hajipur news. आज से शुरू होगा मापी महाअभियान : डीएम

ग्रामीण क्षेत्र में नापी शुल्क 500 व शहरी क्षेत्र में 1000 रुपया प्रति खेसरा तय
हाजीपुर. जिले में डीएम के निर्देश पर भूमि से जुड़े मामलों में आम लोगों को बड़ी राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है. सरकार के सात निश्चय-3 कार्यक्रम के तहत इज ऑफ लिविंग के लक्ष्य को हासिल करने के उद्देश्य से भूमि नापी की नई, सरल और पारदर्शी व्यवस्था लागू की जा रही है.
इस संबंध में डीएम वर्षा सिंह ने बताया कि यह व्यवस्था 26 जनवरी से जिले में प्रभावी होगी. इसके साथ ही वर्षों से लंबित भूमि नापी मामलों के निस्तारण के लिए मापी महाअभियान 31 मार्च तक चलाया जायेगा. नई व्यवस्था का उद्देश्य भूमि नापी प्रक्रिया को नागरिकों के लिए आसान बनाना, विवादों को कम करना और प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत करना है. जिले में लंबे समय से लंबित भूमि नापी मामलों को देखते हुए इस पहल को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.ऑनलाइन आवेदन से होगी प्रक्रिया की शुरुआत
अब भूमि नापी के लिए लोगों को अंचल कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. आवेदक को नापी के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा. आवेदन के समय यह स्पष्ट करना होगा कि भूमि अविवादित है या विवादित. अविवादित भूमि वह मानी जाएगी, जहां सभी सहखातेदारों में आपसी सहमति है, जबकि विवादित मामलों में सहखातेदारों या अन्य पक्षों के बीच मतभेद मौजूद होते है. विवाद की स्थिति का निर्धारण अंचलाधिकारी द्वारा किया जाएगा. जिले के सभी अंचलों में इस नई व्यवस्था को लागू करने के निर्देश दिए गए है. सरकार ने विवादित भूमि नापी की स्पष्ट श्रेणियां निर्धारित की है. इसमें स्वामित्व विवाद, राजस्व न्यायालय में लंबित वाद, चौहद्दीदारों या हिस्सेदारों के बीच विवाद, पारिवारिक भूमि विवाद, महिलाओं के पैतृक अधिकार से जुड़े मामले, अवैध अतिक्रमण तथा नक्शा या म्यूटेशन से संबंधित विवाद शामिल है. इन मामलों में विशेष सतर्कता के साथ नापी की जाएगी.शुल्क व्यवस्था से रुकेगी मनमानी
नई भूमि नापी व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता इसकी समयबद्धता है. अविवादित मामलों में भूमि नापी की प्रक्रिया 7 दिनों में पूरी की जाएगी, जबकि विवादित मामलों में यह अवधि 11 दिन निर्धारित की गई है. सभी मामलों में अमीन द्वारा नापी के बाद आवेदन की तिथि के 14वें दिन तक मापी प्रतिवेदन पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य किया गया है. इससे जिले में वर्षों से लंबित नापी मामलों के शीघ्र निस्तारण की उम्मीद है. भूमि नापी के नाम पर मनमानी वसूली रोकने के लिए सरकार ने शुल्क भी निर्धारित कर दिया है. ग्रामीण क्षेत्र में नापी शुल्क 500 रूपये प्रति खेसरा और शहरी क्षेत्र में 1000 रूपये प्रति खेसरा तय किया है. तत्काल मापी के मामलों में यह शुल्क दोगुना होगा. जिले में भी यही शुल्क व्यवस्था लागू रहेगी.नोटिस और सूचना की पारदर्शी व्यवस्था
नापी से पहले सभी चौहद्दीदारों को नोटिस देना अनिवार्य किया गया है. विवादित मामलों में नोटिस चौकीदार द्वारा, जबकि अविवादित मामलों में कार्यालय परिचारी द्वारा तामिला किया जाएगा. इसके साथ ही पंजीकृत डाक से भी नोटिस भेजे जाएंगे. आवेदन के साथ दर्ज मोबाइल नंबरों पर एसएमएस के माध्यम से स्वतः सूचना मिलने से किसी भी पक्ष को जानकारी से वंचित नहीं रहना पड़ेगा.सरकार ने लंबित मामलों के निस्तारण के लिए मापी महाअभियान चलाने का निर्णय लिया है. यह अभियान 26 जनवरी से 31 मार्च 2026 तक चलेगा, जिसके तहत 31 दिसंबर 2025 तक प्राप्त सभी लंबित भूमि नापी आवेदनों का निपटारा किया जाएगा. जिले के किसानों और रैयतों के लिए यह अभियान बड़ी राहत साबित होगा.
समाहर्ता होंगे नोडल पदाधिकारी
भूमि नापी की नई व्यवस्था और मापी महाअभियान की निगरानी की जिम्मेदारी समाहर्ता को सौंपी गई है. जिले में समाहर्ता नोडल पदाधिकारी के रूप में पूरे अभियान की समीक्षा करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि तय समय-सीमा में कार्य पूरे हों.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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