दरभंगा की दुर्लभ पांडुलिपियां अब होंगी और सुरक्षित, डिजिटाइजेशन का काम शुरू

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सर्वेक्षित पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन कार्य का फीता काटकर शुभारम्भ करते डीएम व संस्थान निदेशक व अन्य | Prabhat Khabar Network

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दरभंगा में राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वे के तहत महत्वपूर्ण पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन का कार्य शुरू हो गया है. यह पहल सदियों पुरानी ज्ञान परंपरा को सुरक्षित रखने और शोधकर्ताओं के लिए सुलभ बनाने की दिशा में एक अहम कदम है.

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दरभंगा ज्ञानभारतम् मिशन के तहत राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वे के दौरान सर्वेक्षित पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन का काम बुधवार से शुरू हो गया. मिथिला स्नातकोत्तर संस्कृत अध्ययन एवं शोध संस्थान में डीएम कौशल कुमार और संस्थान के निदेशक डॉ सुरेंद्र प्रसाद सुमन ने संयुक्त रूप से फीता काटकर इस कार्य की शुरुआत की.

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वर्षों पुरानी पांडुलिपियां अब डिजिटल रूप में होंगी सुरक्षित

डिजिटाइजेशन की शुरुआत के मौके पर डीएम कौशल कुमार ने ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण पांडुलिपियों के संरक्षण को जरूरी बताया. उन्होंने कहा कि पांडुलिपियों को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित रखने से इन्हें लंबे समय तक संरक्षित किया जा सकेगा.

संस्थान में संरक्षित इन पांडुलिपियों में ऐतिहासिक और शोध की दृष्टि से महत्वपूर्ण सामग्री शामिल है. डिजिटाइजेशन के बाद इनके खराब होने या समय के साथ नष्ट होने के जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी.

शोधकर्ताओं के लिए भी आसान होगी पहुंच

डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित होने के बाद पांडुलिपियों के अध्ययन और शोध में भी सुविधा मिलने की उम्मीद है. शोधकर्ता इन दस्तावेजों की सामग्री को डिजिटल माध्यम से बेहतर तरीके से देख और समझ सकेंगे.

पांडुलिपियों का डिजिटाइजेशन होने से पुरानी ज्ञान परंपरा और ऐतिहासिक सामग्री को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखने में भी मदद मिलेगी. यह प्रक्रिया संस्थान में संरक्षित महत्वपूर्ण दस्तावेजों के संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है.

कई अधिकारी और विशेषज्ञ रहे मौजूद

कार्यक्रम में सहायक समाहर्ता कल्पना रावत, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सह नोडल पदाधिकारी चंद्रन कुमार मौजूद रहे. इसके अलावा प्राधिकृत संस्था सीबीएसपीएल ग्रुप के प्रोजेक्ट हेड एजाज अहमद ने भी कार्यक्रम में भाग लिया.

चंद्रधारी संग्रहालय के रविकांत, डॉ रामबाबू आर्य, पूर्व निदेशक राजदेव प्रसाद और पांडुलिपि अनुभाग के प्रभारी नेती कामति समेत अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी मौके पर मौजूद थे.

डिजिटल संरक्षण से बढ़ेगी पांडुलिपियों की उपयोगिता

ज्ञानभारतम् मिशन के तहत चल रहे इस कार्य का उद्देश्य सर्वेक्षित पांडुलिपियों को डिजिटल स्वरूप में संरक्षित करना है. इससे दुर्लभ दस्तावेजों की सामग्री को सुरक्षित रखने के साथ उनके अध्ययन और शोध का दायरा बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

दरभंगा जैसे ऐतिहासिक और शैक्षणिक महत्व वाले क्षेत्र में पांडुलिपियों का डिजिटल संरक्षण पुरानी ज्ञान परंपरा को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है.

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