ओजोन संरक्षण से ही सुरक्षित होगा भविष्य, एलएनएमयू में ओजोन सप्ताह 2026 का शुभारंभ

Updated:
विज्ञापन

विचार रखते प्रो. दिलीप कुमार चौधरी. | Prabhat Khabar Network

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में ओजोन सप्ताह 2026 का शुभारंभ किया गया. विशेषज्ञों ने ओजोन परत के क्षरण के कारणों और इसे रोकने के उपायों पर प्रकाश डाला. भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया.

विज्ञापन

दरभंगा: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के रसायनशास्त्र विभाग एवं डॉ. प्रभात दास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में ओजोन सप्ताह 2026 का शुभारंभ किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन रसायनशास्त्र विभागाध्यक्ष सह विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. दिलीप कुमार चौधरी ने किया.

विज्ञापन

प्रो. चौधरी ने कहा कि वायुमंडल में ओजोन की मात्रा बहुत कम है, फिर भी यह मानव स्वास्थ्य, कृषि और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. पृथ्वी की लगभग 90 प्रतिशत ओजोन समताप मंडल में स्थित है, जो सतह से 10 किलोमीटर से अधिक ऊपर है. यही ओजोन परत सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से पृथ्वी की रक्षा करती है.

उन्होंने कहा कि मानवीय गतिविधियों के कारण ओजोन परत को क्षति पहुंच रही है. ओजोन परत में छिद्र बनने से पराबैंगनी विकिरण आसानी से वायुमंडल में प्रवेश कर जाता है, जो मनुष्य, जीव-जंतुओं और वनस्पतियों के लिए अत्यंत हानिकारक है.

नाइट्रोजन ऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन, कार्बन मोनोऑक्साइड तथा फैक्टरियों और वाहनों से निकलने वाली अन्य गैसें सूर्यताप के साथ प्रतिक्रिया कर ओजोन प्रदूषक कण बनाती हैं. ओजोन क्षरण के लिए क्लोरो फ्लोरो कार्बन गैस प्रमुख रूप से जिम्मेदार है.

प्रो. चौधरी ने बताया कि जैव प्रौद्योगिकी, आनुवंशिक अभियांत्रिकी, उन्नत सामग्री विज्ञान और टिकाऊ तकनीकों के माध्यम से ओजोन परत के क्षरण को रोकने और उसके दुष्प्रभावों को कम करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है. इसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ और टिकाऊ पर्यावरण सुनिश्चित करना है.

ओजोन को नष्ट कर रहे कई रसायन : प्रो. सहाय

मुख्य अतिथि टीएमबीयू भागलपुर के रसायनशास्त्र विभाग के वरीय प्राध्यापक प्रो. एएन सहाय ने कहा कि हैलोजन, मिथाइल क्लोरोफॉर्म और कार्बन टेट्राक्लोराइड जैसे रसायन भी ओजोन को नष्ट कर रहे हैं. सीएफसी गैस का उपयोग एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर, फोम, रंग और प्लास्टिक जैसे दैनिक उपयोग के उत्पादों में किया जाता है, जिसे कम करना जरूरी है.

उन्होंने कहा कि मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ओजोन और जलवायु संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है. इसका पालन वैज्ञानिकों, प्रौद्योगिकीविदों, अर्थशास्त्रियों और नीति निर्माताओं द्वारा तय खोज, समझ, निर्णय, कार्रवाई और सत्यापन के सिद्धांत पर करना अति महत्वपूर्ण है.

लेखन और भाषण प्रतियोगिता का आयोजन

कार्यक्रम संयोजिका डॉ. मोनी शर्मा ने बताया कि ओजोन सप्ताह के अंतर्गत निबंध, भाषण और पोस्टर प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है. शुक्रवार को लेखन और भाषण प्रतियोगिता हुई. 12 सितंबर को पोस्टर प्रतियोगिता होगी. 16 सितंबर को पुरस्कार वितरण किया जाएगा.

आयोजन में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों ने भाग लिया. कार्यक्रम का संचालन डॉ. मोनी शर्मा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन फाउंडेशन के सचिव मुकेश कुमार झा ने किया. निर्णायक मंडल में चंद्रधारी विज्ञान महाविद्यालय के डॉ. बीडी त्रिपाठी और मारवाड़ी महाविद्यालय के डॉ. गजेंद्र भारद्वाज शामिल थे.

यह भी पढ़ें

पीएटी-2024 के तहत पीएचडी नामांकन प्रक्रिया पर फिर लगी रोक, अगले आदेश तक सभी कार्रवाई स्थगित

आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन