विश्व थैलेसीमिया दिवस को भूल गया स्वास्थ्य विभाग, नहीं हुआ कोई कार्यक्रम

Updated at : 08 May 2025 7:30 PM (IST)
विज्ञापन
विश्व थैलेसीमिया दिवस को भूल गया स्वास्थ्य विभाग, नहीं हुआ कोई कार्यक्रम

विश्व थैलेसीमिया दिवस को भूल गया स्वास्थ्य विभाग, नहीं हुआ कोई कार्यक्रम

विज्ञापन

– रक्तदान शिविर, जागरूकता कार्यक्रम या कोई भी कार्यक्रम आयोजित नहीं हुआ कटिहार पूरे विश्व में आठ मई को थैलेसीमिया दिवस मनाया जाता है. थैलेसीमिया बीमारी एक गंभीर बीमारी है. साधारण भाषा में कहे तो थैलेसीमिया मरीजों के शरीर में खून नहीं बन पाता है. जिस कारण से मरीज को हर महीने शरीर में खून चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है. थैलेसीमिया के इस गंभीर बीमारी से जिले में 122 थैलेसीमिय पीड़ित मरीज है. जिले के लिए यह आंकड़ा काफी ज्यादा है. क्योंकि पिछले दो-तीन सालों में थैलेसीमिया के मरीज की संख्या काफी बढ़ी है. ऐसे में थैलेसीमिया के जन जागरूकता को लेकर भी जिला स्वास्थ्य विभाग कितना गंभीर है. उनके कार्यों से पता चलता है. गुरुवार को विश्व थैलेसीमिया दिवस के मौके पर विभाग की ओर से कोई भी कार्यक्रम आयोजित नहीं की गयी. पिछले वर्ष विश्व थैलेसीमिया दिवस के अवसर पर ब्लड सेंटर में जागरूकता अभियान के तहत ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजन किया गया था. जहां स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी और कर्मी इस दिवस का जन जागरूकता का हिस्सा बनते हुए अपना ब्लड डोनेट किए थे. लेकिन इस वर्ष विश्व थैलेसीमिया दिवस के अवसर पर न तो कोई जागरूकता फैलाई गयी और न ही कहीं पर ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजन किया गया. ऐसे में इस गंभीर बीमारी को लेकर एक खास दिन के मौके पर आम लोगों तक कोई संदेश ही नहीं पहुंच पाया. जिले में 122 थैलेसीमिया से ग्रसित हैं मरीज जिले में दो-तीन सालों का आंकड़ा लिया जाय तो थैलेसीमिया मरीजों की संख्या काफी बढ़ी है. अभी वर्तमान में जिला में 122 थैलेसीमिया के मरीज ग्रसित है. जो ब्लड सेंटर से रजिस्टर्ड है. इन सभी थैलेसीमिया मरीजों को ब्लड सेंटर के द्वारा बल्ड मुहैया कराया जाता है. जितने भी मरीज है. कम से कम एक मरीज को महीने में एक यूनिट की बल्ड की आवश्यकता पड़ती है. ऐसे मरीजों को समय पर ब्लड मिल सके इसको लेकर कई सेवा संस्था के द्वारा ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजन कर ब्लड डोनेट करते हैं. इन सभी मरीजों के लिए बिहार पुलिस, आरपीएफ, बीएमपी सेवन के जवान हमेशा तत्परता से ब्लड डोनेशन कर अपनी सहभागिता निभाते हैं. थैलेसीमिया मरीजों को ब्लड मिल सके इसको लेकर विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, बिहार पुलिस, इंजीनियरिंग कॉलेज, महर्षि में ही हॉस्पिटल, बीएमपी सेवन आदि संस्थानों के द्वारा पूरा सहयोग किया जाता है. थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त विकार रोग हैं, चिकित्सक इस संदर्भ में ब्लड सेंटर के प्रभारी डॉ आर सुमन ने बताया कि थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त विकार है. जिसके कारण शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम हो जाता है. इससे एनीमिया, थकान और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं होती है. थैलेसीमिया के रोगियों का संभावित रूप से स्टेम सेल प्रत्यारोपण से इलाज किया जा सकता है. जिसमें उनके शरीर में क्षतिग्रस्त रक्त बनाने वाली कोशिकाओं को डोनर से प्राप्त स्वस्थ कोशिकाओं से बदल दिया जाता है. लेकिन लाखों में एक ऐसा डोनर ही मिलता है. थैलेसीमिया के लक्षण अत्यधिक थकान, कमजोरी त्वचा का पीला पड़ना, खून की कमी, सांस लेने में दिक्क्त जैसी समस्या मरीज को आती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
RAJKISHOR K

लेखक के बारे में

By RAJKISHOR K

RAJKISHOR K is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन