LNMU: 86 सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मान, कुलपति बोले- शिक्षा विकास का बेहतरीन माध्यम

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दीप जलाकर कार्यक्रम का उदघाटन करते कुलपति प्रो. संजय कुमार चाैधरी, विप सदस्य सर्वेश कुमार व अन्य. | Prabhat Khabar Network

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में शिक्षक दिवस पर एक खास समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें गत वर्ष सेवानिवृत्त हुए 86 शिक्षकों को सम्मानित किया गया. कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी ने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला.

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LNMU Teachers Day 2026: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में शिक्षक दिवस के अवसर पर जुबिली हॉल में शिक्षक सम्मान समारोह सह आधुनिक शिक्षा एवं भारतीय ज्ञान-परंपरा में शिक्षकों की भूमिका विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी ने की.

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समारोह के दौरान गत एक वर्ष में अवकाश ग्रहण करने वाले 86 शिक्षकों को कुलपति एवं अतिथियों ने पाग, चादर और प्रशस्ति पत्र आदि देकर सम्मानित किया. विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों को भी कुलपति ने प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया.

अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी ने कहा कि शिक्षा विकास का बेहतरीन माध्यम है. प्राचीन शिक्षा व्यवस्था जहां चरित्र निर्माण और संस्कार पर आधारित थी, वहीं आधुनिक शिक्षा प्रणाली कौशल पर अवलंबित है. आधुनिक शिक्षा कौशल विकास पर अधिक केंद्रित है.

उन्होंने कहा कि शिक्षक अगली पीढ़ी को शिक्षा के साथ संस्कार भी देते हैं. हम सभी को संकल्प लेना चाहिए कि ऐसा बेहतर वातावरण बनायेंगे, जिससे छात्रों के साथ-साथ समाज का भी विकास हो सके.

शिक्षकों को सम्मान देना बहुत बड़ी बात : प्रो. वीरेंद्र

मुख्य अतिथि प्रो. वीरेन्द्र नारायण यादव ने कहा कि राजा-महाराजा के समय से ही समाज में शिक्षकों का काफी आदर रहा है. आज के दिन शिक्षकों को सम्मान देना बहुत बड़ी बात है. इससे शिक्षा के लिए बेहतर वातावरण तैयार होगा.

भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिकता से जोड़ने पर जोर

एमएलसी सर्वेश कुमार ने कहा कि भारत के महान शिक्षक एवं दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन को देश में शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की परंपरा है. इस दिन शिक्षक और बेहतर करने का संकल्प लेते हैं.

उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में ज्ञान के साथ छात्रों का चरित्र निर्माण और संस्कार देना शिक्षकों का सबसे महत्वपूर्ण कार्य रहा है. भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिकता से जोड़कर ही इसे बेहतर ढंग से आगे बढ़ाया जा सकता है.

प्रो. सिद्धार्थ शंकर सिंह ने कहा कि वैदिक युग से ही भारतीय ज्ञान परंपरा समृद्ध रही है. प्रो. अमरेश शाण्डिल्य ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा अति प्राचीन, असीम, समृद्ध और चिरंतन है.

राष्ट्रगीत से राष्ट्रगान तक सांस्कृतिक प्रस्तुति

प्रो. मुनेश्वर यादव के संचालन में आयोजित समारोह का स्वागत कुलसचिव डॉ. दिव्या रानी हांसदा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन कुलानुशासक प्रो. विजय कुमार यादव ने किया. समारोह की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई.

विश्वविद्यालय के संगीत एवं नाट्य विभाग के छात्र-छात्राओं ने राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान, कुलगीत और बिहार-गीत प्रस्तुत किया. समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ. कार्यक्रम की शुरुआत में अतिथियों ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की. अतिथियों का स्वागत पाग, चादर, मोमेंटो और पुष्पगुच्छ से किया गया.

समारोह में संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, सहयोगी कर्मचारी, अवकाश प्राप्त शिक्षकगण और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे.

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