अरवल सदर अस्पताल का 32 बेड वाला पीकू(PICU) वार्ड बना शोपीस, ढाई करोड़ की सुविधा के बावजूद बच्चों को नहीं मिल रहा इलाज

Author Nishikant kumr|Edited by Nikhil Anurag
Updated:
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पीकू वार्ड, सदर अस्पताल अरवल

Arwal Sadar Hospital News : अरवल सदर अस्पताल में ढाई करोड़ की लागत से बना 32 बेड का पीकू वार्ड सिर्फ दिखावा साबित हो रहा है. आधुनिक सुविधाओं से लैस इस वार्ड में गंभीर बीमार बच्चों को भर्ती करने के बजाय सिर्फ ओपीडी सेवाएं दी जा रही हैं, जिससे परिजनों को भारी परेशानी हो रही है.

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Arwal Sadar Hospital News : अरवल सदर अस्पताल परिसर में ढाई करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 32 बेड का अत्याधुनिक पीकू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) वार्ड बच्चों के लिए पूरी तरह उपयोगी नहीं बन सका है. आधुनिक सुविधाओं से लैस इस वार्ड में गंभीर रूप से बीमार बच्चों को भर्ती कर इलाज करने के बजाय केवल ओपीडी सेवा दी जा रही है. गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया जाता है.

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शाम होते ही वार्ड में लग जाता है ताला

दो वर्ष पहले विधिवत उद्घाटन के बाद शुरू हुए इस पीकू वार्ड में एक चिकित्सक, चार नर्सिंग स्टाफ, एक लिपिक और दो कार्यालय परिचारी पदस्थापित हैं. इसके बावजूद वार्ड में केवल सुबह ओपीडी संचालित होती है. अस्पताल सूत्रों के अनुसार दोपहर में ओपीडी समाप्त होने के बाद वार्ड बंद कर दिया जाता है और शाम के बाद यहां ताला लटक जाता है.

ऐसी स्थिति में इलाज के लिए आने वाले बच्चों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. गंभीर मरीजों को चिकित्सक रेफर कर देते हैं या परिजन मजबूर होकर निजी अस्पतालों का रुख करते हैं.

आईसीयू सुविधा होने के बावजूद नहीं मिल रहा लाभ

जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में आईसीयू की सुविधा उपलब्ध नहीं है. सदर अस्पताल के पीकू वार्ड में आईसीयू की व्यवस्था होने के बावजूद चिकित्सकों और पर्याप्त स्वास्थ्यकर्मियों की कमी के कारण इसका लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है. गंभीर बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में बच्चों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे जिलों में भेजना पड़ता है.

चिकित्सक ने बताई कर्मियों की कमी

पीकू वार्ड में तैनात चिकित्सक डॉ. अभिषेक कुमार ने बताया कि वार्ड में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में तैनात अधिकांश कर्मियों को एईएस (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) की रोकथाम संबंधी कार्यों में लगाया गया है. पीकू वार्ड के लिए अलग से पर्याप्त स्टाफ की नियुक्ति नहीं होने के कारण यहां इनडोर सुविधा शुरू नहीं हो सकी है.

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