पाकिस्तान से युद्ध के बाद 93 हजार सैनिकों को कटिहार प्लेटफॉर्म नम्बर पांच पर देखने को लगी थी भीड़

Updated at : 07 May 2025 7:15 PM (IST)
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पाकिस्तान से युद्ध के बाद 93 हजार सैनिकों को कटिहार प्लेटफॉर्म नम्बर पांच पर देखने को लगी थी भीड़

पाकिस्तान से युद्ध के बाद 93 हजार सैनिकों को कटिहार प्लेटफॉर्म नम्बर पांच पर देखने को लगी थी भीड़

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– 1971 के बाद पहली बार सिविल सोसाइटी के लोग बने ब्लैकआउट मॉकड्रिल का गवाह – आर्मी, बीएमपी, आमजन व सीएमपी के जवानों ने साझा की उस समय की यादें – लोगोंने कहा, उस वक्त तामझाम कम लेकिन लोगों में था गजब का उत्साह फोटो 26 कैप्शन- कर्नल अनन्त कुमार फोटो 27कैप्शन- पुनीत सिंह फोटो 28 कैप्शन- राम सिंहासन चौहान फोटो 29 कैप्शन- सीएमपी से रिटायर्ड अवधेश सिंह प्रतिनिधि, कटिहार भारतज्प-पाकिस्तान से युद्ध की संभावना जताते हुए आर्मी, बीएमपी, आमजन से लेकर सीएमपी के जवानों ने 1971 की युद्ध को लेकर अपनी अपनी यादों को साझा किया. आर्मी से सेवानिवृत कर्नल अनन्त कुमार ने कहा, सिविल साेसाइटी के लिए 1971 के बाद पहली बार ब्लेकआउट मॉकड्रिल कराया जा रहा है. इसके तहत दुश्मनों के हवाई अटैक के दौरान बचने से सम्बंधित प्रशिक्षण दिया जाता है. छुपने से लेकर अपने आपको बचाने की व्यवस्था करनी होती है. यह कार्य आर्मी के लिए रूटिंग वर्क में शामिल है. समय समय पर इस तरह के मॉकड्रिकल प्रशिक्षण के रूप में कराया जाता है. बीएमपी सात सूबेदार से रिटायर्ड 84 वषीय भेरिया रहिका निवासी सिंह पुनीत सिंह ने 1971 में पाकिस्तान युद्ध के दौरान सहयोगी के रूप में शोपुर बॉर्डर पर तैनाती के दौरान कई यादों को साझा किया. कहा, उस समय बिहार के बीएमपी के कई बटालियनाें को मिलाकर हजारों की संख्या में जवानों को भेजा गया था. जिसमें वे भी गवाह हैं. इससे पूर्व 1965 युद्ध के लिए भी उनको शामिल होने का मौका मिला था. लेकिन कटिहार पहुंचते पहुंचते शीज फायर होने की वजह से वे लौट गये थे. वर्तमान में कटिहार मेडिकल रोड व तत्कालीन बड़ा बाजार के 82 वर्षीय निवासी राम सिंहासन चौहान ने 1971 के दौरान भारत पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध को लेकर बताया कि सायरन उस वक्त भी बजी थी. ब्लैकआउट मॉकड्रिल उस वक्त भी किया गया था. लेकिन इतना तामझाम नहीं था. शाम में कुछ देर के लिए ब्लैकआउट किया गया था. युद्ध समाप्ति के बाद करीब 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों को कटिहार प्लेटफॉर्म नम्बर पांच पर कुछ देर के लिए रोका गया था. सभी की आंखों पर काली पट्टी बंंधी थी. जिसे देखने के लिए वो भी गये थे. उसके बाद सभी को आगे की ओर भारतीय सैनिक ले गये. यद्ध के दौरान आमजनों में गजब का उत्साह था. लोगों के बीच पाकिस्तान के साथ युद्ध को लेकर गजब का जोश नजर आ रहा था. सीएमपी से रिटायर्ड भेरिया रहिका निवासी 81 वर्षीय अवधेश सिंह का कहना था कि युद्ध के दौरान उनका काम यातायात को दुरूस्त करने का था, सेना के जवानों को किस रूट के माध्यम से कहां जाना है पूर्व से तैयारी कर ली जाती थी.

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