क्यों पड़ा गयाजी के इस चौराहे का नाम ‘गोलपत्थर’? जानें 16 फुट ऊंचे बलुआ खंभे और फारसी कनेक्शन की पूरी कहानी

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गोल पत्थर चौराहा

Gaya Ji News: बिहार के गयाजी शहर के मुख्य मार्ग जीबी रोड और टिकारी रोड के कॉर्नर पर स्थित ‘गोल पत्थर चौराहा’ का इतिहास बेहद दिलचस्प है. वर्ष 1789 में यहां बोधगया के बकरौर गांव से लाकर 16 फुट से अधिक ऊंचा बलुआ पत्थर का एक खंभा लगाया गया था, जिस पर फारसी भाषा लिखी हुई थी.

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Gaya Ji News: (गयाजी कार्यालय से नीरज कुमार की रिपोर्ट) :
दुनिया की अति प्राचीनतम नगरी गयाजी पुरातन काल से ही धरोहरों से भरा-पूरा पड़ा है. धार्मिक, आध्यात्मिक और पौराणिक नगरी गयाजी धाम में जहां भगवान विष्णु के चरण विष्णुपद मंदिर के गर्भ गृह में प्रथम सतयुग काल से स्थित हैं. वहीं त्रेता युग में भगवान श्री राम, द्वापर युग में भीम सहित कई अन्य देवी-देवताओं और महापुरुषों के गया जी आने का प्रमाण आज भी मौजूद है. टिकारी राजघराने की नृत्यांगना और बॉलीवुड के विख्यात सीने स्टार संजय दत्त की नानी जद्दन बाई का पौराणिक किला, ब्रिटिश काल में निर्मित ग्रियेशन कूप सहित कई ऐसे धरोहर यहां आज भी मौजूद हैं जो गयाजी को पुरातन होने का प्रमाण बतलाते हैं.

बोधगया का बकरौर गांव जहां से लाया गया था खंभा

जीबी रोड और टिकारी रोड के कॉर्नर पर है गोल पत्थर चौराहा

शहर के कई ऐसे मुहल्ले और चौराहे हैं जिनका पुरातन इतिहास रहा है. गयाजी शहर के मुख्य मार्ग जीबी रोड और टिकारी रोड के कॉर्नर पर गोल पत्थर चौराहा है. यहां भले ही अब गोल पत्थर नहीं रहा, लेकिन इसका अस्तित्व आज भी लोगों के जेहन में रचा-बसा हुआ है. आज की पीढ़ी भले ही इसके नाम के पीछे की वजह न जानती हो, लेकिन इसके नामकरण का इतिहास काफी पुराना है.

गयाजी – जीबी रोड हनुमान मंदिर के पास स्थित गोल पत्थर चौराहा

बोधगया के बकरौर गांव से लाया गया था फारसी भाषा लिखा खंभा

गया जिला गजेटियर इस बात का प्रमाण है कि इस गोल पत्थर चौराहे पर वर्ष 1789 में तत्कालीन शासनकर्ता द्वारा 16 फुट से अधिक ऊंचा बलुआ पत्थर का एक खंभा लगाया गया था. इस खंभे पर फारसी लैंग्वेज (भाषा) लिखा हुआ था. इस खंभे को नीलांजन नदी के दाहिने किनारे पर स्थित बोधगया के बकरौर गांव से लाया गया था. अशोक स्तंभ नुमा लगाये गये इस खंभे के बाद ही इस चौराहे का नाम गोल पत्थर पड़ा था.

गोल पत्थर हनुमान मंदिर के महंत पंडित राजीव रंजन दास

वर्ष 1970 के दशक में वाहन के धक्के से टूटकर विलुप्त हुआ खंभा

गोल पत्थर स्थित श्री हनुमान मंदिर के महंथ स्वामी राजीव रंजन दास जी बताते हैं कि 1970 के दशक में इस खंभे के पूरी तरह से विलुप्त हो जाने की चर्चा मंदिर के तत्कालीन महंथ बजरंग दास द्वारा की जाती थी. महंथ जी बताते थे कि बहुत ही खूबसूरत, आदमी से दुगना-तिगुना ऊंचा बलुआ पत्थर का खंभा लगा था. किसी वाहन के धक्के से टूटने के बाद प्रशासन द्वारा इसे हटाकर सड़क के किनारे रख दिया गया था, जो धीरे-धीरे बाद में विलुप्त हो गया. किसी ने इसकी खोजबीन नहीं की और आज इस जगह पर उस पत्थर का नामोनिशान नहीं है, पर चौराहे का अस्तित्व आज भी बचा हुआ है.

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सूर्यकांत कुमार

लेखक के बारे में

By सूर्यकांत कुमार

सूर्यकांत कुमार प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर हैं और डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों का अनुभव रखते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल चैनल न्यूज रील्स से की. इसके बाद नेशन दर्पण और खबरिया जंक्शन में कार्य किया, जहां कंटेंट राइटिंग, वीडियो एडिटिंग और वॉयस ओवर से जुड़े विभिन्न कार्यों का अनुभव हासिल किया. उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है. वर्तमान में वे गया, औरंगाबाद, कैमूर और बक्सर जिलों की स्थानीय (हाइपरलोकल) खबरों, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक मुद्दों और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर काम कर रहे हैं. इसके अलावा खेल और मनोरंजन से जुड़ी खबरों में भी विशेष रुचि रखते हैं.

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