कटिहार में जिला स्तरीय उर्दू वाद-विवाद प्रतियोगिता: डीएम आशुतोष द्विवेदी ने किया 'उर्दूनामा' का विमोचन

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आत्मविश्वास: डीएम

जिला स्तरीय उर्दू वाद विवाद प्रतियोगिता में मौजूद डीएम व अन्य | Prabhat Khabar Network

कटिहार में जिला उर्दू भाषा कोषांग द्वारा आयोजित जिला स्तरीय उर्दू वाद-विवाद प्रतियोगिता में छात्रों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया. इस अवसर पर डीएम आशुतोष द्विवेदी ने 'जिला उर्दूनामा' पत्रिका का विमोचन भी किया.

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उर्दू निदेशालय, मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग (बिहार, पटना) के तत्वावधान में जिला उर्दू भाषा कोषांग, कटिहार द्वारा भव्य जिला स्तरीय उर्दू वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ कटिहार के जिला पदाधिकारी (डीएम) आशुतोष द्विवेदी ने दीप प्रज्वलित कर किया. इस खास मौके पर डीएम एवं अन्य वरीय प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा विशेष पत्रिका ''जिला उर्दूनामा'' का विमोचन भी किया गया.

"दूसरों के विचारों को सम्मान देना और तार्किक ढंग से बात रखना ही असली कला"

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए जिला पदाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने छात्रों का हौसला बढ़ाया और जीवन में वाद-विवाद प्रतियोगिताओं के महत्व को समझाया.

"वाद-विवाद (डिबेट) प्रतियोगिता का वास्तविक उद्देश्य केवल अपनी बात को ऊपर रखना या चिल्लाना नहीं है, बल्कि एक अनुशासित, मर्यादित और तार्किक दायरे में रहकर अपने विचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना है. इसके साथ ही यह हमें दूसरों के भिन्न विचारों को भी धैर्यपूर्वक सुनना और समझना सिखाती है. ऐसी सह-शैक्षणिक गतिविधियां विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास और भविष्य की नेतृत्व क्षमता के निर्माण में मील का पत्थर साबित होती हैं." — आशुतोष द्विवेदी, जिला पदाधिकारी, कटिहार

डीएम ने मंच से उपस्थित छात्र-छात्राओं को जिले के ही स्थानीय डिग्री महाविद्यालयों में दाखिला लेकर उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए विशेष रूप से प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक युवा उच्च शिक्षित होकर समाज और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं और एक जागरूक व आदर्श भारतीय नागरिक बनें.

तीन वर्गों में प्रतिभागियों की जोरदार भिड़ंत, उर्दू तहज़ीब का दिखा जलवा

उद्घाटन सत्र की समाप्ति के बाद मुख्य प्रतियोगिता का दौर शुरू हुआ, जिसे तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया था:

  1. मैट्रिक (10वीं) एवं इसके समकक्ष वर्ग
  2. इंटरमीडिएट (12वीं) एवं इसके समकक्ष वर्ग
  3. स्नातक (कॉलेज स्तर) एवं इसके समकक्ष वर्ग

प्रतियोगिता के दौरान छात्र-छात्राओं ने समसामयिक विषयों पर अपनी प्रभावशाली वक्तृत्व शैली, मजबूत तार्किक दलीलों और उर्दू भाषा व उसके व्याकरण पर अपनी उत्कृष्ट पकड़ से वहां मौजूद निर्णायक मंडल और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. पूरे दिन कार्यक्रम बेहद गरिमापूर्ण, अनुशासित और उत्साहजनक माहौल में चलता रहा.

विजेताओं का हुआ चयन, इन अधिकारियों की रही मौजूदगी

निर्णायक मंडल के कड़े मूल्यांकन के बाद तीनों ही शैक्षणिक वर्गों (मैट्रिक, इंटर और स्नातक) में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावियों का चयन किया गया. प्रतियोगिता के नियमनुसार:

  • प्रत्येक वर्ग में प्रथम स्थान पर एक-एक मेधावी छात्र का चयन हुआ.
  • द्वितीय स्थान के लिए तीन-तीन प्रतिभावान छात्रों को चुना गया.
  • तृतीय स्थान पर संयुक्त रूप से चार-चार प्रतिभागियों ने बाजी मारी.

गरिमापूर्ण उपस्थिति:

इस जिला स्तरीय कार्यक्रम को सफल बनाने में जिला प्रशासन के कई आला अधिकारियों की भूमिका रही. मौके पर मुख्य रूप से अपर समाहर्त्ता (आपदा) फिरोज अख्तर, जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी, डीईआरसी प्रबंधक अमरजीत कुमार सहित विभिन्न स्कूलों के प्रधानाध्यापक व उर्दू भाषा के विद्वान उपस्थित थे. कार्यक्रम के अंतिम चरण में जिला उर्दू भाषा कोषांग के प्रभारी ने आए हुए सभी अतिथियों, शिक्षकों, अभिभावकों और निर्णायक मंडल के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया.


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सूरज कुमार गुप्ता

लेखक के बारे में

By सूरज कुमार गुप्ता

सूरज कुमार गुप्ता पिछले 25 वर्षों से प्रिंट मीडिया में एक्टिव है. वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत की. राजनीतिक व सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों पर पत्रकारिता करना इनकी रुचि में शामिल है. सामाजिक कार्यो में उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2007 में इन्हें भारत सरकार की ओर से तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से सम्मानित किया था.

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