गया जी : जन्म एक तारीख को, पढ़ाई साथ-साथ और मौत भी साथ, अब एक ही कब्र में दफन हुईं दो सहेलियां

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एक ही कब्र में दफन हुई दोनो सहेलियॉ | Prabhat Khabar Network

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बिहार के गुरुआ में दो सहेलियों की डूबने से मौत हो गई। जन्म से साथ रहने वाली इन सहेलियों को ग्रामीणों ने एक ही कब्र में दफनाकर दोस्ती की मिसाल पेश की।

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गुरुआ थाना क्षेत्र के सिमारू पंचायत अंतर्गत नवाबचक गांव में दो 13 वर्षीय सहेलियों की दर्दनाक मौत के बाद भावुक दृश्य सामने आया. आहर में डूबने से जान गंवाने वाली दोनों सहेलियों को अंतिम विदाई भी अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही कब्र में साथ दफनाया गया.

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दोनों की उम्र थी 13 साल

नवाबचक गांव निवासी अमरेन्द्र यादव की 13 वर्षीय पुत्री सुहानी कुमारी और मनोज चौधरी की 13 वर्षीय पुत्री सुप्रिया कुमारी आपस में गहरी सहेलियां थीं. दोनों की उम्र समान थी. ग्रामीणों के अनुसार, दोनों का जन्म भी एक ही तारीख को हुआ था और वे एक ही कक्षा में साथ पढ़ती थीं.

आहर में डूबने से हुई दोनों की मौत

चार सहेलियों के साथ घर लौटने के दौरान आहर में डूबने से दोनों की मौत हो गई. पोस्टमार्टम के बाद जब दोनों बच्चियों के शव गांव पहुंचे, तो पूरा नवाबचक गांव गम में डूब गया.

परिजनों के चीत्कार से माहौल हुआ मार्मिक

दोनों बच्चियों के माता-पिता और परिजनों के चीत्कार से माहौल बेहद मार्मिक हो गया. इसी बीच परिजनों और ग्रामीणों ने दोनों सहेलियों को एक ही कब्र में दफनाने का निर्णय लिया.

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जाति-पाति से ऊपर उठकर निभाई दोस्ती

अलग-अलग जातियों से होने के बावजूद ग्रामीणों ने सामाजिक बंधनों से ऊपर उठकर दोनों बच्चियों की दोस्ती को अंतिम विदाई तक कायम रखा. ग्रामीणों ने सामाजिक समानता और भाईचारे की भावना को मजबूत करने की बात कही.

इंजीनियर नागेंद्र यादव ने कही भावुक बात

नवाबचक निवासी इंजीनियर नागेंद्र यादव ने कहा कि यह बेहद भावुक करने वाली बात है कि दोनों बच्चियों का जन्म एक ही तारीख को हुआ, दोनों साथ पढ़ीं, साथ रहीं और दुर्भाग्य से एक ही हादसे में दोनों की मौत हो गई. इसलिए उनकी अंतिम यात्रा भी एक साथ निकाली गयी और उन्हें एक ही कब्र में दफनाया गया.

मौत के बाद इंसान की कोई जाति नहीं

इंजीनियर नागेंद्र यादव ने कहा कि समाज में आज भी कई जगह जाति के आधार पर अंतिम संस्कार की परंपराएं अलग हैं. लेकिन नवाबचक के लोगों ने यह संदेश दिया कि मौत के बाद इंसान की कोई जाति नहीं होती.

एक साथ निकली दोनों सहेलियों की अंतिम यात्रा

सबसे भावुक दृश्य तब रहा, जब दोनों सहेलियों की अंतिम यात्रा एक साथ निकली. जिन दो मासूमों ने जिंदगी का शुरुआती सफर साथ तय किया, उनकी अंतिम यात्रा भी साथ हुई और अब वे एक ही कब्र में हमेशा के लिए साथ सो गईं.

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