जमुई में प्रधान शिक्षकों का मंथन, बोले- सरकारी सहयोग मिला तो प्राथमिक विद्यालयों की तस्वीर बदल जाएगी
अतिथि शिक्षक तथा दीप प्रज्वलन कार्यक्रम | Prabhat Khabar Network
जमुई में बिहार लोक सेवा आयोग से नियुक्त प्रधान शिक्षकों ने अपना पहला वार्षिक सेमिनार आयोजित किया. उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के एक साल के अनुभव साझा किए और वेतनमान, बकाया भुगतान व आधारभूत संरचना सुधार की मांग उठाई.
Jamui Primary Education Seminar: बिहार लोक सेवा आयोग से नियुक्त प्रधान शिक्षकों ने जमुई में अपना पहला वार्षिक सेमिनार आयोजित किया. एक वर्ष की उपलब्धियों, चुनौतियों और प्राथमिक शिक्षा सुधार पर चर्चा करते हुए उन्होंने वेतनमान, वेतन संरक्षण, बकाया भुगतान और आधारभूत संरचना सुधार की मांग सरकार के सामने रखी.
जमुई. बिहार में प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की दिशा में नियुक्त किए गए प्रधान शिक्षक अब अपने एक वर्ष के अनुभव के साथ शिक्षा व्यवस्था में बदलाव का दावा कर रहे हैं. मंगलवार को जमुई जिला मुख्यालय स्थित एक निजी होटल में बिहार लोक सेवा आयोग से नियुक्त जिले भर के प्रधान शिक्षकों का प्रथम वार्षिक सेमिनार आयोजित किया गया. कार्यक्रम में शिक्षा व्यवस्था में आए बदलाव, विद्यालयों की चुनौतियों, प्रशासनिक अनुभव और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई.
सेमिनार की शुरुआत प्रधान शिक्षक प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर की. कार्यक्रम में शामिल शिक्षकों ने अपनी सेवा के सफल एक वर्ष पूरे होने पर एक-दूसरे को बधाई दी और इस दौरान विद्यालयों में हुए सुधार तथा सामने आई समस्याओं पर खुलकर विचार साझा किए.
प्राथमिक विद्यालयों में बदलाव का दावा
प्रधान शिक्षक राहुल कुमार सिंह ने कहा कि सरकार ने यह महसूस किया था कि प्राथमिक विद्यालयों में प्रधान पद खाली रहने के कारण कई प्रशासनिक और शैक्षणिक समस्याएं बनी रहती थीं. इसी सोच के तहत पहली बार बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से राज्य के सभी प्राथमिक विद्यालयों में प्रधान शिक्षकों की नियुक्ति की गई.
उन्होंने कहा कि नियुक्ति के बाद प्रधान शिक्षकों ने समर्पण और जिम्मेदारी के साथ काम किया है, जिसके कारण प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति में व्यापक सुधार दिखाई देने लगा है. विद्यालयों में अनुशासन, शैक्षणिक गतिविधियों, प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी तंत्र में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है.
राहुल कुमार सिंह ने कहा कि यदि सरकार विद्यालयों की आधारभूत संरचना, संसाधनों और प्रशासनिक आवश्यकताओं के लिए सकारात्मक सहयोग देती है, तो सरकारी प्राथमिक विद्यालयों को निजी विद्यालयों के समकक्ष लाने में प्रधान शिक्षक कोई कमी नहीं छोड़ेंगे.
शिक्षा विभाग के अधिकारियों से भी मिली सराहना
कार्यक्रम में बतौर अतिथि शामिल राज्य प्रतिनिधि बलवंत सिंह ने कहा कि प्रधान शिक्षक केवल जमुई ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार में बेहतर कार्य कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि विभागीय राज्य स्तरीय अधिकारी भी उनके कार्यों की सराहना कर रहे हैं.
उन्होंने राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद के उपनिदेशक संजय कुमार द्वारा लिखी पुस्तक साधारण लोग असाधारण शिक्षक का उल्लेख करते हुए कहा कि आज शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी सार्वजनिक मंचों पर प्रधान शिक्षकों के कार्यों की प्रशंसा कर रहे हैं. यह शिक्षा व्यवस्था में उनके योगदान का महत्वपूर्ण संकेत है.
Jamui Primary Education Seminar: वेतनमान और वेतन संरक्षण की मांग तेज
सेमिनार के दौरान प्रधान शिक्षकों ने केवल उपलब्धियों की चर्चा नहीं की, बल्कि अपनी प्रमुख समस्याओं को भी सरकार के सामने रखा. राज्य प्रतिनिधि दारा सिंह ने कहा कि प्रधान शिक्षक बेहतर कार्य कर रहे हैं, लेकिन वेतन संरचना और सेवा संबंधी कई मुद्दे अब भी लंबित हैं.
उन्होंने कहा कि वर्तमान वेतनमान अत्यंत कम है, जिससे प्रधान शिक्षक आर्थिक और व्यक्तिगत स्तर पर कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं. उन्होंने मांग की कि प्रधान शिक्षक नियमावली के अनुरूप सातवें वेतन आयोग की संरचना के आधार पर उनका वेतनमान निर्धारित किया जाए.
इसके साथ ही वेतन संरक्षण, बकाया वेतन भुगतान और अन्य सेवा संबंधी लंबित मामलों का शीघ्र समाधान करने की भी मांग उठाई गई. शिक्षकों का कहना था कि सम्मानजनक वेतन और सेवा सुरक्षा मिलने पर वे और अधिक प्रभावी ढंग से विद्यालयों के विकास में योगदान दे सकेंगे.
शिक्षा सुधार की दिशा में उम्मीदें
सेमिनार में मौजूद शिक्षकों का मानना था कि बिहार के प्राथमिक विद्यालयों में सुधार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन इसे स्थायी और व्यापक बनाने के लिए सरकार और शिक्षा विभाग का निरंतर सहयोग आवश्यक है.
प्रधान शिक्षकों ने कहा कि यदि आधारभूत सुविधाएं, भवन, शिक्षण संसाधन, डिजिटल व्यवस्था और प्रशासनिक समर्थन समय पर उपलब्ध कराया जाए, तो सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता में और तेज सुधार संभव है. उनका विश्वास है कि आने वाले वर्षों में प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है.
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