जहानाबाद में बारिश से धान रोपनी ने पकड़ी रफ्तार, दो दिनों में 11 से 16 प्रतिशत पहुंचा आंकड़ा

Author Sanjay Anurag|Edited by Nikhil Anurag
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बारिश के बाद खेतों में धान की रोपनी कर रही महिलाएं

बारिश के बाद खेतों में धान की रोपनी कर रही महिलाएं

जिले में दो दिनों की बारिश ने धान रोपनी की गति बढ़ा दी है. पहले जहां 11% रोपनी हुई थी, वहीं अब यह आंकड़ा 16% पहुंच गया है. किसान उम्मीद कर रहे हैं कि अच्छी बारिश जारी रहेगी.

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Jehanabad paddy transplantation: जिले में पिछले दो दिनों में हुई बारिश ने किसानों के मुरझाए चेहरों पर रौनक लौटा दी है. बारिश के बाद किसान ट्रैक्टर, हल और फावड़ा लेकर अपने-अपने खेतों में जुट गए हैं. जिन खेतों में धान के बिचड़े और पौधे मुरझाने लगे थे, उनमें नई जान आ गई है. वहीं परती पड़े खेतों में धान रोपनी की तैयारियां शुरू हो गई हैं. जिले में धान रोपनी का प्रतिशत दो दिन पहले के 11 प्रतिशत से बढ़कर 16 प्रतिशत हो गया है.

बारिश के पहले पानी के अभाव में खेतों में दरारें पड़ने लगी थीं और किसानों को धान के बिचड़ों एवं पौधों को बचाने के लिए मोटर पंप का सहारा लेना पड़ रहा था. पिछले दो दिनों की बारिश ने किसानों को बड़ी राहत दी है. हालांकि, किसानों को अभी भी झमाझम बारिश का इंतजार है. बारिश के बाद खेतों की मिट्टी गीली होने से मोटर पंप के माध्यम से सिंचाई करना आसान हो गया है और किसान तेजी से धान रोपनी के कार्य में जुट गए हैं.

दो दिनों में पांच प्रतिशत बढ़ी धान रोपनी

जिन खेतों में पहले केवल पानी की कमी के कारण धान रोपनी नहीं हो पा रही थी, वहां अब तेजी से रोपनी का कार्य किया जा रहा है. केवल पिछले दो दिनों में जिले में पांच प्रतिशत खेतों में धान रोपनी हुई है. दो दिन पहले तक जिले में मात्र 11 प्रतिशत धान रोपनी हुई थी, जो अब बढ़कर 16 प्रतिशत हो गई है.

किसान बागेश्वरी सिंह ने बताया कि अधिकांश खेतों की मिट्टी गीली हो चुकी है. निचले इलाकों और नदी के आसपास स्थित खेतों में आसपास के जलस्रोतों से पानी लेकर धान रोपनी की जा रही है. वहीं जहां पानी की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां किसान मोटर पंप के माध्यम से सिंचाई कर धान रोप रहे हैं.

कहीं ट्रैक्टर चल रहा तो कहीं उखाड़ी जा रही है मोरी

बारिश के बाद जिले के गांव-बधारों में धान रोपनी का कार्य जोर पकड़ चुका है. कहीं किसान ट्रैक्टर से खेतों में कीचड़ तैयार कर रहे हैं, तो कहीं धान के बिचड़ों की मोरी उखाड़ने का काम चल रहा है. जुलाई महीने के 20 दिन बीत जाने के बावजूद जिले में अभी केवल 16 प्रतिशत धान रोपनी ही हो सकी है. हालांकि, यह उछाल भी पिछले दो दिनों की बारिश के कारण ही संभव हो पाया है.

खेतों की तैयारी में जुटे किसान

जिन किसानों ने अभी तक धान रोपनी शुरू नहीं की थी, वे भी अब अपने खेतों को तैयार करने में जुट गए हैं. जिले के सभी प्रखंडों के गांवों और बधारों में विशेष रौनक देखने को मिल रही है. किसान ट्रैक्टर और मजदूरों की व्यवस्था करने में जुटे हैं. इन दिनों ट्रैक्टर और मजदूर दोनों की मांग बढ़ गई है.

धान रोपनी वाले खेतों में महिलाओं के परंपरागत गीतों की गूंज सुनाई दे रही है. खेतों में काम के दौरान आसमान में उमड़ते-घुमड़ते बादलों के साथ महिलाओं के लोकगीतों का स्वर भी वातावरण को जीवंत बना रहा है. किसान अनिल सिंह ने बताया कि अभी भी अच्छी बारिश की आवश्यकता है. यदि एक बार झूमकर बारिश हो जाए, तो किसानों को मोटर पंप नहीं चलाना पड़ेगा और धान रोपनी का कार्य और तेजी से पूरा हो सकेगा.

खाद की दुकानों पर बढ़ी किसानों की भीड़

जिले के अधिकांश खेतों में धान रोपनी का कार्य शुरू होने के साथ ही खाद की दुकानों पर किसानों की भीड़ बढ़ गई है. सबसे अधिक मांग डीएपी खाद की देखी जा रही है. किसानों का कहना है कि धान रोपनी से पहले खेतों में डीएपी खाद का उपयोग करने से पैदावार बेहतर होती है.

जिन किसानों के खेतों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वे अभी भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं. किसानों को उम्मीद है कि यदि अगले कुछ दिनों तक बारिश होती रही, तो जिले के अधिकांश खेतों में धान रोपनी का कार्य पूरा हो जाएगा.


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