Dengue in Bihar: बिहार में बढ़ रहा 'डेंगू के डंक' का आतंक, जानें चिकित्सकों द्वारा बताए गए बचाव के उपाय
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 10 Oct 2022 6:21 AM
Dengue in Bihar: पहले प्रकार में डेंगू बुखार आता है. दूसरे चरण में डेंगू बुखार के साथ शरीर में चकता कर देता है और शरीर के जोड में तेज दर्द आरंभ हो जाता है. वहीं तीसरे चरण को डेंगू शाॅक सिमराॅन कहा जाता है. इसमें मरीज गंभीर हो जाता है.
भागलपुर: जिले में डेंगू का आतंक आरंभ हो गया है. शहरी एवं ग्रामीण इलाके में इस बार डेंगू लोगों को अपने चपेट में ले रहा है. इस बीच सदर अस्पताल में डेंगू जांचने वाला किट पिछले तीन दिनों से खत्म हो गया है. यहां डेंगू के संदिग्ध मरीज आते है तो उनको जांच के लिए निजी लैब में भेज दिया जाता है. जिससे सामान्य रोगी को जांच कराने में खर्च करना पड रहा है.
वहीं, सिविल सर्जन डॉ. उमेश शर्मा ने बताया पटना से डेंगू (एनएस1एजी) किट उपलब्ध नहीं कराया गया है. मुख्यालय से किट मांगा गया है. जब तक यहां हमें नहीं मिल जाता तब तक स्थानीय स्तर पर किट की खरीदारी सोमवार को होगी. 500 डेंगू किट खरीद लिया जायेगा. ऐसे में सोमवार को सदर अस्पताल में आने वाले मरीजों को जांच की सुविधा मिलेगी.
डेंगू के चपेट में लगातार लोग आ रहे है. इन लोगों को जांच की अभी सख्त जरूरत है. एेसे में सदर अस्पताल के पैथोलाॅजी में डेंगू किट खत्म हो गया है. इस वजह से आधे दर्जन से ज्यादा संदिग्ध डेंगू मरीज को वापस लौट जाना पडा. वहीं यहां आने वाले संदिग्ध मरीजों का सीबीसी जांच कर दिया जाता है. इससे प्लेटरेटस कितना है इसकी जानकारी हो जाता है. जिसका प्लेटलेटस कम होता है उसे डेंगू का मरीज मान कर इलाज के लिए भेज दिया जाता है. वहीं जब मरीज चिकित्सक के पास जाते है तो उनको किट से जांच के लिए भेजा जाता है. यह जांच सदर अस्पताल में नहीं होने की वजह से मरीज को निजी लैब में जाना पड़ रहा है.
सदर अस्पताल में किट से जांच नहीं होने की वजह से मरीजों को बाहरी लैब में जाकर जांच कराना पड रहा है. इसका लाभ उठाने में निजी लैब संचालक पीछे नहीं है. किट से डेंगू जांच करने के लिए कम से कम छह सौ रुपया वसूला जाता है. वहीं मरीज की गंभीरता आैर कितना उसे जांच जरूरी है उसके हिसाब से जांच का शुल्क बढा कर एक हजार से ज्यादा वसूल लिया जा रहा है. किट का थोक मूल्य लगभग सौ रुपया किट की आपूर्ति करने वाले दुकानदार के अनुसार विभिन्न कंपनी डेंगू किट बनाती है. अगर थोक में यह किट खरीदता है तो प्रति किट अस्सी से नब्बे रुपया आता है. जबकि खुदरा में यह सौ रुपया तक आता है. एक किट से एक बार जांच होता है. हालांकि इस जांच को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना की तरह शुल्क तय नहीं किया है इस वजह से मनमानी करने में कोई कोर कसर नहीं छोडा जाता है.
