गंगा के उफान में भी नहीं रुका मनिहारी-साहिबगंज पुल का काम: फ्लोटिंग क्रेन से खड़े हो रहे पिलर, जानें कब तक पूरा होगा महासेतु
कटिहार और साहिबगंज को जोड़ने वाला बहुप्रतीक्षित फोरलेन पुल गंगा नदी के उफान के बीच भी लगातार निर्माणाधीन है. आधुनिक तकनीक का उपयोग कर बाढ़ की चुनौतियों के बीच भी पिलर खड़े किए जा रहे हैं. पुल पूरा होने से दोनों राज्यों के बीच व्यापार, आवागमन और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा.
कटिहार जिले के मनिहारी और झारखंड के साहिबगंज के बीच गंगा नदी पर निर्माणाधीन बहुप्रतीक्षित फोरलेन पुल का कार्य गंगा के भीषण उफान और बाढ़ की विपरीत परिस्थितियों में भी अनवरत जारी है.
बाढ़ के तेज बहाव और जलस्तर में वृद्धि के चलते काम की गति कुछ धीमी अवश्य हुई है, लेकिन आधुनिक बार्ज (विशाल नौकाओं), फ्लोटिंग क्रेन और भारी जहाजों के सहारे गंगा के बीचों-बीच तकनीकी टीमें डटी हुई हैं. लगभग 22 किलोमीटर लंबा यह पूरा कॉरिडोर करीब ₹1970 करोड़ से ₹2000 करोड़ की अनुमानित लागत से तैयार किया जा रहा है.
गंगा के बीच आकार ले रहा केबल-स्टे पुल
परियोजना स्थल पर गंगा के प्रवाह के बीच कई प्रमुख पिलर खड़े किए जा चुके हैं और पुल का ऊपरी ढांचा आधुनिक केबल-स्टे तकनीक के माध्यम से स्पष्ट रूप से आकार लेने लगा है.
नदी की तेज धार और जलमग्न परिस्थितियों के बीच भी बड़े-बड़े हाइड्रोलिक क्रेन और निर्माण उपकरण लगातार कार्यरत हैं. निर्माण एजेंसी का प्रयास है कि बाढ़ के दौरान भी सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए फाउंडेशन और सुपरस्ट्रक्चर के मुख्य कार्यों को गति दी जाती रहे.
नाव के जोखिम भरे सफर से मिलेगी स्थायी मुक्ति
वर्तमान में बिहार और झारखंड के सीमावर्ती लोगों को मनिहारी से साहिबगंज आने-जाने के लिए केवल देशी नावों का सहारा लेना पड़ रहा है.
इस वर्ष नियमित स्टीमर सेवा शुरू नहीं हो पाने के कारण आम नागरिक, महिलाएं और बच्चे उफनती गंगा की तेज लहरों के बीच जान जोखिम में डालकर सफर करने को विवश हैं. बरसात और बाढ़ के दिनों में यह जलयात्रा बेहद भयावह हो जाती है. पुल चालू होने के बाद दोनों राज्यों के बीच का यह खतरनाक सफर सुरक्षित और चंद मिनटों की सड़क यात्रा में बदल जाएगा.
व्यापार और आवागमन में होगा बड़ा सुधार
यह पुल सीमांचल और संथाल परगना के आर्थिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल देगा:
- निर्माण सामग्री की सुगम आपूर्ति: झारखंड के साहिबगंज और पाकुड़ से स्टोन चिप्स (गिट्टी/मेटल) सीधे और सस्ते दर पर कटिहार, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, मधेपुरा और सुपौल तक पहुंच सकेंगे.
- कृषि उत्पादों का निर्यात: बिहार के मक्का, मखाना, पटसन (जूट) और मौसमी फल-सब्जियां आसानी से झारखंड और पश्चिम बंगाल के बाजारों तक भेजी जा सकेंगी.
- पर्यटन को गति: साहिबगंज के ऐतिहासिक-धार्मिक पर्यटन स्थल सीधे बिहार के सीमांचल और कोसी क्षेत्र से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ जाएंगे.
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दशकों से देखा गया यह सपना अब साकार होने के बेहद करीब है. जलस्तर कम होते ही निर्माण कार्य में और तेजी आने की उम्मीद है.
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