पितृपक्ष 2026 : गया जी की 54 वेदियों पर कब होगा पिंडदान, 25 सितंबर से शुरू कर्मकांड की पूरी तारीखें
वेदी की रंगाई पुताई करते कारीगर | Prabhat Khabar Network
गयाजी में 25 सितंबर 2026 से शुरू हो रहे 17 दिवसीय पितृपक्ष मेले की तैयारी पूरी है. जानें कब और किस वेदी पर करें पिंडदान, श्राद्धकर्म और तर्पण. 54 प्रमुख वेदी स्थलों की विस्तृत जानकारी.
Pitru Paksha Mela 2026 : भगवान विष्णु की पावन नगरी गयाजी में अनादि काल से आश्विन मास में 17 दिवसीय पितृपक्ष मेले का आयोजन होता आ रहा है. इसे राजकीय मेला का दर्जा मिलने के बाद बिहार सरकार के पर्यटन विभाग व जिला प्रशासन करीब दो महीना पहले से तैयारी शुरू कर देती है. इस बार भी पितृपक्ष मेला के सफल आयोजन के लिए जिला प्रशासन द्वारा 16 कोषांगों का जहां गठन किया गया है.
वहीं श्री विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति भी मेले में देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों की सुविधा को बेहतर बनाने के लिए हर संभव कोशिश में लगी है. उल्लेखनीय है कि देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्री अपने पितरों के आत्मा की शांति व मोक्ष प्राप्ति के लिए पिंडदान, श्राद्धकर्म व तर्पण करते हैं.
गया जी शहर सहित बोधगया में 54 वेदी स्थल हैं जहां तीर्थयात्री अपने पितरों के आत्मा की शांति व उनके मोक्ष की कामना के साथ पिंडदान का कर्मकांड करते हैं. इनमें से विष्णुपद चरण सहित 19 वेदियां विष्णुपद मंदिर प्रांगण में स्थित है.

मंदिर के बाहरी परिसर व सूर्यकुंड में पांच वेदियां हैं. अंतः सलिला फल्गु नदी का भी स्थान वेदी के रूप में है. इस नदी के पूर्वी तट पर सीताकुंड व राम गया वेदी है. इनके अलावा गौ प्रचार, आम्र सिंचन, कागबली, राम कुंड, राम गया, रामशिला, गदालोल, प्रेतशिला, ब्रह्मसत, वैतरणी, अक्षयवट, भीम गया, उत्तर मानस, धर्मारण्य, मातंगवापी सरस्वती सहित कई अन्य वेदी स्थल भी है.
पितृपक्ष मेले में आने वाले अधिकतर तीर्थयात्री एक दिन अथवा तीन दिन का कर्मकांड पूरा करते हैं. काफी कम लोग 17 दिनों का कर्मकांड सम्पन्न करते हैं. जिला प्रशासन सूत्रों की माने तो बीते वर्ष 2025 के पितृपक्ष मेले में 20 लाख से अधिक तीर्थयात्री यहां आये थे. इस बार के मेले में इस आंकड़े में वृद्धि होने की संभावना व्यक्त की जा रही है.
पितृपक्ष मेले का धार्मिक, आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व
मान्यता है कि पितृपक्ष मेला के दौरान गयातीर्थ में पिंडदान करने से सात पीढ़ियों (सात गोत्रों) का उद्धार होता है और कर्ता को पितृ दोष से मुक्ति मिलती है. मान्यता है कि इस अवधि में जीवित और पितरों की आत्माओं के बीच का आध्यात्मिक पर्दा काफी पतला होता है, जिससे श्राद्ध-तर्पण का प्रभाव अधिक होता है.
वहीं विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान विष्णु स्वयं पितृ देवता के रूप में गया जी में निवास करते हैं, इसलिए इसे ''पितृ तीर्थ'' कहा जाता है. त्रेता युग में भगवान राम ने अपने पिता राजा दशरथ का पिंडदान फल्गु नदी के तट पर किया था.
तब से गयातीर्थ को पितृ श्राद्ध का सर्वोच्च स्थल कहा जाता है. कूर्म पुराण में उल्लेख है कि गया में पिंडदान से पितरों को मरण के चक्र से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है.
पितृपक्ष मेला 2026: तिथिवार कर्मकांड और वेदी स्थलों का विवरण
(1) भाद्र शुक्ल पक्ष अनन्त चतुर्दशी- 25.09.2026 (शुक्रवार)- पुनपुन पांव पूजा (गयापाल तीर्थपुरोहित का) या गोदावरी श्राद्ध.
(2) भाद्र पूर्णिमा- 26.09.2026 (शनिवार)- फल्गु स्नान श्राद्ध एवं पांवपूजा (गयापाल तीर्थपुरोहित का).
(3) आश्विन कृष्णपक्ष प्रतिपदा- 27.09.2026 (रविवार)- ब्रह्मकुंड जौ चूर्ण से पिण्डदान, प्रेतशिला श्राद्ध, रामशिला श्राद्ध, रामकुंड श्राद्ध, काकबलि तीन तीन पिंडडदान.
(4) आश्विन कृष्णपक्ष द्वितीया- 28.09.2026 (सोमवार)- पंचतीर्थ उत्तरमानस श्राद्ध, उदीची श्राद्ध, कनखल श्राद्ध, दक्षिणमानस श्राद्ध, जिव्हालोल श्राद्ध, गजाधर जी का पंचामृत स्नान.
