जहानाबाद में DEO दफ्तर के बाहर 5 जून से शिक्षकों का अनिश्चितकालीन 'घेरा डालो-डेरा डालो' आंदोलन, 27 सूत्री मांगें
Published by : Nikhil Anurag Updated At : 03 Jun 2026 4:51 PM
27 सूत्री मांगें को लेकर बैठक करते शिक्षक
Jehanabad News: जहानाबाद में बिहार राज्य शिक्षक संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने अपनी 27 सूत्री लंबित मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है. शिक्षक नेताओं ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर तानाशाही, भ्रष्टाचार और विधानसभा में गलत रिपोर्ट भेजने का गंभीर आरोप लगाया है.
Jehanabad News: (अशोक कुमार की रिपोर्ट) बिहार राज्य शिक्षक संयुक्त संघर्ष मोर्चा की जिला कोर कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक बुधवार को स्थानीय कार्यालय में संपन्न हुई. बैठक की अध्यक्षता राम उदय कुमार ने की, जबकि मंच संचालन सत्येंद्र कुमार, संदीप पासवान एवं राम प्रसाद ने संयुक्त रूप से किया. इस बैठक में जहानाबाद जिले के शिक्षकों की वर्षों से लंबित समस्याओं और प्रशासनिक उपेक्षा पर विस्तार से चर्चा की गई. अंत में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि प्रशासन की बेरुखी के खिलाफ आगामी 5 जून से डीईओ कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन ‘घेरा डालो-डेरा डालो’ आंदोलन शुरू किया जाएगा.
मुख्यमंत्री से लेकर राज्यपाल तक गुहार, पर नहीं निकला कोई हल
बैठक को संबोधित करते हुए शिक्षक नेताओं ने कहा कि जिले के शिक्षकों की विभिन्न न्यायसंगत मांगें लंबे समय से ठंडे बस्ते में हैं. इन समस्याओं के समाधान के लिए जिला शिक्षा कार्यालय से लगातार पत्राचार किया गया, कई दौर की वार्ताएं हुईं और जिला पदाधिकारी को भी ज्ञापन सौंपा गया. यही नहीं, जिले के करीब 1500 शिक्षकों के हस्ताक्षरयुक्त मांग पत्र को मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, राज्यपाल, शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव तक को भेजा गया था. इसके बावजूद जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो प्रखंडों में धरना-प्रदर्शन किया गया. अब कोई ठोस पहल न होते देख अनिश्चितकालीन धरने का फैसला लिया गया है.
अधिकारियों पर बड़ा आरोप: विधानसभा और ई-शिक्षा कोष पर भेजी भ्रामक रिपोर्ट
शिक्षक नेताओं ने जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं जिला कार्यक्रम पदाधिकारी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि स्थानीय अधिकारियों द्वारा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव समेत उच्च अधिकारियों को और जहानाबाद विधायक द्वारा विधानसभा में उठाए गए प्रश्नों के संबंध में गलत व भ्रामक जानकारी उपलब्ध कराई गई है. इसके साथ ही ‘ई-शिक्षा कोष’ पोर्टल पर दर्ज शिक्षकों की शिकायतों के संबंध में भी मनगढ़ंत रिपोर्ट ऊपर भेजी गई है. मोर्चा ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने की मांग की है.
निरीक्षण के नाम पर आर्थिक शोषण और विजिलेंस जांच की मांग
नेताओं ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि विद्यालय निरीक्षण के नाम पर शिक्षकों पर अनावश्यक मानसिक दबाव बनाया जाता है. निलंबन और वेतन रोकने की धमकी देकर शिक्षकों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है.
- मोर्चा ने जिला शिक्षा कार्यालय के एक अकाउंटेंट पर बिचौलिये की भूमिका निभाने का आरोप लगाते हुए उसकी अकूत संपत्ति की जांच कराने की मांग की है.
- इसके साथ ही डीईओ एवं डीपीओ की संपत्ति की भी निगरानी विभाग से जांच कराने की मांग उठाई गई है.
शिक्षकों की ये मुख्य मांगें जिनके लिए शुरू हो रहा है आंदोलन:
बैठक में नेताओं ने शिक्षकों की समस्याओं की लंबी सूची साझा की, जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दे शामिल हैं:
- सेवा पुस्तिका की अनदेखी: पिछले एक वर्ष से वेतन निर्धारण के लिए जमा की गई शिक्षकों की सेवा पुस्तिकाएं बिना किसी ठोस कारण के लौटाई जा रही हैं.
- बकाया मानदेय: विभागीय आदेश के बावजूद विभिन्न मदों के बकाया वेतन और एरियर का भुगतान नहीं किया जा रहा है.
- आवास भत्ता में कटौती: घोसी नगर परिषद क्षेत्र के शिक्षकों को निर्धारित सरकारी दर से काफी कम आवास भत्ता दिया जा रहा है.
- वेतन और प्रोन्नति: प्रधान शिक्षकों का वेतन निर्धारण लंबे समय से लंबित है, विशिष्ट शिक्षकों को प्रोन्नति नहीं मिल रही है और 34,540 कोटी के शिक्षकों के एरियर भुगतान में जानबूझकर विलंब किया जा रहा है.
शिक्षक नेताओं ने साफ शब्दों में कहा कि जिला शिक्षा कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार, तानाशाही और मनमानी को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. जब तक सभी 27 सूत्री मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक 5 जून से शुरू होने वाला यह डेरा डालो आंदोलन अनवरत जारी रहेगा.
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