की अदालत ने दोषी करार देते हुए ढाई साल की सजा सुनाई है. अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए जुर्माना भी लगाया है

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किशनगंज की एक अदालत ने विदेशी अधिनियम के तहत दर्ज मामले में एक विदेशी नागरिक को अवैध रूप से भारत में रहने का दोषी पाया है. अदालत ने दोषी को दो वर्ष छह माह के साधारण कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है.

किशनगंज.

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरेश कुमार सिंह द्वितीय की अदालत ने एक विदेशी नागरिक को अवैध रूप से भारत में रहने का दोषी करार देते हुए दो वर्ष छह माह (ढाई वर्ष) के साधारण कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने दोषी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में उसे एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.

दोषी की पहचान 43 वर्षीय शफीउल आलम के रूप में हुई है. न्यायालय में प्रस्तुत अभिलेखों के अनुसार उसका पता नॉर्थ हार्डफोर्ट एवेन्यू, मकान संख्या-102, अटलांटा सिटी, न्यू जर्सी (अमेरिका) बताया गया है. जांच के दौरान यह भी सामने आया था कि वह मूल रूप से बांग्लादेश का निवासी है और कई वर्षों से अमेरिका के न्यू जर्सी में रह रहा था.

मामला वर्ष 2024 का है. भारत-नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी की 12वीं वाहिनी ने गुप्त सूचना के आधार पर दिघलबैंक बाजार क्षेत्र से शफीउल आलम और एक भारतीय युवक को हिरासत में लिया था. जांच के दौरान पाया गया कि शफीउल आलम नेपाल के रास्ते अवैध रूप से भारत में प्रवेश कर गया था और दिघलबैंक थाना क्षेत्र में बिना वैध दस्तावेजों के रह रहा था.

इसके बाद पुलिस ने विदेशी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया. यह मामला दिघलबैंक थाना कांड संख्या 38/2024 से संबंधित है. सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने शफीउल आलम को विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 14(ए)(बी) के तहत दोषी ठहराया.

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि दोषी को दी गई सभी सजाएं एक साथ चलेंगी. साथ ही जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान वह जितनी अवधि जेल में बिता चुका है, उसे कुल सजा अवधि में समायोजित किया जाएगा.

फैसले के बाद अदालत ने किशनगंज जेल अधीक्षक को हिरासत वारंट जारी करते हुए निर्देश दिया कि दोषी को तत्काल अभिरक्षा में लेकर न्यायालय के आदेश के अनुसार सजा भुगताने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए.

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