जहानाबाद: स्वामी सहजानंद महाविद्यालय का 71वां स्थापना दिवस संपन्न, ‘साहित्य और मूल्य’ पर हुई गहन चर्चा

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कार्यक्रम का उद्घाटन करते कुलपति  | Prabhat Khabar Network

कार्यक्रम का उद्घाटन करते कुलपति

स्वामी सहजानंद महाविद्यालय के 71वें स्थापना दिवस समारोह में साहित्य, नैतिक मूल्यों और शिक्षा के अंतर्संबंधों पर गहन विमर्श हुआ. कुलपति ने नई सुविधाओं का उद्घाटन किया और मेधावी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति की घोषणा की गई.

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Jehanabad college foundation day: स्वामी सहजानंद महाविद्यालय का 71वां स्थापना दिवस समारोह रविवार को गरिमामय और उत्सवी वातावरण में संपन्न हुआ. इस अवसर पर आयोजित डॉ. शंकर प्रसाद सिंह स्मृति व्याख्यानमाला में साहित्य, नैतिक मूल्यों और शिक्षा के अंतर्संबंधों पर गंभीर एवं सार्थक विमर्श हुआ. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के कुलपति प्रो. (डॉ.) दिलीप कुमार केसरी ने छात्र सहायता केंद्र सहित विभिन्न सुविधाओं का उद्घाटन किया और महाविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों की सराहना की.

दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना से हुआ शुभारंभ

समारोह की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुई. इसके बाद अतिथियों का पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र देकर स्वागत किया गया.

शिक्षा में मूल्य और संवेदनशीलता जरूरी : कुलपति

अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. (डॉ.) दिलीप कुमार केसरी ने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान की पहचान केवल उसकी भौतिक संरचना से नहीं, बल्कि उसके शैक्षणिक वातावरण, अनुसंधान, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व से होती है. उन्होंने कहा कि साहित्य मनुष्य को भीतर से समृद्ध बनाता है और उसके व्यक्तित्व में मानवीय मूल्यों का विकास करता है.

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की विभिन्न छात्र कल्याणकारी योजनाएं, विशेषकर ‘स्वयं योजना’, जल्द ही मगध विश्वविद्यालय के सभी अंगीभूत महाविद्यालयों में लागू की जाएंगी. उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन, निरंतर अध्ययन और नवाचार की प्रवृत्ति विकसित करने का आह्वान किया.

साहित्य समाज की चेतना का दस्तावेज : कुलसचिव

व्याख्यानमाला के मुख्य वक्ता और मगध विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. (डॉ.) बी. के. मंगलम ने ‘साहित्य और मूल्य’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि साहित्य केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक चेतना और नैतिक विवेक का जीवंत दस्तावेज है.

उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीक ने जीवन को सुविधाजनक बनाया है, लेकिन मूल्यबोध के बिना ज्ञान समाज के लिए संकट बन सकता है. शिक्षा तभी सार्थक है जब वह व्यक्ति को केवल ज्ञानवान ही नहीं, बल्कि संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक भी बनाए.

महाविद्यालय की उपलब्धियों पर प्रकाश

स्वागताध्यक्ष और महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) दीपक कुमार ने कहा कि 71 वर्षों की यह यात्रा हजारों विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण की प्रेरक गाथा है. उन्होंने छात्र सहायता केंद्र को विद्यार्थियों के हित में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि इससे छात्रों को शैक्षणिक और प्रशासनिक सेवाएं एक ही स्थान पर मिल सकेंगी.

मेधावी विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति की घोषणा

व्याख्यानमाला के संरक्षक एवं रक्षा मंत्रालय (पश्चिमी कमान), चंडीगढ़ के प्रधान निदेशक संजीव कुमार ने विद्यार्थियों से अनुशासन, ईमानदारी और राष्ट्रसेवा की भावना के साथ आगे बढ़ने की अपील की. उन्होंने अपने पिता की स्मृति में हिंदी स्नातक एवं स्नातकोत्तर के मेधावी विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष 25 हजार रुपये की छात्रवृत्ति देने की घोषणा की.

विद्यार्थियों को किया गया सम्मानित

कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया. अतिथियों ने महाविद्यालय परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया. समारोह में शिक्षकगण, शिक्षकेत्तर कर्मचारी, शोधार्थी, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे. धन्यवाद ज्ञापन हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. नम्रता कुमारी ने किया. राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ.

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Mritunjay Jehanabad

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