शहरी क्षेत्र में रहने वाले लगभग आधे दर्जन डेंगू पाॅजिटिव मरीजों ने बताया की प्लेटलेटस पचास हजार तो किसी का साठ हजार है. इसके बाद भी कमजोरी या किसी और तरह की परेशानी नहीं हो रही है. वहीं शहर के वरीय चिकित्सक डाॅ विनय कुमार झा कहते है प्लेटलेटस जब बीस हजार से कम होने लगता है तो परेशानी होती है. कभी कभी एक लाख प्लेटलेटस वाले को भी उल्टी एवं जोड जोड में दर्द होने लगता है. हमारे यहां तीन तरह का डेंगू होता है.
पहले प्रकार में डेंगू बुखार आता है. दूसरे चरण में डेंगू बुखार के साथ शरीर में चकता कर देता है और शरीर के जोड में तेज दर्द आरंभ हो जाता है. वहीं तीसरे चरण को डेंगू शाॅक सिमराॅन कहा जाता है. इसमें मरीज गंभीर हो जाता है उसका बीपी घटने लगता है शरीर का मुख्य अंग काम करना बंद कर देता है. राहत की बात यह है की अभी जो मरीज मिल रहे है उनको सामान्य बुखार है वो गंभीर नहीं हो रहे है. इसका यह मतलब नहीं है की डेंगू होने पर लापरवाही करे. मरीज हमेशा मच्छरदानी में रहे क्योंकि अगर मरीज को मच्छर काटता है आैर वहीं मच्छर दूसरे व्यक्ति को काट लेता है तो उसे डेंगू का खतरा हो सकता है. आगे ये कहते है अगर प्लेटलेटस बीस हजार से नीचे हो जाता है तो प्लेटलेटस चढाने की जरूरत होती है.
डाॅ. विनय कुमार झा कहते है अगर मरीज डेंगू से पीडित है तो उसे भोजन में विशेष ध्यान रखना चाहिए. अपने आहार में तरल भोजन शामिल करे. जिसमें जूस, नारियल पानी, इलेक्ट्राॅल पाउडर शामिल है. मरीज का बीपी घटने की संभावना बनी रहती है इसलिए स्लाइन चढाने की जरूरत होती है. बुखार अगर मरीज को है तो वो सिर्फ पारासिटामोल टेबलेट ले. डेंगू मरीज को बुखार के साथ साथ उल्टी होता है इससे बीपी घटता है. इस वजह से उल्टी नहीं हो इसका खास ख्याल रखे.
मुख्य रूप से मच्छर के काटने से मानव शरीर में वायरस जाता है उसे से डेंगू होता है. ऐसे में साफ पानी को जमने नहीं दे. आवास के आसपास स्वच्छता रखे. गमला, एसी, कुलर में भी पानी जमने नहीं दे. यह मच्छर साफ पानी में पनपता है.
मायागंज अस्पताल में रविवार को दो मरीज डेंगू पाॅजिटिव पाये गये. संदिग्ध परिस्थिति में ये दोनों मायागंज अस्पताल इलाज के लिए पहुंचे थे, जहां डेंगू जांच किया गया तो ये संक्रमित पाये गये. इसमें एक सच्चिदानंदनगर निवासी 23 साल का युवक है तो दूसरी मिरजानहाट निवासी 16 साल की युवती. जबकि सदर अस्पताल में रविवार को भर्ती हुए 38 साल के डेंगू पाॅजिटिव मरीज का प्लेटलेट्स 28 हजार हो जाने पर इसे बेहतर इलाज के लिए मायागंज अस्पताल रेफर कर दिया गया. सदर अस्पताल में डेंगू किट नहीं होने की वजह से एक का भी जांच नहीं किया जा सका.
जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के माइक्रो बॉयोलॉजी विभाग का डेंगू जांच के लिए एलिजा मशीन खराब हो गया है. जिस वजह से छह दिन से मैनुअल तरीके से एलिजा जांच कर रिपोर्ट मरीज को दिया जा रहा है. वहीं यहां प्रत्येक दिन करीब पांच से छह सौ सेंपल एलीजा जांच के लिए विभिन्न सरकारी अस्पताल से भेजा जाता है. करीब एक सप्ताह के अंदर एलिजा जांच में छह मरीजों में डेंगू कन्फर्म की रिपोर्ट अब तक मिली है.
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