गोपालगंज में डस्टबिन और ई-रिक्शा के बावजूद ठप पड़ा कचरा उठाव, मानदेय में देरी से धीमी हुई स्वच्छता व्यवस्था
बंद पड़ा कचड़ा घर | Prabhat Khabar Network
गोपालगंज में स्वच्छता अभियान की स्थिति चिंताजनक है. लाखों खर्च के बावजूद कचरा संग्रह नियमित नहीं हो रहा. मानदेय में देरी से कर्मी सुस्त पड़े हैं और कचरा प्रसंस्करण इकाइयां भी अनुपयोगी हैं.
Gopalganj News : मांझा प्रखंड की कई पंचायतों में स्वच्छता अभियान की रफ्तार धीमी पड़ गयी है. लाखों रुपये खर्च कर घर-घर सूखा और गीला कचरा रखने के लिए डस्टबिन उपलब्ध कराये गये. कचरा संग्रह के लिए ई-रिक्शा और ठेला गाड़ियां भी दी गयीं, लेकिन नियमित कचरा उठाव नहीं होने से पूरी व्यवस्था प्रभावित हो रही है. स्वच्छता कर्मियों को समय पर मानदेय नहीं मिलने को भी व्यवस्था के प्रभावित होने की एक प्रमुख वजह बताया जा रहा है.
संसाधन मिले, लेकिन नियमित नहीं हो रहा कचरा उठाव
स्वच्छ भारत मिशन के तहत पंचायतों में घर-घर कचरा संग्रह की व्यवस्था शुरू की गयी थी. इसके लिए प्रत्येक वार्ड में स्वच्छाग्रही की नियुक्ति की गयी और उन्हें कचरा संग्रह के लिए ठेला गाड़ी तथा ई-रिक्शा उपलब्ध कराया गया.
शुरुआती दौर में अभियान को लेकर लोगों को जागरूक किया गया. इससे गांवों में साफ-सफाई की स्थिति में सुधार भी देखने को मिला था. ग्रामीण घरों से सूखा और गीला कचरा अलग-अलग रखने लगे थे. लेकिन अब कई पंचायतों में नियमित कचरा संग्रह नहीं होने से व्यवस्था प्रभावित हो रही है.
कचरा प्रसंस्करण इकाइयां भी पूरी तरह उपयोग में नहीं
स्वच्छ भारत मिशन के तहत पंचायतों में कचरा प्रसंस्करण इकाइयों का निर्माण कराया गया है. यहां सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग रखकर उसका प्रसंस्करण और प्रबंधन किया जाना है.
इसके बावजूद कई पंचायतों में कचरा प्रसंस्करण इकाइयों का समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है. कहीं कचरा नियमित रूप से नहीं पहुंच रहा है, तो कहीं संग्रह और प्रबंधन की व्यवस्था प्रभावी ढंग से संचालित नहीं हो रही है.
मानदेय में देरी से स्वच्छता कर्मियों की रफ्तार धीमी
स्वच्छता अभियान से जुड़े कर्मियों को पिछले कई महीनों से समय पर मानदेय नहीं मिलने की बात सामने आ रही है. इसका असर घर-घर कचरा संग्रह पर पड़ रहा है. कई पंचायतों में कचरा उठाव नियमित नहीं हो रहा है.
ग्रामीणों का कहना है कि पहले सुबह के समय कचरा संग्रह करने वाले ई-रिक्शा और ठेला गाड़ियों की आवाजाही नियमित रहती थी. अब कई जगहों पर कई-कई दिनों तक कचरा उठाने वाला वाहन नहीं पहुंच रहा है.
30 रुपये मासिक शुल्क वसूली भी बनी चुनौती
सरकार की योजना के अनुसार चयनित पंचायतों में प्रत्येक घर से 30 रुपये मासिक स्वच्छता शुल्क लिया जाना है. इस राशि का उपयोग स्थानीय स्तर पर कचरा संग्रह और स्वच्छता व्यवस्था को संचालित करने में किया जाना है.
लेकिन प्रखंड की कुछ पंचायतों को छोड़कर अधिकांश जगहों पर स्वच्छता शुल्क की नियमित वसूली नहीं हो पा रही है. शुल्क संग्रह की धीमी प्रक्रिया का असर भी कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर पड़ रहा है.
व्यवस्था को नियमित करने की जरूरत
डस्टबिन, ई-रिक्शा और कचरा प्रसंस्करण इकाइयां उपलब्ध होने के बावजूद यदि नियमित कचरा उठाव नहीं होता है, तो स्वच्छता अभियान का उद्देश्य पूरा करना मुश्किल होगा. पंचायत स्तर पर कचरा संग्रह की नियमित निगरानी, स्वच्छता कर्मियों को समय पर मानदेय और स्वच्छता शुल्क की नियमित वसूली जरूरी है, ताकि गांवों में शुरू की गयी व्यवस्था को दोबारा प्रभावी बनाया जा सके.
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