मुहर्रम : पांचवे दिन रखी जायेगी मिट्टी, 10वें दिन ताजिया जुलूस
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 07 Jul 2024 9:36 PM
इस्लामिक कैलेंडर के पहले महीने का नाम मुहर्रम है. मुहर्रम महीने की 10वीं तारीख को आशूरा कहते है. रविवार को चांद दिखने के बाद मुहर्रम शुरू हो गया.
गया़ इस्लामिक कैलेंडर के पहले महीने का नाम मुहर्रम है. मुहर्रम महीने की 10वीं तारीख को आशूरा कहते है. रविवार को चांद दिखने के बाद मुहर्रम शुरू हो गया. सोमवार यानी आठ जुलाई को मुहर्रम की पहली तारीख होगी. यह जानकारी कर्बला के खादिम डॉ सैयद शाह शब्बीर आलम कादरी ने दी. उन्होंने बताया कि चांद के नजर आते ही पूरी दुनिया के कर्बला, इमामबाड़ा, इमाम चौक में सफाई व चिराग बत्ती का दौर शुरू हो गया. हजरत इमाम हुसैन व उनके साथियों की याद आवरी की जाती है. हजरत इमाम हुसैन पैगंबर मोहम्मद सल्लल्लाहो सल्लम के नवासे थे. इनको कर्बला के मैदान में यजीद ने 10 मुहर्रम को शहीद किया था. मुहर्रम की चांद रात से ही गया स्थित कर्बला में अकीदतमंदों की भीड़ आनी शुरू हो गयी. चांद रात को कर्बला में कर्बला के खादिम सह मैनेजर डॉ सय्यद शाह शब्बीर आलम क़ादरी व लोगों ने गुसूल दिया. इसके बाद चादर पोशी की गयी. सलातो सलाम का नजराना पेश किया गया. मुहर्रम जिसे गमे हुसैन कहा जाता है, इसे दुनिया के सारे मजहब के लोग मनाते हैं. मुहर्रम के पांचवें दिन मिट्टी रखने की परंपरा है. मुहर्रम के दसवें दिन ताजिया जुलूस व अखाड़ा का आयोजन किया जाता है. खुशी नहीं, गम का होता महीना इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक नये साल की शुरुआत मुहर्रम के महीने से ही होती है. इसे साल-ए-हिजरत (जब मोहम्मद साहब मक्के से मदीने के लिए गये थे) भी कहा जाता है. मुहर्रम किसी त्योहार या खुशी का महीना नहीं है, बल्कि ये महीना बेहद गम से भरा है. डॉ कादरी ने बताया कि लगभग 1400 साल पहले मुहर्रम के महीने में इस्लामिक तारीख की एक ऐतिहासिक और रोंगटे खड़े कर देने वाली जंग हुई थी. इस जंग की दास्तां सुनकर और पढ़कर रूह कांप जाती है. बातिल के खिलाफ इंसाफ की जंग लड़ी गयी थी, जिसमें अहल-ए-बैत (नबी के खानदान) ने अपनी जान को कुर्बान कर इस्लाम को बचाया था.
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