Prashant Kishor Won Bankipur Seat: क्या प्रशांत किशोर की जीत ने जातिवाद मॉडल का किया सफाया? PK की स्ट्रैटेजी की चर्चा तेज

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प्रशांत किशोर, जन सुराज संस्थापक

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Prashant Kishor Won Bankipur Seat: पटना की बांकीपुर की जनता को नये विधायक के रूप में प्रशांत किशोर मिल गए हैं. पीके ने 19 हजार 324 वोटों से बीजेपी को पछाड़ते हुए जीत हासिल की. ऐसे में बिहार की सियासत में उनके जीत की स्ट्रैटेजी की चर्चा तेज है.

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Prashant Kishor Won Bankipur Seat: सोमवार को बांकीपुर उपचुनाव का रिजल्ट आया और प्रशांत किशोर ने इस सीट पर जीत हासिल की. बीजेपी के प्रत्याशी नीरज सिन्हा को पीके ने 19 हजार 324 वोटों से हराया. जबकि आरजेडी की प्रत्याशी रेखा गुप्ता की तो जमानत जब्त हो गई. लगातार जन सुराज में जश्न का माहौल है. प्रशांत किशोर की इस जीत के बाद उनकी स्ट्रैटेजी की तो चर्चा हो ही रही साथ ही यह सवाल है कि क्या अब बिहार से जातिवाद मॉडल का सफाया हो रहा.

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क्या कहना है राजनीतिक जानकारों का?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार की राजनीति लंबे समय से जातीय समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती रही है. चुनाव आते ही यादव, कुर्मी, राजपूत, भूमिहार, मुस्लिम, अति पिछड़ा और दलित वोट बैंक की चर्चा तेज हो जाती है. लेकिन प्रशांत किशोर लंबे समय से दावा करते रहे हैं कि बिहार को जाति नहीं, बल्कि बेहतर शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेह प्रशासन की राजनीति की जरूरत है.

साथ ही बांकीपुर जैसी शहरी सीट पर मिली उनकी जीत को कई लोग इस संदेश के रूप में देख रहे हैं कि मतदाताओं का एक वर्ग अब उम्मीदवार की छवि, उसके काम और मुद्दों को भी पहले से अधिक महत्व दे रहा है. लेकिन इस एक चुनावी नतीजे के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि बिहार में जाति आधारित राजनीति खत्म हो गई है.

लेकिन इतना जरूर है कि इस जीत ने एक नई बहस को जन्म दिया है कि क्या बिहार की राजनीति अब धीरे-धीरे विकास और सुशासन की ओर बढ़ रही है? इस नतीजे के बाद राजनीतिक दलों पर भी दबाव बढ़ सकता है. केवल जातीय गणित के भरोसे चुनाव लड़ने के बजाय उन्हें अपने काम, वादों और शासन के रिकॉर्ड को भी प्रमुखता से सामने रखना पड़ सकता है.

कैसी रही प्रशांत किशोर की स्ट्रैटजी

बांकीपुर उपचुनाव के लिए प्रशांत किशोर की स्ट्रैटजी को लेकर राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि उन्होंने जमीनी स्तर पर काम किया. वे खुद ही लोगों के घर-घर तक पहुंचे, ज्यादा से ज्यादा वोट की अपील की, पदयात्रा, चर्चा और कई सभाएं कीं. वे हर बार अपने भाषण में लोगों से वोट करने और सरकार को बदलने की अपील करते थे.

इतना ही नहीं उन्होंने बीजेपी पर ज्यादा फोकस और टारगेट किया. वे कई बार बिहार के विकास की बात करते दिखे. उन्होंने अपने भाषण में इंफ्रास्ट्रक्चर, पलायन, उच्च शिक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन समेत कई आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर बात की. इस तरह से हर बार उन्होंने व्यवस्था में बदलाव की बात की.

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