(5) आश्विन कृष्णपक्ष तृतीया- 29.09.2026 (मंगलवार)- सरस्वती स्नान, पंचरत्न दान, मातंगवापी श्राद्ध, धर्मारण्यकूप के मध्य में श्राद्ध, बोधितरू दर्शन (बोधगया).
(6) आश्विन कृष्णपक्ष चतुर्थी- 30.09.2026 (बुधवार)- ब्रह्मसरोवर श्राद्ध, काकबली श्राद्ध, तारक ब्रह्म के दर्शन और आम्रसिंचन.
(7) आश्विन कृष्णपक्ष पंचमी- 01.10.2026 (गुरुवार)- रूद्रपद, ब्रह्मपद, विष्णुपद श्राद्ध, खीर व मावा पिंड, पांवपूजा (गयापाल तीर्थपुरोहित का).
(8) आश्विन कृष्णपक्ष षष्ठी- 02.10.2026 (शुक्रवार)- कार्तिकपद श्राद्ध,दक्षिणाग्निपद श्राद्ध, गार्हपत्याग्निपद श्राद्ध, आखनयाग्निपद श्राद्ध.
(9) आश्विन कृष्णपक्ष सप्तमी- 03.10.2026 (शनिवार)- सूर्यपद, चन्द्रपद, गणेशपद, संध्याग्निपद, आवसंध्यग्निपद व दधिचिपद श्राद्ध.
(10) आश्विन कृष्णपक्ष अष्टमी व नवमी- 04.10.2026 (रविवार)- कण्वपद, मातंगपद, क्रोंचपद, अगस्तपद, इन्द्रपद, कश्यपपद, गजकर्णपद, दूध तर्पण, अन्नदान रामगया श्राद्ध, सीताकुंड (बालु से पिंडदान), सौभग्यदान एवं पांवपूजा (गयापाल तीर्थपुरोहित का.
(11) आश्विन कृष्णपक्ष दशमी- 05.10.2026 (सोमवार)- गयासिर, गयाकूप (त्रिपिण्डी श्राद्ध), पितृ दोष एवं प्रेत-दोष निवारण श्राद्ध.
(12) आश्विन कृष्णपक्ष एकादशी- 06.10.2026 (मंगलवार)- मुण्डपृष्ठ श्राद्ध, आदि गदाधर (आदि गया), धौतपद श्राद्ध एवं चांदी दान.
(13) आश्विन कृष्णपक्ष द्वादशी- 07.10.2026 (बुधवार)- भीमगया, गौप्रचार, गदालोल श्राद्ध. (14) आश्विन कृष्णपक्ष त्रयोदशी- 08.10.2026 (गुरुवार)- विष्णु भगवान का पंचामृत स्नान, पूजन एवं फल्गु में दुग्ध तर्पण.
(15) आश्विन कृष्णपक्षचतुदर्शी- 09.10.2026 (शुक्रवार)- वैतरणी गोदान एवं तर्पण.
(16) आश्विन अमावश्या- 10.10.2026 (शनिवार)- अक्षयवट श्राद्ध, खीर से पिंडदान, शैय्यादान, सुफल एवं पितृ विसर्जन.
(17) आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा- 11.10.2026 (रविवार)- गायत्रीघाट में दही चावल से पिंडदान, आर्चाय की दक्षिणा, पितृ विदाई.
पितृपक्ष 2026 की प्रमुख महत्वपूर्ण तिथियां
(1) अनंत चतुर्दशी 25.09.2026 (शुक्रवार). (2) पूर्णिमा 26.09.2026 (शनिवार). (3) प्रतिपदा 27.10.2026 (रविवार). (4) पंचमी 01.10.2026 (गुरुवार). (5) नवमी 04.10.2026 (रविवार). (6) एकादशी 06.10.2026 (मंगलवार). (7) अमावश्या 10.10.2026 (शनिवार).
वेदी स्थलों की मरम्मत, रंगाई-पुताई व अतिरिक्त सुरक्षा की तैयारी
श्री विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष शंभू लाल विट्ठल ने बताया कि वैसे तो गया जी में सालों भर तीर्थयात्री का आना-जाना होता रहता है. लेकिन पितृपक्ष मेले के दौरान 17 दिनों में लाखों तीर्थयात्री यहां आते हैं.
जिला प्रशासन के साथ-साथ मंदिर प्रबंधन की ओर से भी आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए समुचित बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करायी जाती है. उन्होंने बताया कि इस बार भी विष्णुपद मंदिर प्रांगण स्थित वेदी स्थलों के अलावा गयासिर वेदी, गयाकूप वेदी, भीमगया वेदी, आम्रसिंचन वेदी व कई अन्य वेदी स्थलों की मरम्मत कराकर रंगाई पुताई का काम कराया जा रहा है.
उन्होंने बताया कि इसके अलावा 12 अतिरिक्त सुरक्षा गार्ड, जरूरत के अनुसार सीसीटीवी कैमरे की अतिरिक्त व्यवस्था, आठ अतिरिक्त सफाई कर्मी, मंदिर प्रांगण में पेयजल व रोशनी की समुचित व्यवस्था सहित अन्य सभी बुनियादी सुविधाएं पिंडदान के निमित्त आने वाले सभी तीर्थयात्रियों को सुलभ करायी जायेगी.
उन्होंने बताया कि हिंदी मास में एक तिथि के कम होने से चार अक्तूबर को अष्टमी व नवमी तिथि एक साथ पड़ रहा है. इसलिए तीर्थयात्रियों द्वारा चार अक्तूबर को ही दोनों तिथियों का कर्मकांड किया किया जा सकेगा.
आपके शहर में
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए