बारसोई: अति प्राचीन श्री विष्णु मंदिर में धूमधाम से मनी लड्डू गोपाल की छठीयारी; 56 भोग के साथ गूंजे सोहर
बारसोई के श्री विष्णु मंदिर में विराजमान राधा-कृष्ण एवं लड्डू गोपाल की मनोहारी प्रतिमा तथा भगवान को अर्पित छप्पन भोग. | Prabhat Khabar Network
बारसोई के अति प्राचीन श्री विष्णु मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की छठीयारी का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ. लड्डू गोपाल को 56 भोग लगाए गए और पारंपरिक सोहर गीतों से प्रांगण गूंज उठा.
कटिहार जिले के बारसोई बाजार स्थित अति प्राचीन एवं ऐतिहासिक श्री विष्णु मंदिर में बुधवार की संध्या यशोदानंदन, मुरलीधर भगवान श्रीकृष्ण की 'छठीयारी' का पावन पर्व अपार श्रद्धा, भव्यता और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ.
सनातन परंपरा के अनुसार प्रभु के जन्मोत्सव के छठे दिन आयोजित इस मांगलिक अनुष्ठान में श्रद्धा, भक्ति और आस्था का ऐसा त्रिवेणी संगम देखने को मिला कि उपस्थित श्रद्धालु स्वयं को द्वापर युग की बाल-लीलाओं के बीच महसूस करने लगे.
लड्डू गोपाल को लगा 56 भोग, सोहर गीतों से सजा प्रांगण
छठीयारी के पावन अवसर पर मंदिर के गर्भ गृह और गर्भगृह स्थित राधा-कृष्ण व लड्डू गोपाल के मनोहारी विग्रहों को मनमोहक फूलों और विद्युत झालरों से अलंकृत किया गया.
बाल गोपाल को उनके अतिप्रिय ताजे माखन-मिश्री, हलवा, पूरी, धनिया की पंजीरी सहित विभिन्न पारंपरिक पकवानों का नैवेद्य लगाया गया. इसके साथ ही भगवान को भव्य 'छप्पन भोग' भी अर्पित किया गया. स्थानीय श्रद्धालु महिलाओं की टोली ने ढोलक-मंजीरे की थाप पर पारंपरिक सोहर और बधाई गीत गाकर कन्हैया के प्राकट्य की खुशियां साझा कीं.
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महाआरती और महाप्रसाद वितरण
मंदिर के मुख्य पुरोहित आचार्य रमेश पांडे ने वैदिक ऋचाओं के सस्वर पाठ के बीच भगवान लड्डू गोपाल का विधि-विधान से अभिषेक एवं षोडशोपचार पूजन कराया.
श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्ज्वलित कर परिवार और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की. 'राधे-राधे' और 'जय कन्हैया लाल की' के गगनभेदी उद्घोष के बाद उपस्थित सैकड़ों भक्तों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया.
महानंदा में नौकाविहार और झीझरी नृत्य से जुड़ा है स्वर्णिम अतीत
बारसोई में भगवान श्रीकृष्ण की छठीयारी का संबंध केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग रहा है.
क्षेत्र के वयोवृद्ध नागरिकों के अनुसार, दशकों पूर्व इस उत्सव पर राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं को गाजे-बाजे के साथ भव्य नगर भ्रमण कराया जाता था. इसके उपरांत महानंदा नदी में सुसज्जित नौकाओं पर युगल सरकार को विराजमान कर विशाल नौकाविहार (जल-विहार) की परंपरा थी.
उस दौरान नदी तट और नौकाओं पर झीझरी नृत्य, भजन-कीर्तन और लोकगीतों का अनूठा आकर्षण रहता था. हालांकि, कालांतर में महानंदा के जलस्तर में कमी और आधुनिक परिवहन के विस्तार के कारण नौकाविहार की परंपरा औपचारिक रूप से बंद हो गई, लेकिन स्थानीय जनमानस में छठीयारी के प्रति अगाध श्रद्धा आज भी अक्षुण्ण बनी हुई है.
आयोजन को सफल बनाने में इनकी रही अग्रणी भूमिका
धार्मिक अनुष्ठान को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में मंदिर न्यास समिति के अध्यक्ष मुन्नालाल भगत, सचिव अजय कुमार साहा, कोषाध्यक्ष अरविन्द कुमार गुप्ता, वीरेंद्र कुमार, पिन्टू गुप्ता, संजीव दास, रोशन अग्रवाल, सागर कुमार साह एवं आनंद गुप्ता ने महत्वपूर्ण योगदान दिया.
वहीं स्थानीय श्रद्धालुओं में अनिल भगत, गौतम महतो उर्फ गुल्लू, उत्तम भगत, प्रकाश पोद्दार, राजेश कुमार साह उर्फ मिट्ठू, जयदेव साह और नीरज दास सहित बड़ी संख्या में मातृशक्ति व युवा देर रात तक व्यवस्था में जुटे रहे.
आपके शहर में
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए