वैशाली: केवीके हरिहरपुर में केला प्रसंस्करण पर दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू, जीविका के बीआरपी को दी जा रही मूल्य संवर्धन की जानकारी

Author Rahul Ray|Edited by Nikhil Anurag
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दीप प्रज्जवलीत कर प्रशिक्षण का उद्घाटन करते प्रधान व अन्य

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Hajipur Banana Processing: केवीके हरिहरपुर में केला उत्पादक क्षेत्रों के ग्राम संसाधन व्यक्तियों के लिए "केला प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन" पर दो दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ हुआ. यह प्रशिक्षण किसानों की आय बढ़ाने के आधुनिक तकनीकों के प्रसार पर केंद्रित है.

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Hajipur Banana Processing: केवीके हरिहरपुर परिसर में मंगलवार को केला उत्पादक क्षेत्रों के विभिन्न पंचायतों के जीविका के बीआरपी (ग्राम संसाधन व्यक्तियों) के लिए "केला प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन" विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया. कार्यक्रम का आयोजन कृषि अभियांत्रिकी विशेषज्ञ कुमारी नम्रता द्वारा वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अनिल कुमार सिंह के मार्गदर्शन में किया गया.

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प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जीविका के ग्राम संसाधन व्यक्तियों की क्षमता का विकास करना है, ताकि वे गांव स्तर पर किसानों तक केला प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन की आधुनिक तकनीकों का प्रभावी प्रसार कर उनकी आय बढ़ाने में सहयोग कर सकें.

31 ग्राम संसाधन व्यक्तियों ने लिया प्रशिक्षण

प्रथम दिवस के कार्यक्रम की शुरुआत प्रतिभागियों के स्वागत के साथ हुई. इसके बाद उनकी प्रारंभिक जानकारी का आकलन करने के लिए पूर्व मूल्यांकन आयोजित किया गया. प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 31 ग्राम संसाधन व्यक्तियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. प्रशिक्षण के दौरान डॉ. कविता वर्मा ने केला आटा एवं उससे तैयार किए जाने वाले मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया. प्रतिभागियों को वैज्ञानिक प्रसंस्करण, स्वच्छता, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग तथा विपणन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां भी विस्तार से प्रदान की गईं.

महिलाओं और ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार का बेहतर अवसर

इस अवसर पर वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कहा कि केला प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के माध्यम से फसलोपरांत होने वाली क्षति को काफी हद तक कम किया जा सकता है. साथ ही किसानों, विशेषकर महिलाओं एवं ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार और सूक्ष्म उद्यम की नई संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं. उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान एवं तकनीकों को अपने-अपने पंचायतों के केला उत्पादक किसानों तक पहुंचाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया.

आगामी सत्रों में दी जाएगी उद्यमिता विकास की जानकारी

कार्यक्रम के सफल आयोजन में ईशिता सिंह, ऋचा श्रीवास्तव, अंशुमान द्विवेदी, सोनू, रमाकांत, आरती, मोहित एवं दीपक ने सक्रिय सहयोग किया. प्रशिक्षण के आगामी सत्रों में प्रतिभागियों को केले से विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्माण, उद्यमिता विकास तथा विपणन संबंधी व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी, जिससे वे गांव स्तर पर इन तकनीकों का सफलतापूर्वक प्रसार कर सकें.


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