जिले के निजी विद्यालय प्रशासन की मनमानी के खिलाफ अभाविप ने फूंका शंख

Published by :RAJKISHOR K
Published at :21 Apr 2025 7:41 PM (IST)
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जिले के निजी विद्यालय प्रशासन की मनमानी के खिलाफ अभाविप ने फूंका शंख

जिले के निजी विद्यालय प्रशासन की मनमानी के खिलाफ अभाविप ने फूंका शंख

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– पहले चरण के तहत डीएम को ज्ञापन सौंपकर रोक लगाने की मांग की – कहा पीजी से अधिक महंगी पुस्तक पढ़ रहे एलकेजी व यूकेजी के छात्र – ड्रेस के नाम पर अभिभावक हो रहे आर्थिक रूप से कमजोर – दूसरे चरण के तहत ऑनलाइन सीएम व शिक्षामंत्री को करेंगे आवेदन कटिहार जिले भर में चल रहे निजी विद्यालय प्रशासन की मनमानी से अभिभावक त्रस्त हैं. पीजी से महंगी पुस्तक एलकेजी व यूकेजी लेने के दवाब से बच्चों के अभिभावक त्रस्त हैं. ड्रेस के नाम पर भी निजी विद्यालय प्रशासन प्रबंधन द्वारा चिन्हित दुकान से ही अभिभावकों को लेने के लिए दवाब बनाये जाने के खिलाफ सोमवार को अभाविप ने आंदोलन को लेकर शंखनाद किया है. सोमवार को पहले चरण के तहत डीएम को जिले के गैर सरकारी विद्यालयों में प्रत्येक वर्ष शुल्क वृद्धि, पुस्तक एवं ड्रेस परिवर्तन के माध्यम से चल रहे उगाही पर नियंत्रण को लेकर एक ज्ञापन सौंपा गया. सौंपे गये ज्ञापन के माध्यम से प्रांत सह मंत्री अभाविप के विनय सिंह ने डीएम को अवगत कराया कि अधिकांश गैर सरकारी विद्यालय प्रशासन द्वारा प्रतिवर्ष ड्रेस बदल दिया जाता है. साथ ही एक चिन्हित दुकान से ही ड्रेस खरीदने पर जोर दिये जाने की वजह से अभिभावकों से मोटी राशि ली जाती है. इस पर अविलम्ब रोक लगाये जाने की मांग की. साथ ही कम से कम तीन वर्ष तक ड्रेस कोड में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किये जाये. इसको लेकर मांग की. उन्होंने कहा कि निजी विद्यालय प्रशासन व प्रबंधन के मनमानी के खिलाफ आंदोलन कई चरणों में किया जायेगा. सौंपे गये ज्ञापन के माध्यम से डीएम को अवगत कराया कि गैर सरकारी विद्यालयों के द्वारा प्रतिवर्ष पाठ्य पुस्तक भी बदल दिए जाते हैं. पहली कक्षा पाठ्य पुस्तक 3000 से 3500 रुपए तक में ए, बीसी और क, ख, ग पढ़ाये जाते हैं. जबकि पीजी व ग्रेजुएट की पुस्तक भी इतनी महंगी नहीं है. सरकार द्वारा तय मानक के अनुरूप एनसीईआरटी की पुस्तक ही पढ़ाई जानी है. प्रतिवर्ष पुस्तक परिवर्तित करने से पर्यावरण को बड़ी मात्रा में क्षति पहुंचती है. ऐसे विद्यालय पर भी कड़ी कार्रवाई की जाय. उन्हें आदेशित किया जाए कि कम से कम 3 वर्ष तक पुस्तक में कोई प्रकार का बदलाव न हो एवं उनका शुल्क भी उचित हो तथा इसे एक निश्चित दुकान से ही खरीदने की बाध्यता समाप्त की जाय. मौके पर प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य विक्रांत सिंह ने कहा कि आरटीई के तहत प्रत्येक विद्यालय में 25 प्रतिधत निर्धन छात्र-छात्राओं के नामांकन एवं उनके संपूर्ण पढ़ाई की जांच की जाए कि सभी विद्यालय इसका अक्षरशः पालन कर रहे हैं या नहीं. इस मौके पर नगर मंत्री राजा यादव, अभिनव कुमार, प्रणव यादव समेत कई कार्यकर्ता उपस्थित थे.

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