मखाना उत्पादन में वैज्ञानिक तकनीक पर जोर, कृषि विज्ञान केंद्र में 50 किसानों को दिया गया प्रशिक्षण
प्रशिक्षण में शामिल वैज्ञानिक व किसान | Prabhat Khabar Network
मखाना की खेती में वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल करके किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है. विशेषज्ञ प्रशिक्षण के माध्यम से मखाने की खेती, प्रसंस्करण और मूल्य वर्धित उत्पाद बनाने की जानकारी दे रहे हैं, जिससे ग्रामीण युवाओं और महिला समूहों के लिए नए उद्यम के अवसर खुल रहे हैं.
Makhana Farming: कृषि विज्ञान केंद्र में मखाना उत्पादन एवं प्रसंस्करण विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. केंद्र के अध्यक्ष डॉ. दिव्यांशु शेखर की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा के डॉ. मनोज कुमार और डॉ. धर्मेंद्र कुमार विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए. कार्यक्रम में दरभंगा जिले के विभिन्न प्रखंडों से पहुंचे 50 किसानों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया.
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डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि मखाना अब पारंपरिक जलक्षेत्रों तक सीमित नहीं है. वैज्ञानिक तकनीक, बढ़ती बाजार मांग, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और प्रसंस्करण तथा निर्यात की संभावनाओं के कारण यह महत्वपूर्ण व्यावसायिक फसल के रूप में उभर रहा है. रोस्टेड, फ्लेवर्ड मखाना, पाउडर, स्नैक और अन्य खाद्य उत्पादों की बढ़ती मांग से इसके बाजार का विस्तार हुआ है.
केंद्राध्यक्ष डॉ. दिव्यांशु शेखर ने खेत आधारित मखाना उत्पादन की तकनीक की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि पानी रोकने की क्षमता वाली समतल भूमि, मजबूत मेड़ और उचित सिंचाई तथा जल निकासी व्यवस्था खेत आधारित उत्पादन के लिए जरूरी है. इससे जलस्तर, पौधों की स्थिति और फसल प्रबंधन को नियंत्रित करना अपेक्षाकृत आसान होता है.
प्रसंस्करण से बढ़ता है उत्पाद का मूल्य
डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने मखाना प्रसंस्करण की विभिन्न अवस्थाओं की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि बीज संग्रहण के बाद सफाई, सुखाने, ग्रेडिंग, भूनने, फोड़ने, छंटाई और पैकेजिंग की प्रक्रिया से तैयार मखाना बाजार तक पहुंचता है.
उन्होंने कहा कि प्रसंस्करण में आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल से श्रम कम करने के साथ गुणवत्ता में भी एकरूपता लाई जा सकती है. मखाना से रोस्टेड, मसाला, पेरी-पेरी, हर्बल फ्लेवर, पाउडर, लड्डू, मिठाई और हेल्थ स्नैक जैसे मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने की संभावनाओं की जानकारी भी दी गयी.
खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता, उचित पैकेजिंग, लेबलिंग और गुणवत्ता नियंत्रण को भी जरूरी बताया गया.
महिला समूह और युवाओं के लिए उद्यम की संभावनाएं
कार्यक्रम की संचालिका डॉ. पूजा कुमारी ने कहा कि मखाना की पूरी वैल्यू चेन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा कर सकती है. महिला स्वयं सहायता समूह सफाई, ग्रेडिंग, रोस्टिंग, फ्लेवरिंग और पैकेजिंग से जुड़कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं.
वहीं, ग्रामीण युवा मिनी प्रोसेसिंग यूनिट, पैकेजिंग यूनिट और स्थानीय ब्रांड के माध्यम से अपना उद्यम शुरू कर सकते हैं. इससे मखाना उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण और विपणन के क्षेत्र में भी ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं.
कार्यक्रम में कृषि अभियांत्रिकी वैज्ञानिक ई. निधि कुमारी, पौध संरक्षण वैज्ञानिक डॉ. अभिषेक राणा, फार्म मैनेजर डॉ. चंदन कुमार समेत केंद्र के अन्य कर्मी उपस्थित थे.
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