Darbhanga: श्यामा मंदिर के तालाब घाट पर महिलाओं ने की वरुण देव की सामूहिक पूजा, भक्ति में झूमा सिंधी समाज

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प्रस्तुति दे रही कलाकार तवीषा | Prabhat Khabar Network

दरभंगा में झूलेलाल महोत्सव के चौथे दिन सिंधी समाज की महिलाओं ने श्यामा मंदिर के तालाब घाट पर जल देवता वरुण की सामूहिक पूजा-अर्चना की. शाम को आयोजित भजन संध्या में ग्वालियर के कलाकारों ने भक्तिमय प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया.

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Darbhanga News: पूज्य सिंधी पंचायत, दरभंगा के तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय श्री झूलेलाल महोत्सव के चौथे दिन सोमवार को धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. सुबह झूलेलाल मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और भगवान झूलेलाल की आरती हुई. शाम में श्यामा मंदिर परिसर स्थित तालाब घाट पर सिंधी समाज की महिलाओं ने सामूहिक रूप से जल देवता वरुण की पूजा-अर्चना की. इसके बाद भजन संध्या में ग्वालियर से आये कलाकारों ने सिंधी और हिंदी भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भक्तिरस में सराबोर कर दिया.

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श्यामा मंदिर में महिलाओं ने की वरुण देव की पूजा

सिंधी समाज की महिलाएं दोपहर से ही झूलेलाल मंदिर में एकत्र होने लगी थीं. पूजा-अर्चना और आरती की थालियां सजाकर महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में भजन-कीर्तन करते हुए शाम करीब पांच बजे श्यामा मंदिर पहुंचीं.

मंदिर परिसर स्थित तालाब घाट पर आटे से निर्मित चार मुख वाले दीपक को प्रज्वलित कर वरुण देव का आह्वान किया गया. इसके बाद महिलाओं ने विधि-विधान से जल देवता की पूजा-अर्चना और सामूहिक आरती की.

झूलेलाल महोत्सव में जल पूजा का विशेष महत्व

सिंधी समाज की धार्मिक परंपरा में भगवान झूलेलाल को जल एवं वरुण देवता का स्वरूप माना जाता है. भगवान झूलेलाल सिंधी समाज के प्रमुख आराध्य देव हैं और उन्हें प्रेम, भाईचारे, सद्भाव व समृद्धि का प्रतीक माना जाता है.

फोटो- 6परिचय- जल देवता वरुण की पूजा-अर्चना करती महिलाएं. | Prabhat Khabar Network
जल देवता वरुण की पूजा-अर्चना करती महिलाएं. | Prabhat Khabar Network

इसी कारण झूलेलाल महोत्सव के दौरान जल की पूजा और वरुण देव की आराधना का विशेष धार्मिक महत्व है. आयोजकों के अनुसार यह परंपरा जल के प्रति श्रद्धा के साथ प्रकृति और जल संरक्षण के प्रति संवेदनशील रहने का संदेश भी देती है.

ग्वालियर के कलाकारों ने बांधा भक्ति का समां

सोमवार शाम सात बजे से आयोजित भजन संध्या में ग्वालियर से आये सिंधी म्यूजिकल ग्रुप के कलाकारों ने सिंधी और हिंदी भाषा में भजनों, सिंधी लोकगीतों तथा फिल्मी धुनों पर आधारित भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी.

दूरदर्शन, संस्कार चैनल एवं सिंधु वेलफेयर सोसायटी से सम्मानित कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं का मन मोह लिया. सिंधी म्यूजिकल ग्रुप के गायक जावेद और जीतू खत्री ने एक के बाद एक भक्ति गीत प्रस्तुत किये.

जावेद खत्री ने सिंधी भाषा में विभिन्न भजनों की प्रस्तुति दी, जबकि जीतू खत्री ने भी कई भक्ति गीत सुनाये. मेलो ज्योतिन जो, मेलो लालड़ जो की प्रस्तुति के दौरान पूरा परिसर तालियों और जयकारों से गूंज उठा. श्रद्धालु भक्ति में झूमते नजर आये.

कलाकार अनिल वर्मा ने ऑक्टोपैड एवं सैंपलर, रोहित शर्मा ने तबला, रोशन मास्टर ने ढोल और कुणाल ने ऑर्गन पर संगत की. छोटी बच्ची तवीषा ने भी अपनी प्रस्तुति से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया.

कलाकारों को किया गया सम्मानित

सांस्कृतिक कार्यक्रम से पहले पूज्य सिंधी पंचायत के मुखिया जगत लाल जुमनानी ने अतिथियों का स्वागत किया. ग्वालियर से आये कलाकारों को परंपरा के अनुसार सम्मानित किया गया.

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