दिल की बीमारी से जूझ रहे गया जी के 10 बच्चे मेदांता भेजे गए, मुख्यमंत्री बाल ह्रदय योजना के तहत पटना में होगा मुफ्त इलाज

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इलाज के लिए पटना जाने के लिए अपने परिजन के साथ तैयार बच्चे  | Prabhat Khabar Network

इलाज के लिए पटना जाने के लिए अपने परिजन के साथ तैयार बच्चे | Prabhat Khabar Network

गया जी में मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत दिल के छेद या अन्य हृदय रोगों से पीड़ित बच्चों को चिन्हित कर निशुल्क इलाज मुहैया कराया जा रहा है. हाल ही में 10 बच्चों को उनके परिजनों के साथ पटना के मेदांता अस्पताल भेजा गया, जहाँ उनकी निशुल्क जांच हुई.

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Mukhyamantri Bal Hriday Yojana Gaya : गया जी में मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत दिल में छेद वाले बच्चे या अन्य प्रकार के हृदय रोग से ग्रसित बच्चों को चिह्नित कर उन्हें बेहतर इलाज मुहैया कराया जा रहा है. शुरुआती जांच के बाद ऐसे बच्चों की सूची तैयार कर स्वास्थ्य विभाग उनके इलाज की व्यवस्था करती है.

बाल हृदय योजना के तहत इन बच्चों को निशुल्क इलाज की सुविधा दी जाती है. इसके लिए जिला से 10 बच्चों को पटना स्थित जय प्रभा मेदांता सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल भेजा गया है. शनिवार को इन बच्चों को उनके परिजन के साथ 102 एंबुलेंस की मदद से पटना भेजा गया. रविवार को मेदांता अस्पताल में निशुल्क जांच शिविर लगाकर इन बच्चों की जरूरी जांच की गई है.

प्रखंडवार चिह्नित किए गए बच्चों की विस्तृत जानकारी

डीपीएम नीलेश कुमार ने बताया कि मानपुर से दो, गुरारू से दो तथा फतेहपुर, सदर प्रखंड, खिजरसराय, परैया, वजीरगंज व मोहनपुर से एक-एक बच्चों को चिह्नित कर जांच के लिए पटना भेजा गया है. राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम द्वारा सभी प्रखंडों में ऐसे बच्चों को चिह्नित किया जाता है. इसमें उन बच्चों का चयन किया जाता है, जिनके दिल में छेद की समस्या होती है.

सरकारी खर्च पर होती है पूरी इलाज और सर्जरी की व्यवस्था

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के डीआइइसी प्रबंधक सह समन्वयक उज्ज्वल कुमार ने बताया कि जांच के बाद सर्जरी की आवश्यकता पड़ने पर सर्जरी की जाएगी.

यह सर्जरी मेदांता अस्पताल में ही किया जाएगा. उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में 34 बच्चों को चिह्नित किया जा चुका है. इनमें से तीन बच्चों को सर्जरी के लिए श्री सत्य सांई हार्ट हॉस्पिटल अहमदाबाद भेजा गया है.

आवागमन, ठहरने और खान-पान का खर्च उठाती है सरकार

स्वास्थ्य विभाग की ओर से बच्चे और उसके परिजन के आवागमन, रहने-सहने के साथ खानपान की व्यवस्था व खर्च वहन किया जाता है.

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