BRICS समिट में विदेशी मेहमानों को मिलेगा सत्तू और मिथिला का मखाना, बिहारियों के लिए गर्व का पल

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चना का सत्तू (बाएं) और मखाना (दाएं) की तस्वीर (सांकेतिक)

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BRICS समिट में भारत की विविधता को दर्शाने के लिए बिहार के सत्तू और मिथिला के मखाने को शामिल किया गया है. विदेशी मेहमानों और मीडिया को इन पारंपरिक बिहारी उत्पादों का स्वाद चखने का मौका मिलेगा.

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BRICS Summit 2026: बिहार का देसी स्वाद अब दुनिया के बड़े मंच पर अपनी पहचान बनाने जा रहा है. BRICS समिट में आने वाले विदेशी मेहमानों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया को बिहार का सत्तू और खासकर मिथिला क्षेत्र में उगने वाला मखाना भेंट किया जाएगा. भारत सरकार ने इस बार मीडिया किट के जरिए देश के अलग-अलग राज्यों की खासियतों को दुनिया के सामने रखने की तैयारी की है. इसमें बिहार के सत्तू-मखाना के साथ ओडिशा की कोरापुट कॉफी और गुजरात के पारंपरिक हस्तशिल्प को भी जगह मिली है.

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मीडिया किट में दिखेगी 'इंडिया स्टोरी'

विदेश मंत्रालय के ओएसडी (पीआर) वासुदेव रवि के मुताबिक, इस बार मीडिया किट के जरिए 'इंडिया स्टोरी' पेश करने की कोशिश की गयी है. इसका मकसद भारत की विविधता, पारंपरिक खान-पान और अलग-अलग राज्यों की खासियतों को अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक पहुंचाना है.

इसी पहल के तहत विदेश मंत्रालय ने तीन राज्यों के साथ साझेदारी की है. बिहार की ओर से सत्तू और मखाना उपलब्ध कराया गया है. सत्तू को बिहार के पारंपरिक पेय और खान-पान का अहम हिस्सा माना जाता है, जबकि मखाना राज्य के प्रमुख उत्पादों में शामिल है.

‘मखाने की धरती’ कही जाती है मिथिला

बता दें, मिथिला क्षेत्र में मखाना सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि यहां की परंपरा, अर्थव्यवस्था और पहचान से जुड़ा हुआ है. दरभंगा, मधुबनी और आसपास के इलाकों के तालाबों और जलाशयों में बड़े पैमाने पर मखाने की खेती होती है. यहां के किसान पीढ़ियों से मखाना उत्पादन से जुड़े हैं. मेहनत से तालाबों से निकाला गया मखाना कई प्रक्रियाओं से गुजरकर देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचता है. यही वजह है कि मिथिला की पहचान अब 'मखाने की धरती' के रूप में भी मजबूत हो रही है.

विदेशी मेहमानों तक पहुंचेगा बिहारी स्वाद

BRICS Summit में आने वाले विदेशी मेहमान और अंतरराष्ट्रीय मीडिया से जुड़े लोग बिहार के इन दोनों उत्पादों से रूबरू होंगे. उन्हें सत्तू और मखाना चखने का मौका मिलेगा.

बिहार के लिए इसे खास इसलिए माना जा रहा है, क्योंकि मखाना अब राज्य की पहचान से जुड़े प्रमुख उत्पादों में अपनी जगह बना चुका है. वहीं गर्मी के मौसम में खास तौर पर पसंद किया जाने वाला सत्तू बिहार के पारंपरिक खान-पान की पहचान है.

अंतरराष्ट्रीय मंच पर इन उत्पादों की मौजूदगी से बिहार के स्थानीय स्वाद और कृषि आधारित उत्पादों को व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है.

सत्तू-मखाना के साथ घर ले जा सकेंगे बिहारी स्वाद

मीडिया किट में बिहार के उत्पादों को शामिल करने का उद्देश्य सिर्फ विदेशी मेहमानों को स्वाद से परिचित कराना नहीं है. इसके जरिए राज्य की पारंपरिक पहचान और स्थानीय उत्पादों को भी दुनिया के सामने रखने की कोशिश की जा रही है.

मखाना और सत्तू जैसे उत्पाद बिहार के गांवों, किसानों और स्थानीय कारोबार से भी जुड़े हैं. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मेहमानों तक इनकी पहुंच राज्य के लिए एक 

दुनिया तक पहुंचेगी बिहार की पहचान

सत्तू और मखाना को BRICS जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच की मीडिया किट में जगह मिलना बिहार के लिए खास अवसर माना जा रहा है. इससे राज्य के पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक दर्शकों के सामने रखने का मौका मिलेगा.

विदेश मंत्रालय की इस पहल में स्वाद और हुनर के जरिए भारत की विविधता को पेश करने की कोशिश साफ नजर आती है. बिहार का सत्तू और मखाना अब इसी 'इंडिया स्टोरी' का हिस्सा बनने जा रहा है.

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