पेपरलेस रजिस्ट्री के विरोध में कातिबों का कार्य बहिष्कार, हाजीपुर समेत तीन निबंधन कार्यालयों में नहीं हुई एक भी रजिस्ट्री
कार्यालय के सामने प्रदर्शन के दौरान स्टांप विक्रेता
बिहार सरकार की पेपरलेस निबंधन व्यवस्था के विरोध में हाजीपुर, पातेपुर और महनार में कातिबों और स्टांप विक्रेताओं ने कार्य बहिष्कार कर दिया है. इस विरोध के चलते जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है, जिससे खरीदार-विक्रेता परेशान हैं.
Hajipur Scribes And Stamp Vendors Protest: बिहार सरकार की नई पेपरलेस निबंधन व्यवस्था के विरोध में शुक्रवार को जिला कातिब संघ के आह्वान पर हाजीपुर, पातेपुर और महनार अवर निबंधन कार्यालयों में कातिबों और स्टांप विक्रेताओं ने प्रदर्शन किया. आक्रोशित कातिबों और स्टांप विक्रेताओं ने कार्य बहिष्कार कर दिया. इसके कारण पूरे दिन एक भी जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो सकी. कार्यालयों में सन्नाटा पसरा रहा और दूर-दराज से रजिस्ट्री कराने पहुंचे दर्जनों क्रेता-विक्रेता मायूस होकर वापस लौट गए.
ओटीपी आधारित व्यवस्था पर साइबर फ्रॉड का खतरा
जिला कातिब संघ के सचिव सुधीर कुमार वर्मा ने नई प्रणाली पर आपत्ति जताते हुए कहा कि केवल ओटीपी के आधार पर क्रेता और विक्रेता की पहचान करना जोखिम भरा है. उनका कहना है कि दस्तावेजों पर हस्ताक्षर, अंगूठे के निशान और गवाहों की अनिवार्यता खत्म होने से भविष्य में साइबर अपराध और धोखाधड़ी का खतरा बढ़ सकता है. उन्होंने सिम क्लोनिंग, मोबाइल हैकिंग या ओटीपी धोखाधड़ी के जरिए संपत्ति के अवैध हस्तांतरण की आशंका जताई.
हस्ताक्षर और गवाहों की अनिवार्यता हटाने पर सवाल
संघ के जिलाध्यक्ष दीपक कुमार सिन्हा ने कहा कि पारदर्शिता के नाम पर लाई जा रही व्यवस्था भ्रष्टाचार रोकने के बजाय नई तरह की गड़बड़ियों को जन्म दे सकती है. उन्होंने कहा कि कानूनी सुरक्षा का आधार रहे हस्ताक्षर और गवाहों के प्रावधान को हटाने से आम जनता भविष्य में न्यायिक विवादों में फंस सकती है.
कातिबों और स्टांप विक्रेताओं ने रोजगार को लेकर जताई चिंता
कातिबों और स्टांप विक्रेताओं ने डिजिटल व्यवस्था से अपने पारंपरिक रोजगार पर संकट की आशंका जताई. उनका कहना है कि इस बदलाव से उनका पारंपरिक काम पूरी तरह खत्म होने की स्थिति में पहुंच सकता है. इससे जिले से जुड़े हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है.
लगातार तीसरे दिन निबंधन कार्य ठप
मालूम हो कि बीते 11 जुलाई को उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाजीपुर जिला अवर निबंधन कार्यालय से पेपरलेस रजिस्ट्री की शुरुआत की थी. इसके बाद से ही इसके विरोध में प्रदर्शन जारी है. निबंधन कार्य ठप रहने से आम जनता परेशान है, वहीं सरकार को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है. प्रदर्शनकारियों ने मांगें नहीं माने जाने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है.
संघ ने रखीं पांच प्रमुख मांगें
कातिब संघ की ओर से केवल ओटीपी आधारित निबंधन व्यवस्था को वापस लेने समेत कई मांगें रखी गई हैं.
- केवल ओटीपी आधारित निबंधन व्यवस्था को तुरंत वापस लिया जाए.
- डीड पर क्रेता, विक्रेता और गवाहों के भौतिक हस्ताक्षर व अंगूठे के निशान की अनिवार्यता यथावत रखी जाए.
- साइबर धोखाधड़ी रोकने के लिए पुख्ता और अतिरिक्त सुरक्षा मानक तय किए जाएं.
- कातिबों और स्टांप विक्रेताओं के पारंपरिक रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.
- किसी भी बड़े बदलाव से पहले सभी संबंधित पक्षों के साथ उच्चस्तरीय परामर्श किया जाए.
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लेखक के बारे में
By अभिषेक कुमार
अभिषेक कुमार 9 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. इनकी सबसे अच्छी पकड़ क्राइम और राजनीति की खबरों पर है.
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