यूरिया की किल्लत और ऊंची कीमत से किसान परेशान, 267 की जगह 340 रुपये तक वसूली का आरोप
डखराम में युरिया खाद उतारते व्यापारी | Prabhat Khabar Network
बेनीपुर में यूरिया खाद निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बिक रहा है। किसान खाद की किल्लत और मनमाने दाम से परेशान हैं। प्रशासन ने कालाबाजारी रोकने के निर्देश दिए हैं।
Urea Fertilizer Price: प्रकृति की मार झेल रहे बेनीपुर क्षेत्र के किसानों को धान की फसल बचाने के लिए यूरिया खाद की कथित किल्लत और ऊंची कीमत की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. किसानों का आरोप है कि स्थानीय खुदरा विक्रेता कृत्रिम अभाव दिखाकर निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूल रहे हैं. किसानों के अनुसार, यूरिया की निर्धारित कीमत करीब 266.50 से 267 रुपये प्रति बोरा है, जबकि उनसे 330 से 340 रुपये तक लिये जाने की शिकायत है.
यूरिया की बढ़ी मांग के बीच किसानों की परेशानी
किसानों के अनुसार बारिश के बाद धान की फसल में यूरिया की मांग बढ़ गयी है. ऐसे में कई दुकानदार खाद उपलब्ध नहीं होने की बात कह रहे हैं. यूरिया नहीं मिलने से किसानों को फसल बचाने की चिंता सता रही है.
किसानों का कहना है कि एक आधार कार्ड पर सिर्फ एक बोरा यूरिया देने के नियम के कारण भी उनकी परेशानी बढ़ गयी है. जिन किसानों को अधिक मात्रा में खाद की जरूरत है, उन्हें पर्याप्त यूरिया नहीं मिल पा रहा है.
निर्धारित कीमत से अधिक वसूली का आरोप
किसानों ने आरोप लगाया कि यूरिया की निर्धारित कीमत करीब 267 रुपये प्रति बोरा होने के बावजूद खुदरा दुकानदार 330 से 340 रुपये तक वसूल रहे हैं. किसानों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें अधिक कीमत देकर खाद खरीदनी पड़ रही है.
वहीं खुदरा विक्रेताओं का कहना है कि उन्हें थोक व्यापारियों से करीब 270 रुपये में यूरिया मिलता है. इसके अलावा लोडिंग, अनलोडिंग और परिवहन का खर्च भी उन्हें वहन करना पड़ता है. इसी कारण कीमत को लेकर अंतर की स्थिति बन रही है.
कृषि विभाग ने खाद की कमी से किया इनकार
इधर अनुमंडल कृषि पदाधिकारी धर्मेंद्र कुमार गुप्ता ने किसानों से निर्धारित दर से अधिक कीमत लिये जाने और खाद की कमी के आरोपों से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि किसानों को 267 रुपये प्रति बोरा की दर से यूरिया उपलब्ध कराया जा रहा है.
उन्होंने बताया कि खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए एक आधार कार्ड पर एक बोरा यूरिया देने का निर्देश है. यदि किसी किसान को इससे अधिक खाद की जरूरत है तो उसे बीएओ या अनुमंडल कृषि पदाधिकारी से अनुमति लेनी होगी.
थोक विक्रेताओं पर लगे आरोपों को भी नकारा
अनुमंडल कृषि पदाधिकारी ने खुदरा विक्रेताओं की ओर से जिले के थोक विक्रेताओं पर लगाए गए आरोपों को भी नकार दिया. उन्होंने कहा कि किसानों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत यूरिया उपलब्ध कराया जा रहा है.
फिलहाल किसानों की सबसे बड़ी चिंता समय पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध होना है, ताकि बारिश के बाद धान की फसल को आवश्यक पोषक तत्व मिल सकें और उत्पादन प्रभावित न हो.
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लेखक के बारे में
By सुबोध नारायण पाठक
सुबोध नारायण पाठक पिछले 20 सालों से प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. ये सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझते हैं और डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स व नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद करते हैं.
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