बिहार के सरकारी अस्पतालों में रेफरल सिस्टम बदलेगा, अब बिना वजह मरीज नहीं होंगे रेफर

Author Vikash kumar|Edited by Vivek Singh
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फोटो.4. सदर अस्पताल भभुआ | Prabhat Khabar Network

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बिहार सरकार ने सरकारी अस्पतालों में रेफरल व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए नई गाइडलाइन जारी की है. सात निश्चय-3 के तहत 'सुलभ स्वास्थ्य–सुरक्षित जीवन' कार्यक्रम के तहत यह बदलाव किया गया है.

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Bihar Hospital Referral System : बिहार सरकार ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों के रेफरल सिस्टम को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जवाबदेह बनाने के लिए नई गाइडलाइन जारी की है. सात निश्चय-3 के तहत संचालित "सुलभ स्वास्थ्य–सुरक्षित जीवन" कार्यक्रम के अंतर्गत जिला अस्पतालों को सुपर स्पेशियलिटी और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को स्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में विकसित किया जा रहा है. इसी कड़ी में स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलाधिकारियों और सिविल सर्जनों को रेफरल व्यवस्था मजबूत करने तथा अनावश्यक रेफरल पर रोक लगाने का निर्देश दिया है.

Kaimur News : बिना जरूरत मरीजों को नहीं किया जाएगा रेफर

नई व्यवस्था के तहत किसी भी मरीज को बिना आवश्यकता उच्च स्वास्थ्य संस्थान में रेफर नहीं किया जाएगा. पहले संबंधित अस्पताल में उपलब्ध सभी चिकित्सकीय सुविधाओं का पूरा उपयोग किया जाएगा. यदि रेफरल जरूरी होगा तो उसका स्पष्ट कारण रिकॉर्ड में दर्ज करना अनिवार्य होगा. साथ ही ओपीडी, आईपीडी, इमरजेंसी और दुर्घटना से जुड़े सभी मरीजों का शत-प्रतिशत पंजीकरण भव्या पोर्टल पर किया जाएगा तथा आभा आईडी (ABHA ID) बनाकर उनका इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा.

7 दिनों में ICU और 24×7 इमरजेंसी सेवा होगी शुरू

स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पतालों में सात दिनों के भीतर आईसीयू और 24 घंटे इमरजेंसी सेवा शुरू करने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही पैथोलॉजी और एक्स-रे जांच की भी 24×7 व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है. सभी सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों, विशेषज्ञ डॉक्टरों और पारा मेडिकल कर्मियों का भव्या पोर्टल पर पंजीकरण होगा. अस्पतालों में उपलब्ध बेड, ड्यूटी रोस्टर और डॉक्टरों की उपस्थिति भी ऑनलाइन दर्ज की जाएगी.

रेफरल से पहले मरीज को किया जाएगा स्टेबलाइज

नई गाइडलाइन के अनुसार, यदि मरीज को किसी बड़े अस्पताल में भेजना आवश्यक होगा तो पहले उसका प्राथमिक उपचार कर उसे स्थिर (स्टेबलाइज) किया जाएगा. इसके बाद सरकारी एम्बुलेंस से सुरक्षित तरीके से रेफर किया जाएगा. मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री की डिजिटल कॉपी भी उपलब्ध कराई जाएगी और जरूरत पड़ने पर मोबाइल पर भेजी जाएगी. अनावश्यक रेफरल या लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने की नई व्यवस्था

यदि किसी जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध नहीं होंगे तो सिविल सर्जन जिले के अन्य सरकारी अस्पतालों से विशेषज्ञ डॉक्टरों को ऑन-कॉल बुला सकेंगे. जरूरत पड़ने पर प्रतिनियुक्ति का प्रस्ताव भी भेजा जाएगा. प्रत्येक जिले में जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय निगरानी समिति बनाई जाएगी, जो हर महीने रेफरल मामलों की समीक्षा करेगी.

राज्य स्तर से होगी हर सप्ताह मॉनिटरिंग

राज्य स्वास्थ्य समिति ने संयुक्त सचिव-सह-प्रशासी पदाधिकारी राजेश कुमार को राज्य स्तरीय नोडल पदाधिकारी बनाया है. वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी जिलों की साप्ताहिक समीक्षा करेंगे और प्रगति रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को सौंपेंगे.

मरीजों को मिलेगा बेहतर और पारदर्शी इलाज

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से सरकारी अस्पतालों के संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा. मरीजों को अपने जिले और प्रखंड स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सकेगा, जबकि बड़े अस्पतालों पर अनावश्यक दबाव भी कम होगा. डिजिटल हेल्थ सिस्टम के जरिए इलाज की पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनेगी.


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