'भारत छोड़ो आंदोलन' में कदवा और डंडखोरा के रणबांकुरों ने छुड़ाए थे अंग्रेजों के छक्के, थाने में लगा दी थी आग

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कदवा के शहीद स्तंभ  | Prabhat Khabar Network

कटिहार जिले के कदवा और डंडखोरा प्रखंडों के वीरों ने 'भारत छोड़ो आंदोलन' में अदम्य साहस दिखाया. उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ बगावत करते हुए सरकारी संपत्तियों को निशाना बनाया और कई वीर गति को प्राप्त हुए.

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देश की आजादी की 79वीं सालगिरह को लेकर कटिहार जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भारी उत्साह और देशभक्ति का माहौल है. 'हर घर तिरंगा' अभियान के तहत चारों ओर राष्ट्रध्वज फहराए जा रहे हैं और विभिन्न कार्यक्रमों की तैयारियां जोरों पर हैं. इस राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर स्वाधीनता संग्राम में अपनी आहुति देने वाले वीर सपूतों को नमन किया जा रहा है. वर्ष 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' के दौरान कटिहार के कदवा और डंडखोरा प्रखंड के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों के खिलाफ जो अदम्य साहस दिखाया था, उसकी शौर्य गाथाएं आज भी क्षेत्र में गर्व के साथ सुनाई जाती हैं.

1942 में जब गांधी जी के आह्वान पर उबल पड़ा था कदवा

वर्ष 1942 में महात्मा गांधी द्वारा 'भारत छोड़ो आंदोलन' का आह्वान करते ही कदवा और आसपास के इलाकों में आजादी की लहर दौड़ गई थी. स्वतंत्रता सेनानी विष्णु प्रसाद सिंह के पुत्र सुमंत कुमार सिंह व स्थानीय जानकारों के अनुसार, क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंकते हुए कदवा थाने और कई सरकारी कार्यालयों को आग के हवाले कर दिया था तथा रेल पटरियां उखाड़ दी थीं. आंदोलन के दौरान तत्कालीन ब्रिटिश दारोगा को बंधक बनाकर आक्रोश व्यक्त किया गया था, जिसे बाद में बचा लिया गया.

ब्रिटिश हुकूमत की बर्बरता का डटकर किया सामना, कई सपूत हुए शहीद

आंदोलन को दबाने के लिए ब्रिटिश पुलिस द्वारा की गई दमनात्मक कार्रवाई में कई रणबांकुरों ने अपनी शहादत दी:

  • शहीद खक्खन मिश्र: कुम्हारी निवासी खक्खन मिश्र ब्रिटिश पुलिस के बर्बर लाठीचार्ज में गंभीर चोटें लगने से शहीद हो गए.
  • शहीद झिंगर मंडल: झौआ निवासी झिंगर मंडल ब्रिटिश सिपाही की गोली लगने से भारत माता की सेवा में वीरगति को प्राप्त हुए.
  • महावीर मंडल का संघर्ष: डंडखोरा प्रखंड के संगत टोला निवासी महावीर मंडल ने आंदोलन के सिलसिले में कोलकाता तक संघर्ष जारी रखा, जहां ब्रिटिश हुकूमत की यातनाओं के कारण वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे.

जंग-ए-आजादी में अविस्मरणीय योगदान देने वाले प्रमुख सेनानी

कदवा, कुंमहड़ी, मुहम्मदपुर, चांदपुर और डंडखोरा इलाके से बड़ी संख्या में लोगों ने अंग्रेजों की लाठियां खाईं और जेल की सजा काटी. इनमें प्रमुख नाम शामिल हैं:

  • विष्णु प्रसाद सिंह, परमेश्वर प्र. सिंह, यमुना प्र. सिंह, मोहन लाल मंडल, गंगा राम प्रसाद सिंह, राम लाल मंडल, परमानन्द ठाकुर, कमला प्रसाद राय, खक्खन मिश्र, नक्छेदी मंडल, खलानन्द ठाकुर, परमेश्वरी प्रसाद मंडल, रामजी विश्वास, रसूल मियां, सिरथी लाल ठाकुर, हरिहर प्रसाद मंडल, मिसरु प्रसाद मंडल, तुलसी प्रसाद मंडल, दुःख मोचन मिश्र, गोपाल झा, रामेश्वर गोढ़ी, गोपाल चन्द्र सिन्हा, महावीर मंडल, फुगलु दास और लखन मंडल.

वीर सेनानियों की स्मृति को अमर बनाए रखने के लिए वर्ष 2003 में तत्कालीन मुखिया सुमंत कुमार सिंह ने कदवा प्रखंड मुख्यालय परिसर में शहीद स्तंभ का निर्माण कराया था, जहां आज भी इन वीरों के नाम सुनहरे अक्षरों में अंकित हैं.


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सूरज कुमार गुप्ता

लेखक के बारे में

By सूरज कुमार गुप्ता

सूरज कुमार गुप्ता पिछले 25 वर्षों से प्रिंट मीडिया में एक्टिव है. वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत की. राजनीतिक व सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों पर पत्रकारिता करना इनकी रुचि में शामिल है. सामाजिक कार्यो में उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2007 में इन्हें भारत सरकार की ओर से तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से सम्मानित किया था.

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