बिहार के 2 जिलों में गंगा किनारे फोरलेन एलिवेटेड रोड बनाने का रास्ता साफ, साफियाबाद से सबौर तक फर्राटा भरेंगी गाड़ियां

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गंगा किनारे बनाया जाएगा फोरलेन रोड (सांकेतिक तस्वीर)

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Four Lane Ganga Path Project: पटना के मरीन ड्राइव की तरह मुंगेर और भागलपुर जिले में भी गंगा पथ बनाए जाने की योजना है. इसके लिए एनओसी भी दे दी गई है. जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने के बाद गाड़ियां फर्राटा भर सकेंगी. गंगा पथ की लंबाई लगभग 83 किलोमीटर की होगी.

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Four Lane Ganga Path Project: मुंगेर से भागलपुर होते हुए सबौर तक गंगा किनारे करीब 83 किलोमीटर लंबा फोरलेन गंगा पथ बनाने का रास्ता साफ हो गया है. इस परियोजना को अब सबसे अहम मंजूरी मिल गई है. जल संसाधन विभाग ने पथ निर्माण विभाग को NOC जारी कर दी है. पिछले कई दिनों से इस परियोजना को लेकर चर्चा हो रही थी. लेकिन अब इसपर काम भी तेज कर दिया गया है.

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कहां से कहां तक बनेगी सड़क

जानकारी के मुताबिक, प्रस्तावित गंगा पथ को पटना के जेपी गंगा पथ की तर्ज पर विकसित करने की योजना है. इसका रूट मुंगेर के साफियाबाद से शुरू होकर बरियारपुर, घोरघट और सुल्तानगंज होते हुए भागलपुर और सबौर तक जाएगा. साथ ही पूरी परियोजना को दो हिस्सों में बांटा गया है.

दो फेज में इस तरह होगा काम

पहले खंड में मुंगेर से सुल्तानगंज तक 41.931 किलोमीटर सड़क बनेगी. इसमें करीब 30 किलोमीटर सड़क जमीन पर होगी, जबकि 11.88 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड होगा. दूसरे खंड में सुल्तानगंज से भागलपुर होते हुए सबौर तक 41.258 किलोमीटर सड़क बनाई जाएगी. इसमें 30.698 किलोमीटर एट-ग्रेड सड़क और 10.56 किलोमीटर एलिवेटेड रोड होगा.

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पुल और फ्लाईओवर के साथ प्रोजेक्ट में ये भी शामिल

यह परियोजना महज सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रहेगी. बल्कि गंगा में रिटेनिंग वॉल, टो वॉल, छोटे-बड़े पुल, फ्लाईओवर, स्पर, बॉक्स कल्वर्ट और व्हीकल अंडरपास जैसी संरचनाएं बनाई जाएंगी. साथ ही गंगा किनारे घाटों को भी विकसित किया जाएगा. इस परियोजना को हाइब्रिड एन्युटी मोड पर संचालित किया जाएगा. इसमें निर्माण एजेंसी को परियोजना की करीब 60 प्रतिशत राशि खुद खर्च करनी होगी.

जल संसाधान विभाग ने रखी शर्त

लेकिन इस परियोजना को लेकर जल संसाधन विभाग ने कुछ शर्तें भी रखी है. जानकारी के मुताबिक, विभाग ने NOC देते हुए साफ कर दिया है कि सड़क निर्माण के कारण गंगा की धारा पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए. निर्माण के दौरान समय-समय पर जगह निरीक्षण भी होगा. साथ ही सड़क ऐसी बनाई जानी होगी कि वहां जलजमाव न हो. अगर निर्माण के बाद जलजमाव या गंगा की धारा में किसी तरह की समस्या आती है, तो उसे दूर करने का पूरा खर्च पथ विकास निगम को ही उठाना होगा.

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