फोटोग्राफी की तकनीक से अपराध का खुलासा: एसपी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :28 Mar 2017 5:15 AM (IST)
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बैठक . गोष्ठी में तकनीक की समझ पर दिया गया जोर फोटोग्राफ के माध्यम से जहां अपराधियों की पहचान सुनिश्चित की जा रही है वहीं अपराध के तौर तरीकों को भी पहचान कर उस पर अंकुश लगाया जा रहा है़ इसलिए पुलिस पदाधिकारी वारदात के स्थल पर किस प्रकार से फोटोग्राफ ले जो उन्हें आगे […]
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बैठक . गोष्ठी में तकनीक की समझ पर दिया गया जोर
फोटोग्राफ के माध्यम से जहां अपराधियों की पहचान सुनिश्चित की जा रही है वहीं अपराध के तौर तरीकों को भी पहचान कर उस पर अंकुश लगाया जा रहा है़ इसलिए पुलिस पदाधिकारी वारदात के स्थल पर किस प्रकार से फोटोग्राफ ले जो उन्हें आगे के अनुसंधान में मददगार साबित हो इसकी जानकारी रहना आवश्यक है़
किशनगंज : फोटोग्राफ के माध्यम से जहां अपराधियों की पहचान सुनिश्चित की जा रही है वहीं अपराध के तौर तरीकों को भी पहचान कर उस पर अंकुश लगाया जा रहा है़ इसलिए पुलिस पदाधिकारी वारदात के स्थल पर किस प्रकार से फोटोग्राफ ले जो उन्हें आगे के अनुसंधान में मददगार साबित हो इसकी जानकारी रहना इनके लिए आवश्यक है़ आपराधिक घटनाओं में वारदात स्थल का पुलिस पदाधिकारी किस प्रकार की फोटोग्राफी ले जिनसे उन्हें अनुसंधान में मदद मिले इसके लिए सोमवार को पुलिस पदाधिकारियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया़ ग्रामीण विकास विभाग के रचना भवन में आयोजित इस कार्यशाला
को संबोधित करते हुए पुलिस अधीक्षक राजीव मिश्रा ने कहा कि पुलिस पदाधिकारियों को प्रशिक्षित करने आये अपराध अनुसंधान विभाग पटना के राजकीय छायाप्रति परीक्षक शहनवाज अनवर ने पुलिस पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आप अनुसंधान की जिम्मेवारी को समझते है़ इसलिए अनुसंधान में फोटो की बारिकियों को जानना आवश्यक है़ आखिर किस तरह एक फोटोग्राफ हमें अपराधियों तक पहुंचा सकता है़ फोटोग्राफ एक ऐसा साक्ष्य होता है
जिसे झूठलाया नहीं जा सकता है़ फोटोग्राफ में जो दिखता है वही अपराधिध्यों की पहचान सुनिश्चित कराता है़ उन्होंने फोटोग्राफ के एंगल के बारे में बताते हुए कहा कि घटना स्थल पर विखरे पड़े सामान शव या अन्य लावारिश चीजों की फोटोग्राफी करनी पड़ती है़ इसलिए इन चीजों को बिना हाथ लगाये क्लोक वाइज फोटोग्राफी करनी चाहिए़ दांये से बांयी ओर उपर से नीचे तथा हर एक सुक्ष्म चीजों की अलग अलग फोटो खींचनी चाहिए़ घटना स्थल की ऐसी फोटोग्राफी की जाये कि घटना स्थल का स्मरण हमें फोटो देख कर हो जाये़ फोटो देख कर हम अनुसंधान की डायरी लेखन में उन सभी चीजों का जिक्र कर सकते है जो
घटना स्थल पर सुक्ष्म चीजे स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता है़ इसलिए जरूरी है कि डायरी लेखन से पहले एक बार घटना स्थल पर खींची गयी फोटोग्राफ का अवलोकन अवश्य करें. शव की पहचान सुनिश्चित करने के लिए सर्वप्रथम पूरे चेहरे का फोटो खींचा जाना चाहिए़ चेहरे पर या शरीर के अन्य हिस्से पर गोदना आदि हो तो उसका फोटो जरूर खींच
लेना चाहिए़ चेहरे पर या शरीर के अन्य हिस्से पर गोदना आदि हो तो उसका फोटो जरूर खींच लेना चाहिए़ जिससे शव का पहचान सुनिश्चित होता है़ शरीर पर कटे का निशान या गोली के निशान का फोटो लेना चाहिए ताकि जख्म की गहरायी पता चल सके़ कार्याशाला में एसपी के अलावे एएसपी अनिल कुमार, एसडीपीओ कामिनी वाला, टाउन थानाध्यक्ष प्रमोद राय, बहादुरगंज थानाध्यक्ष आफताब अहमद, ठाकुरगंज थानाध्यक्ष राजेश तिवारी सहित सभी थाना के थानाध्यक्ष मौजूद थे़
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