अमदाबाद में 40 साल से जर्जर सड़क बनी जी का जंजाल: बीच राह में तब्दील हुआ तालाब

पगडंडी सड़कों से जाती छात्राएं | Prabhat Khabar Network
40 वर्षों से छर्रामारी-बलरामपुर का मुख्य मार्ग अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. प्रशासनिक उपेक्षा के चलते यह मार्ग अब एक तालाब का रूप ले चुका है, जिससे करीब 30 हजार लोगों का जीवन खतरे में है. छात्र, मरीज और आमजन पगडंडियों के सहारे जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं.
प्रखंड की तीन प्रमुख पंचायतों को जोड़ने वाला छर्रामारी-बलरामपुर मुख्य मार्ग पिछले 40 वर्षों से पूरी तरह जर्जर और जर्जरहाल स्थिति में है. चार दशक बीत जाने के बावजूद प्रशासनिक उपेक्षा के कारण छर्रामारी, बैद्यनाथपुर और गारद टोला से बलरामपुर गांव को मनिहारी-अमदाबाद मुख्य सड़क से जोड़ने वाले इस मार्ग का निर्माण नहीं हो सका है. 1987 की विनाशकारी बाढ़ के दौरान कटाव के कारण यहां सड़क के बीचों-बीच एक विशालकाय गड्ढा हो गया था, जो आज एक बड़े तालाब का रूप ले चुका है. इसके चलते करीब 30 हजार की आबादी जान जोखिम में डालकर पगडंडियों के सहारे आवागमन करने को मजबूर है.
किसी की निजी जमीन की पगडंडी ही एकमात्र सहारा, बच्चों को हर पल हादसे का डर
उत्तरी करीमुल्लापुर पंचायत के मुखिया युधिष्ठिर मंडल और प्रमुख प्रतिनिधि मोहम्मद अजहर आलम ने बताया कि मूल सड़क की जमीन अब पूरी तरह तालाब में विलीन हो चुकी है. इस वजह से:
- छात्रों की फजीहत: प्रतिदिन छर्रामारी और आसपास के गांवों के सैकड़ों छात्र-छात्राएं अपनी पढ़ाई के लिए मध्य और उच्च विद्यालयों तक जाने हेतु किसी की निजी जमीन से होकर गुजरने वाली संकरी पगडंडी का सहारा लेते हैं. तालाब के किनारे से गुजरते वक्त हमेशा पैर फिसलने या किसी बड़ी अनहोनी की आशंका बनी रहती है.
- आबादी प्रभावित: इस जर्जर संपर्क मार्ग और तालाब के कारण तीन पंचायतों के अंतर्गत आने वाले विभिन्न गांवों की लगभग 30,000 की आबादी मुख्य धारा से कटकर रह गई है.
5 किलोमीटर खटिया पर ढोए जाते हैं मरीज, बरसात में बढ़ती है लाचारी
सड़क के अभाव का सबसे दर्दनाक पहलू स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सामने आता है. स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, बरसात और बाढ़ के दिनों में जब यह पगडंडी भी जलमग्न हो जाती है, तब आपातकालीन स्थितियां जानलेवा बन जाती हैं. किसी मरीज या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने के लिए गांव के लोग उन्हें खटिया (चारपाई) पर लादकर करीब 5 किलोमीटर पैदल चलने को विवश होते हैं. किसी तरह रासमोहन चौक स्थित मुख्य सड़क पर पहुंचने के बाद ही उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अमदाबाद या सदर अस्पताल कटिहार ले जाने के लिए कोई वाहन नसीब हो पाता है.
'टी-पुल' की है सख्त दरकार, सांसद को जमीन पर दिखाकर भी नहीं बदला भाग्य
भौगोलिक स्थिति को स्पष्ट करते हुए जनप्रतिनिधियों ने बताया कि मनिहारी-अमदाबाद मुख्य सड़क पर तो विभाग द्वारा पुल बना दिया गया है, लेकिन छर्रामारी, बैद्यनाथपुर और गारद टोला की सड़कों को इस मुख्य मार्ग से सुरक्षित जोड़ने के लिए उक्त स्थल पर एक 'टी-पुल' (T-Bridge) का निर्माण बेहद जरूरी है.
"हमने इस समस्या के समाधान के लिए जिला पदाधिकारी से लेकर स्थानीय सांसद तारिक अनवर को कई बार लिखित आवेदन दिए हैं. यहां तक कि सांसद महोदय को खुद इस स्थल पर लाकर समस्या की गंभीरता दिखाई गई थी. लेकिन चार दशक में सिर्फ आश्वासन मिले, धरातल पर कोई ईंट नहीं रखी गई. अब हम जल्द ही सांसद तारिक अनवर और कांग्रेस नेता इमरान प्रतापगढ़ी से दोबारा मिलकर इस स्थान पर अविलंब टी-पुल निर्माण की पुरजोर मांग करेंगे." — मोहम्मद अजहर आलम, प्रमुख प्रतिनिधि, अमदाबाद
आंदोलन के मूड में ग्रामीण:
विभाग की इस हठधर्मी और लंबी उदासीनता को लेकर क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है. मौके पर उपस्थित अमीरुद्दीन, मोफज्जल हुसैन, नैमूल हक, अकमल हुसैन, शरीफुल हक, रमजान अली, मोहम्मद निजाम, आमिर हुसैन और मोहम्मद मोहसिन सहित दर्जनों ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी उनकी मांगों को ठंडे बस्ते में डाला गया, तो वे उग्र प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar News Desk
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










