अक्षय तृतीया नौ को, शादी और बाजार पर दिख रहा प्रभाव

Published at :06 May 2016 3:58 AM (IST)
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अक्षय तृतीया नौ को, शादी और बाजार पर दिख रहा प्रभाव

अक्षय तृतीया पर रहेगा अस्त शुक्र का असर गोपालगंज : नौ मई को स्वयं सिद्ध मुहूर्त अक्षय तृतीया पर इस बार शुक्र अस्त होने से शादियों के सीजन पर सीधा असर नजर आ रहा है. हर साल इस दिन पंडितों से लेकर होटल-वाटिका, हलवाई और घोड़े-बग्गियों से लेकर टेंट व अन्य सामान की बुकिंग फुल […]

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अक्षय तृतीया पर रहेगा अस्त शुक्र का असर

गोपालगंज : नौ मई को स्वयं सिद्ध मुहूर्त अक्षय तृतीया पर इस बार शुक्र अस्त होने से शादियों के सीजन पर सीधा असर नजर आ रहा है. हर साल इस दिन पंडितों से लेकर होटल-वाटिका, हलवाई और घोड़े-बग्गियों से लेकर टेंट व अन्य सामान की बुकिंग फुल रहती है. मगर, इस बार ऐसा नहीं है. यह पहला मौका है कि अक्षय तृतीया पर गुलजार रहनेवाले बाजारों में इस दिनों रूटीन की ग्राहकी चल रही है.
हालांकि 29 अप्रैल तक हुए शादी-ब्याह ने इसकी पूर्ति पहले से ही कर दी है. ज्योतिषविद् राजेश्वरी मिश्र के अनुसार इस बार अक्षय तृतीया पर शुक्र अस्त व गुरु वक्री है. ऐसे में अक्षय तृतीया पर शहनाइयों की गूंज बंद रहेगी. बता दें कि शुक्र को दांपत्य जीवन का कारक माना जाता है. शादियों का अगला शुभ मुहूर्त सात जुलाई के बाद शुरू होगा, जो सात दिनों तक रहेगा. फिर जुलाई के बाद देव उठनी एकादशी तक मुहूर्त नहीं हैं.
अक्षय तृतीया का महत्व : शस्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया को स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना गया है. भविष्य पुराण के अनुसार इस तिथि की गणना युगदि तिथियों में होती है. सतयुग, त्रेता और कलयुग का आरंभ इसी तिथि को हुआ और इसी तिथि को द्वापर युग समाप्त हुआ था. बिना पंचांग देख इस दिन को श्रेष्ठ मुहूर्तों में शुमार किया जाता है. लोक भाषाओं में इसे आखतीज, अखाती और अकती कहा जाता है. भगवान विष्णु के 24 अवतारों में भगवान परशुराम, नर-नारायण एवं ह्रयग्रीव आदि तीन अवतार अक्षय तृतीया के दिन ही धरा पर आये.
तीर्थ स्थल बद्रीनारायण के पट भी अक्षय तृतीया को खुलते हैं. वृंदावन के बांके बिहारी के चरण दर्शन अक्षय तृतीया को होते हैं. जैन धर्म के पहले तीर्थंकर श्री आदिनाथ भगवान ने एक साल पूर्ण तपस्या करने के बाद इसी दिन इक्षु रस से पारायण किया था.
देवशयानी एकादशी 15 जुलाई को : 5 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल, एकादशी से देव सो जायेंगे.
यहां से चातुर्मास की शुरुआत होगी. 15 जुलाई से 10 नवंबर चार महीनों तक शादियों के मुहूर्त नहीं है. 11 नवंबर देव उठनी एकादशी से शादियों के मुहूर्त शुरू होंगे.
यह काम जारी रहेंगे : ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक जप-तप नामरण संस्कार, पूजा-पाठ, रुद्राभिषेक कथा आदि शुक्रास्त में भी जारी रहेंगे. मई और जून में विवाह के मुहूर्त नहीं है.
शुक्र का ज्योतिषी प्रभाव : ज्योतिष शास्त्रों में अनेक मांगलिक कार्यों के लिए गुरु और यक्र की स्थिति का विचार किया जाता है. विशेष रूप से गृहस्थ जीवन से जुड़े मांगलिक कार्यों के लिए इन्हें उदित अवस्था में होना जरूरी है. गुरु और शुक्र उदित अवस्था में न हो तो विवाह मुहूर्त पूर्ण शुभ नहीं माने जाते हैं.
ऐसे होता है शुक्रास्त : पंचांग के मुताबिक 29 अप्रैल को शुक्र ग्रह अस्त हो गया, जो सात जुलाई को पुन: उदय होगा. शुक्रास्त में विवाह, उपनयन, कर्ण भेद आदि कार्य वर्जित रहते हैं.
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