महोत्सव में कलाकारों ने दी जीवंत प्रस्तुति
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :09 Feb 2017 6:25 AM (IST)
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कार्यक्रम . जनजातीय महोत्सव में रेखांकित होती है भारत की विविधता जिलाधिकारी ने आदि बिंब महोत्सव का शुभारंभ किया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा आदि महोत्सव से विभिन्न जनजातीय संस्कृति को समझने का मौका मिलता है. किशनगंज : पूर्वोत्तर सांस्कृतिक केंद्र कोलकाता एवं संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के तत्वावधान में आयोजित आदि बिंब महोत्सव […]
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कार्यक्रम . जनजातीय महोत्सव में रेखांकित होती है भारत की विविधता
जिलाधिकारी ने आदि बिंब महोत्सव का शुभारंभ किया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा आदि महोत्सव से विभिन्न जनजातीय संस्कृति को समझने का मौका मिलता है.
किशनगंज : पूर्वोत्तर सांस्कृतिक केंद्र कोलकाता एवं संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के तत्वावधान में आयोजित आदि बिंब महोत्सव का जिला पदाधिकारी पंकज दीक्षित ने दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया. इस मौके पर जिला पदाधिकारी पंकज दीक्षित ने कहा कि यह जनजातीय महोत्सव में भारत की विविधता रेखांकित होती है. इस महोत्सव के माध्यम से लोगों को विभिन्न जनजातीय नृत्य को देखने और उनकी संस्कृति को समझने का मौका मिलता है.
उनके नृत्य की खास बात है सहजता, सामूहिकता, सरलता के साथ एक कथा छिपी होती है जो उनके भोले मन की व्याख्या होती है. इसी कारण उनके नृत्यों और गीतों की भाषा को नहीं समझने के बाद भी सुगम्य और आनंद पहुंचाने वाले होता है. इसके बाद फिर आदि बिंब कलाकारों द्वारा स्थानीय टाउन हॉल में विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने जीवंत प्रस्तुति दी. मंगलवार को पश्चिम बंगाल, बिहार, उड़ीसा, झारखंड आदि राज्यों के जनजातीय नृत्यों की छटा टाउन हॉल के खुले मंच पर दिखी. इस मौके पर उत्तर बंगाल के धीमाल की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. सिक्किम का लिंबो नृत्य की प्रस्तुति के दौरान दर्शक झूम उठे. स्थानीय लोगों द्वारा भाषा समझने में दिक्कत के बाद भी सभी जनजातीय नृत्य को दर्शकों ने सराहा.
कलाकारों द्वारा लय और ताल के साथ सामूहिक प्रस्तुति ने टाउन हाल में बैठे दर्शकों को आनंदित कर दिया. बिहार के जनजातीय कलाकारों द्वारा संथाल, मुंडा, उरांव नृत्यों पर दर्शकों की खूब ताली मिली. केंद्र के निदेशक डॉ ओम प्रकाश भारती ने कहा कि महोत्सव में जनजातीय जीवन शैली की प्रस्तुति से लोगों को इनके बारे जानने की जिज्ञासा निश्चित रूप से बढ़ेगी. महोत्सव के समापन के मौके पर उन्होंने दर्शकों का धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा कि प्रस्तुत नृत्यों की विशेषता यह है कि यह पूर्वजों से पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होती आ रही है. इसी वजह से यह सहज और स्वभाविक लगती है. इसमें एक परंपरागत कथा
और कहानी भी छिपी रहती है. कार्यक्रम के समन्वयक निरंजन कुमार ने कहा कि दर्शकों द्वारा जैसी प्रतिक्रिया मिली उस वजह से बार-बार यह धरती आकर्षित करती है. यहां के प्रशासन का अच्छा सहयोग मिला. समारोह में ओडिशा, मिजोरम, त्रिपुरा, झारखंड, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और छत्तीसगढ़ के कलाकारों ने हिस्सा लिया. इस मौके पर अपर समाहर्ता रामजी साह, एसडीओ मो शफीक, वरीय समाहर्ता मनीष कुमार, हीरामुनी प्रभाकर, नप अध्यक्षा आंची देवी जैन, पूर्व नप अध्यक्ष त्रिलोक चंद्र जैन आदि मौजूद थे.
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