जमुईकांड पर वकीलों का फैसला: जिला विधिज्ञ संघ के अध्यक्ष-सचिव नहीं करेंगे आरोपियों की पैरवी, स्पीडी ट्रायल की मांग

Updated:
विज्ञापन

फोटो जिला विधिक संघ के अध्यक्ष व महासचिव | Prabhat Khabar Network

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

जमुई में नाबालिग से दुष्कर्म की घटना के बाद जिला विधिज्ञ संघ का बड़ा फैसला. अध्यक्ष-महासचिव ने कहा, आरोपितों की ओर से नहीं लड़ेंगे केस. जानिए वकीलों की मांगें.

विज्ञापन

Jamui News: जमुई में एक नाबालिग बच्ची के साथ हुई शर्मनाक और अमानवीय घटना के बाद आम जनता के भारी आक्रोश के साथ-साथ अब न्याय के पैरोकारों ने भी कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है. कानून की चौखट पर जहां हर किसी को अपना पक्ष रखने का अधिकार होता है, वहीं इस घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए जमुई के वकीलों ने एक अभूतपूर्व और नैतिक फैसला लिया है. जिला विधिज्ञ संघ, जमुई ने सर्वसम्मति से घटना की तीखी निंदा करते हुए ऐलान किया है कि संघ के शीर्ष पदाधिकारी अदालत में आरोपियों की तरफ से केस की पैरवी नहीं करेंगे.

विज्ञापन

अध्यक्ष और महासचिव का बड़ा नैतिक निर्णय, समाज के प्रति जताई संवेदना

जिला विधिज्ञ संघ के अध्यक्ष सीताराम सिंह और महासचिव अमित कुमार ने एक संयुक्त बयान जारी कर इस गंभीर और हृदयविदारक वारदात पर गहरा दुख और आक्रोश जताया है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक मासूम और असहाय बच्ची के साथ घटित यह घटना पूरे समाज की संवेदनशीलता और चेतना को झकझोर देने वाली है. ऐसे मामलों में पीड़िता और उसके पीड़ित परिवार को बिना किसी देरी के न्याय दिलाना समाज, पुलिस और न्यायिक प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए. अपने नैतिक दायित्व का परिचय देते हुए अध्यक्ष सीताराम सिंह और महासचिव अमित कुमार ने घोषणा की है कि वे इस मामले में आरोपित अभियुक्तों की ओर से अधिवक्ता के रूप में किसी भी प्रकार की पैरवी नहीं करेंगे.

अन्य अधिवक्ताओं से अंतरात्मा की आवाज पर फैसला लेने की अपील

संघ के दोनों शीर्ष पदाधिकारियों ने इसे अपना व्यक्तिगत और नैतिक निर्णय बताते हुए जिला विधिज्ञ संघ के अन्य सभी अधिवक्ताओं से भी भावुक अपील की है. उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता और जघन्यता को देखते हुए सभी अधिवक्ता अपने नैतिक दायित्व और अंतरात्मा के अनुरूप निर्णय लें. हालांकि, कानूनी स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट करते हुए संघ ने यह भी कहा कि भारतीय न्याय प्रणाली के तहत किसी भी आरोपी का दोष सक्षम न्यायालय के फैसले से ही तय होता है और कानून के तहत सभी पक्षों के विधिक अधिकार सुरक्षित हैं. लेकिन एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में वकीलों का यह नैतिक फैसला पीड़िता के प्रति अपनी एकजुटता दिखाने का एक बड़ा जरिया है.

साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और निष्पक्ष जांच की सख्त मांग

जिला विधिज्ञ संघ ने केवल पैरवी से इंकार ही नहीं किया, बल्कि पुलिस और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर भी मुस्तैदी से नजर रखने की मांग की है. संघ ने पुलिस प्रशासन से मामले में बिना किसी दबाव या पक्षपात के तत्काल एवं प्रभावी कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया है. जांच के दौरान घटना से जुड़े तमाम आवश्यक साक्ष्यों, फॉरेंसिक सबूतों और गवाहियों को पूरी तरह सुरक्षित रखने की मांग की गई है ताकि अदालत में केस को मजबूती से खड़ा किया जा सके. इसके साथ ही पीड़िता और उसके परिवार को तुरंत सुरक्षा चक्र और आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का भी आग्रह किया गया है.

Jamui News: स्पीडी ट्रायल के माध्यम से अति-शीघ्र न्याय दिलाने की वकालत

मामले को लंबे समय तक अदालत में लटकाए रखने की संभावनाओं को खारिज करते हुए अध्यक्ष सीताराम सिंह और महासचिव अमित कुमार ने सरकार और न्यायपालिका से इसे स्पीडी ट्रायल के तहत चलाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि पीड़िता और उसके परिवार को न्याय के लिए सालों तक अदालतों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाना चाहिए. जिला विधिज्ञ संघ, जमुई ने दोहराया है कि कानून के दायरे में रहकर पीड़िता को न्याय दिलाने और अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाने के लिए संघ हर संभव कानूनी सहयोग देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.

Also Read: Nandan Yadav Encounter: कौन हैं जमुई केस के मुख्य आरोपी नंदन और हरेराम? जानें बालू ढोने से लेकर पुलिस मुठभेड़ तक की कहानी

Also Read: Jamui Encounter News: जमुई में छात्रा से बदसलूकी करने वाले का एनकाउंटर, पुलिस ने नंदन यादव को मारी गोली

आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन