कैमूर पहाड़ी के अभयारण्य क्षेत्र पर आग का ग्रहण
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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अनदेखी. लोगों की नासमझी व स्वार्थ में पर्यावरण को नुकसान अभयारण्य क्षेत्र में रहनेवाले लोगों द्वारा हर साल आग लगा दिये जाने से करोड़ों रुपये की वन संपदा का नुकसान हो रहा है. साथ ही पर्यावरण को नुकसान भी पहुंच रहा है. इस आग पर काबू पाने के लिए वन विभाग को काफी मशक्कत करनी […]
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अनदेखी. लोगों की नासमझी व स्वार्थ में पर्यावरण को नुकसान
अभयारण्य क्षेत्र में रहनेवाले लोगों द्वारा हर साल आग लगा दिये जाने से करोड़ों रुपये की वन संपदा का नुकसान हो रहा है. साथ ही पर्यावरण को नुकसान भी पहुंच रहा है. इस आग पर काबू पाने के लिए वन विभाग को काफी मशक्कत करनी पड़ती है.
भभुआ (कार्यालय) : 130 स्क्वायर किलोमीटर में कैमूर पहाड़ी पर फैला बिहार का सबसे बड़ा अभयारण्य पर अगलगी का ग्रहण लग गया है. वन क्षेत्र में रहने वाले लोगों द्वारा आये दिन जंगल में आग लगा दिये जा रहे हैं, जिससे जहां वन संपदा का नुकसान हो रहा है.
वहीं, पर्यावरण के साथ वन क्षेत्र में रहने वाले जीव जंतुओं के जान पर भी आफत आ जा रही है. हालिया दिनों में होलिका दहन की रात अभयारण्य क्षेत्र में करीब दो दर्जन जगहों पर वन क्षेत्र में रहने वाले लोगों द्वारा जंगल में आग लगा दी गयी.
वन विभाग की टीम को इस आग पर काबू पाने में नाको चने चबाने पड़े. डीएफओ सत्यजीत कुमार ने बताया कि जब होलिका दहन की रात सभी लोग जश्न मना रहे थे, तो हमलोग वन क्षेत्र में आग बुझा रहे थे. उस रात दर्जनों जगहों पर कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा आग लगा दी गयी थी. इससे करोड़ों रुपये की वन संपदा का नुकसान हुआ. यही नहीं, हर साल जंगल में आग लगाये जाने के कारण करोड़ों रुपये की वन संपदा का नुकसान होता है. जंगल में आये दिन महुआ चुनने के लिए वनवासियों द्वारा आग लगा दी जाती है.
आग बुझाने के लिए नहीं मिलता पानी
वन क्षेत्र में आग लग जाने पर उसे बुझाना वन विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती है. कैमूर पहाड़ी स्थित वन क्षेत्र में आग लगने पर रास्ता नहीं होने के कारण वहां आग बुझाने के लिए टैंकर से पानी भी नहीं पहुंच पाता है. यही नहीं, पहाड़ पर पानी की कमी के कारण आग बुझाने के लिए अन्य विकल्पों को ही अपनाना पड़ता है. बालू फेंक कर या लाठी के जरिये आग बुझाते हैं.
इससे भी आग पर काबू पाने में विफल रहने पर विपरीत दिशा से आग लगा कर आक्सीजन खत्म कर आग बुझाते हैं. यानी, कुल मिला कर आग को बुझाने में वन विभाग को काफी मशक्कत करनी पड़ती है और जब तक आग पर काबू पाया जाता है, तब तक बड़े पैमाने पर नुकसान हो चुका रहता है.
हर साल लगाये जाते हैं पौधे
कैमूर वन क्षेत्र बिहार का सबसे बड़ा वन क्षेत्र है. इसे विकसित करने के लिए हर वर्ष लाखों पौधे वन विभाग द्वारा लगाये जाते हैं. एक लाख पौधों को लगाने में करीब 30 लाख रुपये का खर्च होता है. पिछले वर्ष कैमूर वन क्षेत्र में करीब छह लाख पौधे लगाये गये थे, जिन्हें लगाने में करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च हुआ था. डीएफओ के मुताबिक, अगलगी के कारण इससे ज्यादा वन संपदा व पौधों का नुकसान हो जाता है. ऐसे में लोग जंगल को आग से बचाये, तो ज्यादा पौधे बचाये जा सकते है.
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