जहानाबाद में अब विद्यार्थी बताएंगे कचरे का सही ठिकाना, एसएस कॉलेज में स्वच्छता अभियान शुरू
स्वच्छता ही सेवा अभियान में शामिल छात्र-छात्राएं .
जेहानाबाद कॉलेज में 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान शुरू हुआ. यह स्वच्छता को जीवनशैली बनाने, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी बढ़ाने पर केंद्रित है.
Jehanabad News : जहानाबाद में स्वामी सहजानंद महाविद्यालय के भूगोल विभाग के तत्वावधान में सोमवार को ‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ अभियान का उत्साहपूर्ण शुभारंभ किया गया. 21 सितंबर से एक अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी. अभियान का उद्देश्य स्वच्छता को केवल साफ-सफाई तक सीमित न रखकर नागरिक चेतना, सामाजिक जिम्मेदारी, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और सामूहिक सहभागिता से जोड़ना है.
स्वच्छता को जीवन-पद्धति बनाने पर जोर
कार्यक्रम में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता की. इस दौरान महाविद्यालय परिसर को स्वच्छ, हरित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के साथ विद्यार्थियों को अपने आसपास के परिवेश के प्रति सजग और जिम्मेदार बनाने पर जोर दिया गया. कार्यक्रम में कहा गया कि स्वच्छता किसी एक व्यक्ति, संस्था या विशेष दिवस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है.
भूगोल विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. स्नेहा स्वरूप ने कहा कि स्वच्छता का वास्तविक अर्थ केवल परिसर से कचरा हटाना नहीं है, बल्कि ऐसी जीवनशैली विकसित करना है, जिसमें लोग अपने परिवेश, प्राकृतिक संसाधनों और सार्वजनिक स्थलों के प्रति जिम्मेदारी महसूस करें. अनियंत्रित कचरा, प्लास्टिक प्रदूषण और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी चुनौतियों के बीच स्वच्छता को व्यवहार परिवर्तन से जोड़ना जरूरी है.
विद्यार्थियों को बनाया जाएगा बदलाव का वाहक
डॉ. स्नेहा स्वरूप ने कहा कि भूगोल मानव और प्रकृति के पारस्परिक संबंधों को समझने वाला विषय है. ऐसे में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, संसाधन संरक्षण और सतत विकास की अवधारणाएं भूगोल से गहराई से जुड़ी हैं. उन्होंने विद्यार्थियों से स्वच्छता अभियान में केवल सहभागी बनने के बजाय अपने आचरण और जागरूकता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव का वाहक बनने का आह्वान किया.
उन्होंने कहा कि कचरे को सड़क या सार्वजनिक स्थल पर फेंकने के बजाय स्रोत पर ही उसका पृथक्करण और उचित निस्तारण करने की आदत विकसित करनी होगी. स्वच्छ परिसर अपने आप में अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज और संतुलित पर्यावरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
‘जानो अपना कचरा’ से होगी शुरुआत
अभियान के तहत सबसे पहले ‘जानो अपना कचरा’ विषय पर जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी. इसमें विद्यार्थियों और शिक्षकों को कचरे की प्रकृति, उसके प्रकार, पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण की जानकारी दी जाएगी.
इसके बाद ‘चार डिब्बे-चार प्रकार का कचरा’ की अवधारणा को व्यवहार में उतारते हुए गीले, सूखे, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाले कचरे के पृथक्करण एवं प्रबंधन का प्रदर्शन किया जाएगा. विद्यार्थियों को स्रोत पर कचरा अलग करने के महत्व की जानकारी दी जाएगी.
प्लास्टिक मुक्त परिसर बनाने पर जोर
अभियान के अगले चरण में ‘स्वच्छ परिसर-स्वस्थ पर्यावरण’ कार्यक्रम के तहत कचरा हॉटस्पॉट की पहचान और परिसर की स्वच्छता से जुड़ी गतिविधियां होंगी. वहीं, प्लास्टिक मुक्त परिसर अभियान के तहत प्लास्टिक संग्रह, जागरूकता रैली, पोस्टर और नारा लेखन प्रतियोगिता जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी. विद्यार्थियों को एकल उपयोग वाले प्लास्टिक के दुष्परिणामों की जानकारी देते हुए पर्यावरण अनुकूल और पुनःप्रयोग योग्य विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा.
स्वच्छता संकल्प के साथ होगा समापन
अभियान के अंतिम चरण में ‘जनभागीदारी एवं स्वच्छता संकल्प’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. इसमें विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी, जागरूकता गतिविधियों के परिणामों का प्रदर्शन और सामूहिक स्वच्छता चेतना को मजबूत करने वाले कार्यक्रम होंगे. समापन अवसर पर स्वच्छता को निरंतर जीवन-पद्धति और जिम्मेदार नागरिक आचरण के रूप में अपनाने का सामूहिक संकल्प लिया जाएगा.
कार्यक्रम में भूगोल विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. स्नेहा स्वरूप, डॉ. सीमा कुमारी, डॉ. स्मिति रेखा, राजनीति विज्ञान विभाग के डॉ. सुरेंद्र ठाकुर, डॉ. बिरु पासवान सहित अन्य शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे. विद्यार्थियों ने अभियान की विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता करते हुए स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जतायी.
स्वच्छता से सहभागिता तक पहुंचाने का प्रयास
भूगोल विभाग की ओर से संचालित इस अभियान का उद्देश्य स्वच्छता को स्वस्थ जीवन, संतुलित पर्यावरण, सामाजिक अनुशासन और जिम्मेदार नागरिकता से जोड़ना है. अभियान के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है कि व्यक्तिगत स्वच्छता जब सामुदायिक स्वच्छता से जुड़ती है और सामुदायिक स्वच्छता पर्यावरणीय जिम्मेदारी का रूप लेती है, तभी स्वच्छता से सहभागिता की संकल्पना साकार होती है.
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