बोधगया में अनागरिक धर्मपाल की 162वीं जयंती मनाई गई, आयुक्त बोलीं- उनकी दूरदर्शिता ने बौद्ध धर्म को नई दिशा दी

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बोधगया में ‘संबोधि बुद्धगया जर्नल’ का विमोचन करतीं मगध प्रमंडल की आयुक्त डॉ. सफीना एएन और अन्य अतिथि.

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बोधगया में महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के संस्थापक अनागरिक धर्मपाल की 162वीं जयंती एक भव्य समारोह के साथ मनाई गई. इस अवसर पर बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार और ऐतिहासिक महाबोधि धर्मशाला की 125वीं वर्षगांठ को याद किया गया. मुख्य अतिथि आयुक्त डॉ. सफीना एएन ने धर्मपाल के योगदान की सराहना की.

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Bodhgaya News : महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के संस्थापक अनागरिक धर्मपाल की 162वीं जयंती गुरुवार को बोधगया में भव्य समारोह के साथ मनाई गई. यह कार्यक्रम दोपहर तीन बजे अनागरिक धर्मपाल मेमोरियल हॉल में आयोजित किया गया. समारोह में बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार और महाबोधि सोसाइटी की ऐतिहासिक विरासत को विशेष रूप से याद किया गया.

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कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के आगमन के बाद अनागरिक धर्मपाल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई.

महाबोधि विद्यापीठ के छात्रों द्वारा जयमंगला गाथा के साथ दीप प्रज्ज्वलन किया गया और अतिथियों को खादा पहनाकर सम्मानित किया गया. छात्रों ने नृत्य और गीत की सुंदर प्रस्तुति देकर समारोह को सांस्कृतिक रंग प्रदान किया.

स्वागत भाषण और ऐतिहासिक धर्मशाला का परिचय

महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया, बोधगया केंद्र के सहायक भिक्खु-इन-चार्ज वेन आर ज्ञानरतन थेरो ने स्वागत भाषण दिया. इसके बाद डॉ. कैलाश प्रसाद ने वर्ष 1901 में अनागरिक धर्मपाल द्वारा निर्मित महाबोधि धर्मशाला की 125वीं वर्षगांठ का परिचय दिया.

यह सोसाइटी का पहला भवन था, जिसने बौद्ध धर्म के पुनरुत्थान में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. इस दौरान श्रीलंका के कोलंबो विश्वविद्यालय के गणित के वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो. चूला जयवर्धने ने भी सभा को संबोधित किया.

विशिष्ट अतिथियों के विचार और 'संबोधि बुद्धगया जर्नल' का विमोचन

इस कार्यक्रम में वट लाओ इंटरनेशनल के एबॉट वेन साइक्सांना बोन्थुआंग, पूर्व एसपी इंटेलिजेंस (उत्तर प्रदेश) संजय कुमार और बिहार विरासत विकास समिति के निदेशक तथा विश्वभारती, शांतिनिकेतन के प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल रहे. उन्होंने बौद्ध धर्म की वैश्विक पहुंच और सांस्कृतिक संरक्षण पर अपने विचार रखे.

साथ ही पीपीटी के माध्यम से 'बोधगया के सांस्कृतिक विरासत संरक्षण: एक भविष्य दृष्टिकोण' विषय पर प्रस्तुति दी. समारोह के दौरान ‘संबोधि बुद्धगया जर्नल’ (2026) का औपचारिक विमोचन भी किया गया.

यह महाबोधि सोसाइटी के धर्मशाला भवन के 125 वर्ष होने के उपलक्ष्य में एक विशेष अंक है, जिसमें भारत, श्रीलंका और म्यांमार के विद्वानों के शोध आलेख प्रकाशित किए गए हैं.

आयुक्त का संबोधन और समापन

मुख्य अतिथि के रूप में मगध प्रमंडल की आयुक्त डॉ. सफीना एएन ने अपने संबोधन में अनागरिक धर्मपाल के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उनकी दूरदर्शिता ने भारत और श्रीलंका सहित पूरे विश्व में बौद्ध धर्म को एक नई दिशा प्रदान की है.

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कार्यक्रम की अध्यक्षता उरुवेला फॉरेस्ट मेडिटेशन एंड महाबोधि मेडिटेशन सेंटर के प्रधान वेन सयादॉ उ संदामुनि संदलंकार महाथेरो ने की. इस अवसर पर स्कूली बच्चों को पुरस्कार और प्रमाण पत्र वितरित किए गए तथा विशिष्ट अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट किए गए.

कार्यक्रम का संचालन डॉ. कैलाश प्रसाद ने किया, जबकि अंत में महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के जीबी सदस्य एडवोकेट अमरेन्द्र कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन दिया.

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