गया जी में चेहल्लुम के मौके पर निकला मातमी जुलूस, कर्बला में सर्वधर्म के लोगों ने दी श्रद्धांजलि

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जुलूस में शामिल लोग | Prabhat Khabar Network

कर्बला में चेहल्लुम के मौके पर सर्वधर्म के लोगों ने हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम को श्रद्धांजलि दी. शिया, सुन्नी और हिन्दू समुदाय के लोगों ने एक साथ आकर मोहब्बत और भाईचारे का पैगाम दिया, जो गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल है.

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हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के चालीसवें पर मंगलवार को शिया मस्जिद से जुलूस निकाला गया. जुलूस में काफी लोग शामिल हुए. शिया मस्जिद से निकला जुलूस पंचायती अखाड़ा होते हुए दोपहर बाद करीब तीन बजे कर्बला पहुंच कर आखिरी रसोमात अंजाम किया गया. कर्बला के खादिम डॉ सैयद शाह शब्बीर आलम कादरी ने बताया कि हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के चालीसवें के मौके पर गया कर्बला में भारी तादाद में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी.

लोग सुबह से ही फातेहा और चादरपोशी के लिए जमा हुए. इसी दौरान दोपहर बाद तीन बजे दिन में शिया हज़रात अलम लेकर कर्बला में हाज़िर हुए और हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की याद में नौहा ख्वानी वा जंजीरी मातम कर अपने अक़ीदतों मोहब्बत का नज़राना पेश किया.

मालूम हो कि हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत को तक़रीबन 1300 से ज्यादा साल हो चुके हैं, लेकिन आज भी कर्बला का वाक़या याद किया जाता है और उनके अक़ीदतमन्द और उनसे मोहब्बत करने वाले अपने-अपने तरीके से खेराज अक़ीदत पेश करते हैं और करते रहेंगे.

कर्बला की सजावट और विभिन्न समुदायों की चादरपोशी

कर्बला को फूलों से सजाया गया. बाद नमाज़े असर कर्बला रौज़े के अंदर सुन्नी व हिन्दू समुदाय के लोग चादरपोशी वा सलातो सलाम का नज़राना पेश किया. इस मौके पर ख्वातीनो हज़रात काफी तादाद में तक़रीबन रात 11 बजे तक जमे रहे.

इस मौके पर कर्बला को फूलों से सजाया गया. नादरगंज से भी लोग काफी तादाद में आकर यहां सलातो सलाम का किया नज़राना पेश.

कर्बला के खादिम डॉ सैयद शाह शब्बीर आलम क़ादरी ने बताया कि ये हिंदुस्तान में वाहिद ऐसा कर्बला है जहां शिया, सुन्नी, हिन्दू व तमाम मज़हब के लोग एकजुट होकर हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत को याद करते हैं और इस चेहल्लुम के मौके पर अपने अपने तरीके से मोहब्बत का नज़राना पेश करते हैं. शिया हज़रात नौहा ख्वानी और मातम करते हैं तो सुन्नी हज़रात नात व मनकबत और चादर पोशी करते हैं.

नादरागंज से भी लोग काफी तादाद में आकर यहां सलातो सलाम का नज़राना पेश करते हैं. वहीं हिन्दू भाई इत्र फूल व अगरबत्ती जला कर ईमाम हुसैन और कर्बला के मैदान में शहीद हुए उनके मानने वालों को याद करते हैं और साथ ही साथ भाईचारगी और मोहब्बत का पैगाम देते हैं.

गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल और शांति का संदेश

कई धर्म के लोग कर्बला आकर इमाम हुसैन को किया याद. उन्होंने बताया कि दुनिया के सभी धर्म ने अहिंसा का दरस दिया है, लेकिन अगर कोई मानव धर्म की आड़ में हिंसा फैलाता है तो वो अधर्मी है.

आज ज़रूरत इस बात की है कि हज़रत इमाम हुसैन और गौतम बुद्ध के रास्तों पर चल कर पूरी दुनिया में अमन व मोहब्बत का पैगाम फैलाया जाये. उन्होंने कहा कि गया कर्बला एक ऐसी जगह है जहां मुहर्रम व चहल्लुम पर कई धर्म के लोग एक होकर इमाम हुसैन को याद करते हैं जो गंगा जमुनी तहजीब की ज़िंदा मिसाल है.

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Niraj Kumar

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