जहानाबाद में सफाई एजेंसी पर नगर परिषद की बड़ी कार्रवाई, चार माह में 32 लाख रुपये से अधिक भुगतान में कटौती

Author Sanjay Anurag|Edited by Nikhil Anurag
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नगर परिषद जहानाबाद कार्यालय भवन

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जहानाबाद में सफाई एजेंसी द्वारा कम कर्मी रखने पर नगर परिषद ने भुगतान में 32 लाख रुपये की कटौती की है. शहर की बदतर सफाई व्यवस्था पर प्रशासन सख्त हुआ है.

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Jehanabad News: शहर में सफाई की बदतर स्थिति और नगर परिषद की सफाई एजेंसी के कामकाज को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब इसके कारण भी उजागर होने लगे हैं. नगर परिषद की सफाई एजेंसी निर्धारित मापदंड के अनुसार सफाई कर्मी बहाल नहीं कर रखी है. इसके अलावा जितने सफाई मजदूर रखे गए हैं, उनमें से भी कई प्रतिदिन अनुपस्थित रहते हैं. खासकर रविवार को नाममात्र के मजदूर ही काम पर आते हैं. इसके बाद नगर परिषद प्रशासन ने सफाई एजेंसी के भुगतान में 32 लाख रुपये से अधिक की कटौती करने का निर्देश दिया है.

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नगर परिषद की सफाई एजेंसी पथेया जेवी हर्ष बीएन जीकॉन प्रा. लि. को जहानाबाद नगर परिषद क्षेत्र में सफाई कार्य के लिए प्रतिमाह 60 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया जाता है. इसके बावजूद शहर में सफाई की स्थिति लगातार बदतर बनी हुई है.

प्रमुख मार्गों तक सीमित रहती है सफाई

जानकारी के अनुसार, अधिकांश सफाई कर्मियों को पटना-गया मुख्य मार्ग पर ही लगाया जाता है. शहर के बाकी हिस्सों में रविवार को या तो सफाई नहीं होती या नाममात्र की होती है. कई मोहल्लों की स्थिति नारकीय बनी हुई है. नाले जाम हैं और नालियां बजबजा रही हैं. कई इलाकों में नाली का पानी गलियों में बह रहा है.

नालों की नियमित उड़ाही नहीं कराई जाती और कूड़े का उठाव भी केवल एक समय किया जाता है. गलियों में न तो नियमित झाड़ू लगता है और न ही नालियों की सफाई होती है. कूड़ा उठाने के लिए सफाई कर्मी कभी-कभार ही पहुंचते हैं.

300 के बजाय 295 सफाई कर्मी रखे गए

नगर परिषद की सफाई एजेंसी ने सफाई कार्य के लिए मात्र 295 मजदूर रखे हैं, जबकि नगर परिषद द्वारा विभागीय स्तर पर सफाई कराए जाने के समय 330 मजदूर कार्यरत थे. इनमें से भी कई मजदूर प्रतिदिन अनुपस्थित रहते हैं.

नगर निकायों के नियमों के अनुसार, एक लाख से अधिक आबादी वाले शहर में प्रतिदिन कम से कम 300 सफाई मजदूरों की तैनाती अनिवार्य है. इससे कम मजदूर होने पर एजेंसी के भुगतान में कटौती का प्रावधान है. इसी आधार पर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी ने भुगतान में कटौती का आदेश दिया है.

अप्रैल से जुलाई तक हुई 32 लाख रुपये से अधिक की कटौती

नगर परिषद द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, अप्रैल महीने में एजेंसी के भुगतान से 9 लाख 77 हजार 744 रुपये की कटौती की गई है. मई महीने में 10 लाख 80 हजार 776 रुपये, जून में 9 लाख 16 हजार 264 रुपये तथा जुलाई माह में आठ जुलाई तक 2 लाख 42 हजार 952 रुपये की कटौती करने का निर्देश दिया गया है. इस प्रकार चार महीनों में कुल 32 लाख 17 हजार 736 रुपये की कटौती की गई है.

सफाई व्यवस्था को लेकर वार्ड पार्षदों ने दिया था धरना

नगर परिषद क्षेत्र में सफाई व्यवस्था और विकास कार्यों को लेकर लगभग सभी बोर्ड बैठकों में हंगामा हो चुका है. कई बार स्थिति हाथापाई और मारपीट तक पहुंच चुकी है, जिसके बाद प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई थी.

हाल ही में नगर परिषद के वार्ड पार्षदों ने सफाई व्यवस्था और विकास कार्यों को लेकर नगर परिषद कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना दिया था. बाद में जिला पदाधिकारी छिरिंग वाई भूटिया के हस्तक्षेप और समुचित कार्रवाई के आश्वासन के बाद धरना समाप्त हुआ था.

क्या कहते हैं कार्यपालक पदाधिकारी

नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी दीनानाथ सिंह ने कहा कि एक लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहर में किसी भी स्थिति में प्रतिदिन 300 से कम सफाई मजदूर नहीं होने चाहिए. ऐसा होने पर भुगतान में कटौती का स्पष्ट प्रावधान है. उन्होंने बताया कि सफाई एजेंसी द्वारा केवल 295 मजदूर रखे गए हैं. ऐसे में 300 से कम मजदूर वाले दिनों के हिसाब से एजेंसी की राशि में कटौती करने का निर्देश दिया गया है.


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