Darbhanga News: सावन में इन 5 शिव मंदिरों में उमड़ती है सबसे ज्यादा भीड़, जानिए क्या है इनकी खासियत

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गंगेश्वर स्थान महादेव की आरती में शामिल श्रद्धालु

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सावन माह में मिथिलांचल के 5 प्राचीन शिवधामों पर भक्तों का सैलाब उमड़ता है। गंगेश्वरनाथ, मानेश्वरनाथ, रामेश्वरनाथ, बटेश्वरनाथ और अंकुरित महादेव मंदिरों में आस्था और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलता है। जानें इन पावन स्थलो की खासियतें।

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Sawan Somwar: सावन माह आते ही पूरा मिथिलांचल 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गूंज उठता है. जाले, सिंहवाड़ा और केवटी प्रखंड के लगभग हर गांव में शिवालय हैं, लेकिन सावन के सोमवार को पांच प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की ऐसी भीड़ उमड़ती है कि पैर रखने तक की जगह नहीं बचती. इनमें रतनपुर का गंगेश्वरनाथ महादेव, मनामदेव का मानेश्वरनाथ, केवटी का रामेश्वरनाथ, सिंहवाड़ा का बटेश्वरनाथ और कोरा का अंकुरित महादेव प्रमुख हैं.

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गंगेश्वरनाथ महादेव: क्षेत्र का सबसे प्राचीन शिवधाम

जाले प्रखंड के रतनपुर स्थित गंगेश्वरनाथ महादेव मंदिर को क्षेत्र का सबसे प्राचीन शिवधाम माना जाता है. मान्यता है कि मंदिर परिसर का पोखर कभी गंगा की धारा का हिस्सा था और इसी जल से बाबा का अभिषेक किया जाता है. सावन सोमवार को सुबह तीन बजे से ही श्रद्धालुओं की कतार लग जाती है, जो दोपहर तक बनी रहती है. यहां रविवार और सोमवार को विशेष मेला भी लगता है.

मानेश्वरनाथ: मनोकामना पूरी होने की आस्था

मनामदेव गांव स्थित मानेश्वरनाथ महादेव को मनोकामना शिव के नाम से जाना जाता है. श्रद्धालु करीब पांच किलोमीटर दूर कमला नदी से जल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होती है.

रामेश्वरनाथ में सावन का भव्य मेला

केवटी प्रखंड मुख्यालय के समीप स्थित रामेश्वरनाथ महादेव मंदिर में सावन के पूरे महीने भव्य मेला लगता है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए यहां पहुंचते हैं.

बरगद के नीचे विराजमान हैं बटेश्वरनाथ

सिंहवाड़ा प्रखंड के बटेश्वरनाथ महादेव मंदिर में बरगद के विशाल पेड़ के नीचे शिवलिंग स्थापित है. विवाह, संतान और अन्य मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए श्रद्धालु विशेष रूप से यहां पूजा-अर्चना करने आते हैं.

स्वयं प्रकट हुए अंकुरित महादेव

कोरा गांव स्थित अंकुरित महादेव के बारे में मान्यता है कि यहां का शिवलिंग स्वयं धरती से प्रकट हुआ था. इसी कारण इसे अत्यंत जागृत शिवधाम माना जाता है और दूर-दराज से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

सुबह तीन बजे से लग जाती है लंबी कतार

सावन सोमवार को इन सभी मंदिरों में सुबह तीन बजे से ही श्रद्धालु बोल बम के जयघोष के साथ कतार में लग जाते हैं. गंगेश्वरनाथ और मानेश्वरनाथ मंदिरों में कतार एक से डेढ़ किलोमीटर तक पहुंच जाती है. मंदिर परिसरों के बाहर प्रसाद, चूड़ी, खिलौने और अन्य दुकानों से मेले जैसा दृश्य बना रहता है.

आस्था के साथ सामाजिक मेल-मिलाप का भी केंद्र

इन शिवधामों की विशेषता केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है. सावन के दौरान यहां दूर-दराज से आए लोग अपने रिश्तेदारों और परिचितों से भी मिलते हैं, जिससे ये मंदिर सामाजिक मेल-मिलाप का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन जाते हैं.


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