नारी तू लिख सकती है स्वयं अपनी कहानी...
Updated at : 08 Mar 2019 7:07 AM (IST)
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जहानाबाद : नारी तू लिख सकती है स्वयं अपनी कहानी-तू शारदा, तू लक्ष्मी, तू चंडी, तू ही कालिका भवानी. आंचल में दूध, आंखों में पानी -कहना हो जाये अब बेइमानी. इस कविता के साथ महिलाओं ने अपनी बातें जोरदार ढंग से रखीं. मौका था अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रभात खबर की ओर से आयोजित संगोष्ठी […]
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जहानाबाद : नारी तू लिख सकती है स्वयं अपनी कहानी-तू शारदा, तू लक्ष्मी, तू चंडी, तू ही कालिका भवानी. आंचल में दूध, आंखों में पानी -कहना हो जाये अब बेइमानी. इस कविता के साथ महिलाओं ने अपनी बातें जोरदार ढंग से रखीं. मौका था अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रभात खबर की ओर से आयोजित संगोष्ठी का.
इस मौके पर विभिन्न क्षेत्रों से आयी महिलाओं ने अपनी बातें रखते हुए कहा कि महिलाएं किसी भी मामले में पुरुषों से पीछे नहीं हैं. जरूरत हैं उन्हें अवसर व सम्मान देने का, ताकि वे अपनी क्षमता को सिद्ध कर सकें. दुनिया की आधी आबादी अपने हक और सम्मान के लिए सृष्टि के प्रारंभ से ही संघर्षरत है.
भारत में आजादी के साथ ही संविधान निर्माताओं ने स्त्री को
वोटिंग के अधिकार समेत बराबरी का दर्जा दिया है, लेकिन फिर भी
इस पुरुष प्रधान समाज में स्त्रियों के लिए आजादी के हर दरवाजे खुले हैं. बाकी शिक्षा, संपत्ति, रोजगार, राजनीति आदि सभी क्षेत्रों में आधी आबादी को उसका हक नहीं मिल पाया है. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला सशक्तीकरण और पंचायती राज में आरक्षण विषयों के साथ महिलाओं के आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों पर अपनी राय रखी.
सम्मान के सवाल पर भी महिलाएं हैं काफी पिछड़ी
समाज में महिलाओं को हर दृष्टि से कमतर आंकने की प्रवृत्ति आज भी बनी हुई है. जबकि विभिन्न प्रतियोगिताओं में लड़कियां लड़कों से बेहतर परिणाम हासिल कर रही हैं. महिला कामगारों को संगठित और असंगठित दोनों ही क्षेत्रों में उचित सम्मान नहीं मिल पाता है. महिला आधारित सेवा क्षेत्रों में महिला बेरोजगारी की कमजोरी की आड़ में महिलाओं को 1000-1500 रुपये में अपना श्रम योगदान करना पड़ रहा है.जो सीधे-सीधे महिला श्रम का शोषण है.
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