बारसोई में नदी की लहरों पर रोमांच: मालापाड़ा घाट नौका दौड़ में कसवाटोली को पछाड़ बीनटोली बनी चैंपियन, उमड़ी भारी भीड़
फोटो - मालापाड़ा घाट में आयोजित नौका दौड़ प्रतियोगिता के दौरान नदी में नाव दौड़ाते प्रतिभागी और किनारे प्रतियोगिता का रोमांच देखते ग्रामीण व दर्शक.
बारसोई के मालापाड़ा घाट पर आयोजित नौका दौड़ प्रतियोगिता में आठ टीमों ने हिस्सा लिया, जिसमें बीनटोली ने बाजी मारी. इस आयोजन ने ग्रामीण खेल संस्कृति और आपसी भाईचारे का प्रदर्शन किया.
कटिहार के बारसोई प्रखंड अंतर्गत बांसगांव पंचायत के मालापाड़ा घाट पर ग्रामीणों के सामूहिक सहयोग से आयोजित नौका दौड़ प्रतियोगिता में आठ टीमों ने हिस्सा लिया. नदी के दोनों किनारों पर जुटी भीड़ ने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया. सेमीफाइनल में कसवाटोली ने मालापाड़ा और बीनटोली ने आलमपुर को हराकर फाइनल में जगह बनाई. रोमांचक फाइनल मुकाबले में बीनटोली की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया. आयोजन ने ग्रामीणों की पारंपरिक खेल संस्कृति, सामूहिकता और आपसी भाईचारे की जीवंत तस्वीर पेश की.
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आठ टीमों ने लिया प्रतियोगिता में हिस्सा
मालापाड़ा घाट पर आयोजित नौका दौड़ प्रतियोगिता में कुल आठ टीमों ने भाग लिया. नदी के दोनों किनारों पर बड़ी संख्या में ग्रामीण और दर्शक जुटे रहे. नावों की रफ्तार और खिलाड़ियों के उत्साह ने पूरे मुकाबले को रोमांचक बना दिया.
कसवाटोली और बीनटोली ने फाइनल में बनाई जगह
पहले सेमीफाइनल मुकाबले में मालापाड़ा और कसवाटोली की टीम आमने-सामने हुई. शानदार प्रदर्शन करते हुए कसवाटोली ने जीत हासिल कर फाइनल में प्रवेश किया. दूसरे सेमीफाइनल में आलमपुर और बीनटोली के बीच कड़ा मुकाबला हुआ, जिसमें बीनटोली की टीम विजयी रही.
रोमांचक फाइनल में बीनटोली ने मारी बाजी
फाइनल मुकाबला बीनटोली और कसवाटोली के बीच हुआ. दोनों टीमों ने जीत के लिए पूरी ताकत झोंक दी. नदी की लहरों को चीरती नावों और खिलाड़ियों के उत्साह ने मुकाबले को रोमांचक बना दिया. अंततः बीनटोली की टीम ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए प्रतियोगिता का खिताब अपने नाम कर लिया.
ग्रामीण परंपरा और संस्कृति को बचाने की पहल
आयोजकों और ग्रामीणों ने कहा कि आधुनिक मनोरंजन के दौर में पारंपरिक ग्रामीण खेलों की पहचान धीरे-धीरे कम हो रही है. ऐसे आयोजनों से स्थानीय खेल संस्कृति को जीवित रखने में मदद मिलती है. नौका दौड़ केवल मनोरंजन और प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि नदी से जुड़े ग्रामीण जीवन, सामूहिक सहयोग और आपसी भाईचारे की परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी है.
युवाओं और ग्रामीण प्रतिभाओं को मिलता है मंच
ग्रामीणों के अनुसार इस तरह के आयोजन युवाओं को पारंपरिक खेलों से जोड़ने के साथ स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी क्षमता दिखाने का अवसर भी देते हैं. सामूहिक भागीदारी से गांवों के बीच आपसी सहयोग और सामाजिक एकजुटता को भी मजबूती मिलती है.
मुख्य अतिथि समेत कई लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम का मंच संचालन पूर्व मुखिया इफ्तेखारुज्जमा ने किया. मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व विधायक महबूब आलम मौजूद रहे. मौके पर अफताब ताज, सरपंच प्रतिनिधि लतीफुर, पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि विकुल दास, पूर्व मुखिया राकेश चौधरी, मुस्ताक आलम, महबूब रहमानी, मुजफ्फर आलम, तौसीफ अहमद, शादाब, फैज, सज्जाद, मुसाहिद चौधरी, फखरूदीन चौधरी, मास्टर रजीउद्दीन, मुजाहिद, मंजूर आलम, प्रिंस सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे.
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