गया जी की रिसर्चर अद्रिजा दत्ता ने चीन में बढ़ाया CUSB का मान, पूर्वी भारत के जनसंख्या बदलाव पर प्रस्तुत किया रिसर्च

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अद्रिजा दत्ता

Gaya Ji News : दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय की शोधार्थी अद्रिजा दत्ता ने चीन के नानजिंग विश्वविद्यालय में आयोजित 13वें अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या भूगोल सम्मेलन में शोध-पत्र प्रस्तुत कर CUSB का प्रतिनिधित्व किया.

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Gaya Ji News : दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUSB) के भूगोल विभाग की शोधार्थी अद्रिजा दत्ता ने चीन के नानजिंग विश्वविद्यालय में आयोजित 13वें अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या भूगोल सम्मेलन में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान उन्होंने “पूर्वी भारत में प्रजनन संक्रमण : सामाजिक-आर्थिक विकास और परिवार कल्याण कार्यक्रमों की भूमिका” विषय पर अपना शोध-पत्र प्रस्तुत किया. यह शोध कार्य भूगोल विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. जोगिंदर सिंह चौहान के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है. सम्मेलन में उनके शोध को विभिन्न देशों से आए विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने सराहा.

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कुलपति और कुलसचिव ने दी बधाई

सीयूएसबी के कुलपति प्रो कामेश्वर नाथ सिंह ने अद्रिजा दत्ता की इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में गौरवपूर्ण सहभागिता पर अत्यंत प्रसन्नता व्यक्त की है. कुलपति ने कहा कि इस प्रकार की सहभागिता विश्वविद्यालय के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण है, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर विश्वविद्यालय की उपस्थिति और पहचान सुदृढ़ होती है. इसके साथ ही कुलपति प्रो के एन सिंह और कुलसचिव प्रो नरेंद्र कुमार राणा ने शोधार्थी अद्रिजा दत्ता तथा उनके शोध-निर्देशक डॉ चौहान को इस बड़ी उपलब्धि के लिए संयुक्त रूप से बधाई एवं शुभकामनाएं दीं.

पूर्वी भारत में प्रजनन दर के बदलते स्वरूप पर किया शोध

विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने शोध के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस अध्ययन में पूर्वी भारत में प्रजनन दर के बदलते स्वरूप का गहन विश्लेषण किया गया है. इस शोध में प्रमुख रूप से यह रेखांकित किया गया है कि सामाजिक-आर्थिक विकास, महिलाओं की उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा परिवार कल्याण कार्यक्रमों ने क्षेत्र के जनसांख्यिकीय संक्रमण को किस प्रकार सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है.

विभिन्न देशों के विद्वानों ने सराहा

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में इस शोध-पत्र की प्रस्तुति को विभिन्न देशों से आए प्रख्यात विद्वानों एवं शोधकर्ताओं द्वारा काफी सराहा गया. इसके साथ ही इस प्रस्तुति से समकालीन जनसंख्या संबंधी संवेदनशील मुद्दों पर सार्थक अकादमिक विमर्श को भी काफी प्रोत्साहन मिला.

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