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जलसंकट: ग्रामीण सूखी नदी से बालू खोद निकाल रहे पानी

Updated at : 02 May 2019 8:37 AM (IST)
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जलसंकट: ग्रामीण सूखी नदी से बालू खोद निकाल रहे पानी

विनय कुमार मिश्र, सोनो : बढ़ते पारे से लोग न सिर्फ भीषण गर्मी से परेशान हैं, बल्कि इस कारण क्षेत्र में पानी को लेकर भी हाहाकार मचा हुआ है. इलाके की अधिकतर नदियां, तालाब व कुएं सूख गये है. भूजल का स्तर इतना नीचे चला गया है कि अधिकतर चापाकल फेल हो रहे है. ऐसे […]

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विनय कुमार मिश्र, सोनो : बढ़ते पारे से लोग न सिर्फ भीषण गर्मी से परेशान हैं, बल्कि इस कारण क्षेत्र में पानी को लेकर भी हाहाकार मचा हुआ है. इलाके की अधिकतर नदियां, तालाब व कुएं सूख गये है. भूजल का स्तर इतना नीचे चला गया है कि अधिकतर चापाकल फेल हो रहे है. ऐसे में ले देकर ग्रामीणों को जिस हर घर जल नल योजना पर आस टिकी थी वह भी दम तोड़ रही है.

कई जगहों पर जलापूर्ति नहीं होने से नल से पानी आने की उम्मीद खत्म हो गयी है. दूरस्थ कई गांव में ग्रामीण दूर स्थित सूखी नदी का बालू खोदकर पानी निकालने को मजबूर हैं. घर की जिन बच्चियों को स्कूल जाकर पढ़ना था, वे सुबह व शाम घर के अधिकाधिक बर्तन लेकर नदी पहुंचती हैं और नदी का बालू खोदती हैं. गहराई से जब पानी निकलता है तब कटोरी से पानी लेकर बर्तनों को भरती हैं और पानी भरे बर्तनों को ढोकर अपने घर पहुंचाती हैं.
पूरा परिवार नदी खोदकर निकाले गये इसी पानी से प्यास बुझाता है. प्रखंड के अगहरा गांव किनारे स्थित सूखे हुए नदी में बालू खोदकर पानी निकाल रही बच्चियाें ने बताया कि उनके घर के आसपास के सभी चापाकल फेल हो गये हैं. उससे पानी नहीं आ रहा है और न ही नलों द्वारा जलापूर्ति की व्यवस्था है. ऐसे में नदी का बालू खोद कर पानी निकालना ही एकमात्र विकल्प बचा है.
ग्रामीण बताते हैं कि अगहरा गांव में कुछ वर्ष पूर्व जलमीनार भी बनाया गया था और उसका उद्घाटन भी किया गया लेकिन विभागीय उदासीनता का आलम यह है कि आज तक न तो कनेक्शन दिया गया और न ही किसी अन्य स्रोत से जलापूर्ति की गयी. दूरस्थ पहाड़ी इलाकों में स्थिति और भी गंभीर है.
मटकुआं बनाकर किसी तरह अशुद्ध पानी ही लोग प्राप्त कर रहे हैं. तालाब व पोखर के सूखने से मवेशियों को भी अपना प्यास बुझाना मुश्किल हो रहा है. प्रखंड मुख्यालय में तो स्थिति और भी विकट होती जा रही है. भूजल का स्तर काफी नीचे चला गया है. इससे लोगों के घरों में लगे चापाकल व सबमरसिबल फेल हो रहे हैं.
संपन्न लोग तो मशीन से काफी गहराई तक बोरिंग कर पानी निकाल लेते हैं, लेकिन गरीब लोग पेयजल समस्या से जूझ रहे हैं. यहां पीएचइडी द्वारा की जाने वाली जलापूर्ति अनियमित होने से भी लोग परेशान हैं. दो दिन पूर्व ही ग्रामीणों ने जलमीनार के समक्ष प्रदर्शन कर तीन वक्त नियमित जलापूर्ति की मांग की.
स्थिति की गंभीरता व परेशानी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जलमीनार के सामने प्रदर्शन करते लोगों ने विभाग को अल्टीमेटम दिया है कि जलापूर्ति नियमित नहीं करने पर आंदोलन करते हुए सड़क जाम करेंगे. सरकार हर घर जल नल योजना को लागू करते हुए पेयजल पहुंचाने का दावा करती है. अब जहां की आम जनता पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा के लिए जद्दोजहद कर रही हो वहां की जनता के लिए विकास के मायने क्या हो सकते है.
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