गया जी: मगध विश्वविद्यालय में मेधावियों का सम्मान, राजभाषा हिंदी के विकास पर मंथन

एमयू की छात्रा प्राची कुमारी को चेक प्रदान करते बैंक ऑफ बड़ौदा के अधिकारी व अन्य | Prabhat Khabar Network
मगध विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग के मेधावी विद्यार्थियों को बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा सम्मानित किया गया. समारोह में 11 हजार रुपये तक के चेक व प्रशस्ति पत्र वितरित किए गए और राजभाषा हिंदी के विकास पर संगोष्ठी आयोजित हुई.
Gaya ji News : बोधगया बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी मगध विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित करने के लिए मंगलवार को हिंदी भवन के प्रेमचंद सभागार में मेधावी सम्मान समारोह एवं राजभाषा संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में बैंक ऑफ बड़ौदा के क्षेत्रीय प्रबंधक संजय कुमार तिवारी, राजभाषा प्रबंधक विकास कुमार, जीबी रोड शाखा की वरिष्ठ प्रबंधक मेनका, धन संपदा प्रबंधक सुधांशु तथा विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. विनोद कुमार मंगलम् मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे.
समारोह में मधावी बच्चों को चेक से सम्मानित किया
समारोह में सत्र 2023-25 की मेधावी छात्रा प्राची कुमारी को प्रथम पुरस्कार के रूप में 11 हजार रुपये का चेक एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया. वहीं संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले उज्ज्वल कुमार और मुरली मनोहर को 3,750-3,750 रुपये का चेक तथा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया. अतिथियों ने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की.
राजभाषा हिंदी के विकास में क्षेत्रीय भाषाओं की भूमिका पर हुई चर्चा
"राजभाषा हिंदी के विकास में क्षेत्रीय भाषाओं का योगदान" विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कुलसचिव प्रो. विनोद कुमार मंगलम् ने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं के सहयोग के बिना हिंदी का समुचित विकास संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि हिंदी को समृद्ध बनाने के लिए अन्य भाषाओं के शब्दों का संतुलित और स्वाभाविक प्रयोग किया जाना चाहिए. उन्होंने लेखिका गीतांजलि श्री के उपन्यास रेत समाधि के अंग्रेजी अनुवाद का उदाहरण देते हुए भाषा की समृद्धि पर विस्तार से प्रकाश डाला.
विदेशों में भी हिंदी को बढ़ावा दे रहा बैंक ऑफ बड़ौदा
बैंक ऑफ बड़ौदा के क्षेत्रीय प्रबंधक संजय कुमार तिवारी ने कहा कि बैंक की विभिन्न देशों में संचालित शाखाएं हिंदी के प्रचार-प्रसार और उसके प्रयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि बैंकिंग क्षेत्र में हिंदी लगातार मजबूत हो रही है.
राजभाषा प्रबंधक विकास कुमार ने संविधान में राजभाषा संबंधी प्रावधानों, समय-समय पर लिए गए निर्णयों तथा आधुनिक एआई और डिजिटल टूल्स के माध्यम से हिंदी के बढ़ते उपयोग की जानकारी दी.
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. परम प्रकाश राय ने किया. सहायक आचार्य डॉ. राकेश कुमार रंजन ने अतिथियों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया. इस अवसर पर डॉ. अंबे कुमारी, डॉ. किरण कुमारी शर्मा, डॉ. रामध्यान शर्मा, शोधार्थी जितेंद्र, राजन तथा स्नातकोत्तर के विद्यार्थी गोपेश, बंटी, गुड्डू, परवेज, मुन्ना, इंद्रजीत, रामानुज, अनीश सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे.
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